आचार्य चतुरसेन ने कहा है-"मैं अब तक की अपनी सारी रचनाओं को रद्द करता हूं और वैशाली की नगर वधू को एकमात्र रचना घोषित करता हूं।"
तो इसे पढ़ने के बाद मैं भी विवश हूं यह कहने के लिए - मैं आज तक की पढ़ी हुई तमाम रचनाओं को ख़ारिज़ करता हूं ।
@sushilakajla2@Decentladki1@deepakjat5
अनुशासन—गुर्जर समाज की पहचान
आज राजस्थान की राजधानी जयपुर एक ऐसे दृश्य की गवाह बनेगी, जो केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि गुर्जर समाज के बदलते सफर और उसकी सामूहिक एकता और प्रेम का संदेश होगा।
सतरंगी ध्वज, सफेद पोशाक और देवजी के जयकारों के साथ जब यह श्रीदेवधाम पदयात्रा राजधानी के हृदय से होकर गुजरेगी, तब सबसे बड़ा परिचय हमारी संख्या नहीं, हमारा अनुशासन होना चाहिए।
अनुशासन गुर्जर समाज की पहचान है और इस यात्रा के दौरान इसे बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। राजधानी जयपुर केवल राजस्थान का शहर नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की नजरों का केंद्र है। इसलिए हमारी हर गतिविधि समाज की छवि का हिस्सा बनेगी।
कभी गुर्जर समाज को पशुपालन और अशिक्षा जैसे पुराने सामाजिक टैग से देखा जाता था। लेकिन समय बदला, समाज बदला और आज गुर्जर समाज ने शिक्षा, प्रशासन, राजनीति, सेना, पुलिस, व्यवसाय और हर क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।
हमारी पहचान केवल हमारे अतीत से नहीं, बल्कि हमारे वर्तमान के आचरण से तय होगी।
हम दुनिया को यह संदेश देना चाहते हैं कि हाँ, हमारा इतिहास पशुपालन से जुड़ा रहा है, लेकिन हमारी रगों में देशभक्ति, स्वाभिमान, त्याग और अनुशासन आज भी उतनी ही मजबूती से मौजूद हैं।
इसलिए आज जयपुर की सड़कों पर हमारी सबसे बड़ी ताकत हमारी भीड़ नहीं, हमारा संयम और अनुशासन दिखाई दे।
हर समाजबंधु यह संकल्प लेकर चले—
न कोई अव्यवस्था, न किसी को असुविधा, न नियमों का उल्लंघन।
क्योंकि राजधानी गवाह बनेगी उस समाज के सफर की, जिसने पशुपालन से राजसत्ता तक का रास्ता तय किया है—और आज अपने अनुशासन से अपनी पहचान लिख रहा है।
गुर्जर समाज का संदेश स्पष्ट हो—
हम जहाँ खड़े होते हैं, वहाँ हमारी संख्या से पहले हमारा संस्कार दिखाई देता है।
जय देवनारायण जी की ✊🚩