दलित भाइयों-बहनों से मेरा विनम्र निवेदन है #DimagiNaxal के बहकावे में मत आइए।
ये लोग भले ही धरातल पर कमजोर हो गए हों, लेकिन दिमागी रूप से आज भी सक्रिय हैं।
जो भारत विरोध की बात करे,हिंदू विरोध करे या हमारे आराध्यों के बारे में अपशब्द बोले-समझ लीजिए, वही दिमागी नक्सली मानसिकता है।
सावधान रहिए पहचानिए और ऐसे लोगों के बहकावे में आने से बचिए।
“आरक्षण का लाभ वही लोग ले रहे हैं जो मजबूत हैं. DM, SP, DIG, IG, DGP, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, राष्ट्रपति… आज उनके बेटे और ये आरक्षण का लाभ उठा रहे हैं.”- ओपी राजभर
भगवान सत्यनारायण की कथा के माध्यम से फर्जी आंबेडकरवादी एजेंडे की ध्वस्त करते पंडित जी
काश सभी पंडित जी अपनी कथा के माध्यम से समाज को ऐसे ही जागरूक करने लगे तो आंबेडकरवादी एजेंडे की विदाई तय है।
#SuryaWithJharkhandYouth
पीएम @narendramodi को लेकर जिस तरह की छवि एक इकोसिस्टम ने बनाने की कोशिश की है सालों में उससे अलग उनकी सच्चाई क्या है इस वीडियो में सुनिए।
सुनिए प्रियंका चतुर्वेदी क्या बता रही हैं कि ऐसा क्या हुआ था कि वो भी हैरान रह गई थीं
राहुल गांधी की ऐसी हरकत पर कोई आश्चर्य नहीं क्योंकि वो ये सब करके गालीबाज़ों का नेता बनना चाह रहे..
आश्चर्य ये है कि देश में जनसमर्थन के बावजूद BJP और कब तक राहुल गांधी को ऐसेट की तरह यूज़ करने के लिए ये सब बर्दाश्त करती रहेगी
BJP वोटर्स को भी ये सब कमजोरी की निशानी लगने लगी है।
🔥 भाई ने अभिषेक पांडे की पोल खोल दी!
सरकारी पीआर के सहारे आए, 2-3 रीलें बनाईं और निकल गए। अब “झारखंड दौरे” पर राज्य का ज्ञान बांट रहे हैं।
मंत्री से सवाल तो पूछे, लेकिन JPSC मुद्दे की जानकारी इतनी कम थी कि पलटकर सवाल तक नहीं कर पाए।
खुद को Gen-Z पत्रकार कहने वालों के लिए ये असली आईना है।
मैं झारखंड के छात्रो द्वारा विरोध प्रदर्शन का पूर्ण समर्थन करता हूं, साथ ही सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले एफसीआरए संशोधन विधेयक का भी समर्थन करता हूं, मेरी पिछली पोस्ट पर की गई अभद्रा और अपमानजनक टिप्पणियों को नजरअंदाज करता हूं। अर्थहीन है मेरे लिए
ब्राह्मण के नाम पर, बाँटो और राज करो के अंग्रेजो के अभियान पर सपा।
यही आज की सपा है। इन्हें ब्राह्मण वोट के लिए जनेश्वर मिश्रा याद आते हैं और राज करने के लिए सिर्फ अपना परिवार। ब्राह्मण वोट दे, इन्हें गद्दी दिलाएं और ये उस पर अपने परिवार की खड़ाऊँ रखकर राज करेंगे। अच्छा होता कि जनेश्वरजी की जयंती का सदुपयोग उनके व्यक्तित्व और उनके समाजवादी विचार से अवगत कराने के लिए किया गया होता लेकिन पूज्य जनेश्वरजी के बारे बताने से ज्यादा मुझे कोसा गया और दुनिया को ज्ञान का प्रकाश देने वाले ब्राह्मणों को याचकों की भांति अपमानित किया गया। यह सब नाटक देखकर पूज्य जनेश्वरजी की समाजवादी आत्मा यकीनन दुःखी होगी और सोच रही होगी कि यह सब करने के लिए मेरी ही जयंती मिली थी। चंद टिकटार्थियों के कारण आज पूरा ब्राह्मण समाज को अपमानित करना उचित नहीं। मुझे चाहे जितनी गालियां दीजिए पर ब्राह्मण समाज की गरिमा न गिराइए।
ये एक ऐसी सपा है जो रामायण मेला के संकल्पक क्रांतिधर्मी चिंतक राममनोहर लोहिया और छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र के दिखाए समाजवाद के पथ, आदर्श और संस्कारों से पूर्णतया भटक चुकी है। लोहियाजी संसद और विधान सभाओं को सार्थक परिणामों वाली बहस का मंच बनाना चाहते थे, पूज्य अटलजी उनका पूरा सहयोग करते थे। यायावरी प्रकृति के होने के बावजूद लोहिया संसद सत्र के दौरान पूरा समय बहस व संसदीय संवादों को देते थे। छोटे लोहिया जनेश्वरजी ने इस परम्परा को बढ़ाया, उन्होंने हमेशा समकालीन आंदोलनों की अगुवाई की लेकिन संसद सत्र के दौरान चर्चाओं को प्राथमिकता देते थे। सत्र बाधित नहीं करते थे। आज के सपाई दिल्ली और लखनऊ में जनता के सवालों को सत्र में उठने तक नहीं देना चाहते। इतना हो हल्ला मचाते हैं, कुतर्क करते हैं कि सदन चलाना मुश्किल हो जाए। विपक्ष के लोग संविधान की पुस्तक हाथ में लेकर फोटो खिंचाने में जितना आगे रहते हैं, उससे भी ज्यादा सांविधानिक पीठ और परंपराओं का मज़ाक उड़ाने में आगे रहते हैं। मेरी सपा के साथियों को सलाह है कि लोहियाजी और छोटे लोहिया के बारे कभीकभार पढ़ लिया करें। जनेश्वरजी की जयंती पर जो नाटकबाजी हुई, उसे देखकर पूज्य जनेश्वरजी की आत्मा यकीनन दुःखी होगी। अटलजी कहते थे महापुरुषों की सच्ची श्रद्धांजलि उनके द्वारा स्थापित परम्पराओं को आगे बढ़ाना है। नई सपा में समाजवाद, सामाजिक न्याय और समरसता बाईस्कोप से खोजने पर भी नहीं मिलता। संसद और उत्तर प्रदेश विधान सभा मानसून सत्र संचालन के दौरान किए गए अनावश्यक सिद्धांतहीन अराजक हो-हल्ला दर्शाती है कि सपा पूरी तरह से समाजवाद की संवाद करने के संस्कार को छोड़, अपने आपको एक हुडदंगी गिरोह में बदल चुकी है। ब्राह्मण इनके लिए वोट बैंक की लार सरीखा है। ये बस चुनाव तक उसकी खातिर जमकर लार टपकाएँगे और उसके बाद पूछेंगे कि कौन ब्राह्मण? किसका ब्राह्मण? कहाँ का ब्राह्मण?
जातिगत भेदभाव बढ़ने का कारण है आरक्षण इस दलित लड़के को ही देख लो मीडिया को बता रहा है कि ये तो अपना इलाज उससे करवाएगा जिसके नाम मे गुप्ता शुक्ला सिंह लगा होगा ये बोल रहा है कि ये अपनी ही जाति के आरक्षण वाले डॉक्टर से इलाज नही कराएगा
रिजर्वेशन पर चर्चा किए बिना जेन्यून रिफॉर्म्स की बात नहीं हो सकती। अगर लक्ष्य सामाजिक न्याय और समान अवसर है, तो हमें यह भी पूछना चाहिए कि SC/ST छात्रों को शुरुआत से ही बेहतर शिक्षा, संसाधन और अवसर क्यों नहीं मिलते। केवल अंतिम चरण में आरक्षण देना ही पर्याप्त समाधान नहीं माना जा सकता।
सरकार को उनकी शुरुआती शिक्षा में निवेश करना चाहिए, ताकि हर छात्र को शुरुआत से ही समान अवसर मिलें और वह अपनी क्षमता के आधार पर आगे बढ़ सके।
सजग होकर सुनोगे तो समझ पाना सरल होगा,
तुम्हारी आँख नम होगी, तुम्हारा मन तरल होगा।
why indian health,education and science sectors need reforms bcz they all linked to education and deserving students #neet#reservation
सरकार ने उन लोगों की बातें सुन लीं जो सड़कों पर थे, लेकिन genuine neet छात्रों की मांगें अब भी अधूरी हैं।
- प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की 50% सीटें सरकारी फीस पर उपलब्ध कराने पर कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं।
- मेडिकल कॉलेजों में मॉर्निंग और इवनिंग शिफ्ट शुरू कर सीटें बढ़ाने पर कोई ठोस योजना नहीं।
- रिजर्वेशन से जुड़े मुद्दों पर भी कोई चर्चा नहीं।
सवाल यह है—नीट देने वाले लाखों छात्रों को न्याय कब मिलेगा? उनकी आवाज़ आखिर कौन सुनेगा?
#NEET #NEETUG #MedicalEducation #StudentsVoice
जिसके पास मर्सिडीज़ है बस उसके नाम के आगे दलित लग गया तो वो गरीब है
मेरे पिता किसान है - बस मै सवर्ण समाज से हु इसलिए मैं अमीर हु
आरक्षण के खिलाफ मोर्चा खुल चुका है - हर्ष दुबे के द्वारा अब देखते हैं सवर्ण समाज कितनी अपने बच्चों की चिंता करता है
40% हमारी आबादी देश के सबसे बड़े टैक्स पेयर्स हमारे लोग और हम ही गुलाम हैं
गुलाम ही हैं - 50% सीटो पर हम बैठ ही नहीं सकते हमे अधिकार ही नहीं है ये गुलामी नहीं तो क्या है ?
#EndReservation
"ये लोग कहते हैं कि नीट पर 18 घंटे चर्चा करेंगे, लेकिन क्या ये नीट की असली समस्याओं पर 18 मिनट भी बोल पाएंगे?"
"चर्चा किनसे करेंगे जो चांदी की चम्मच लेकर पैदा हुए हैं? उन्हें मेरी समस्या पता है क्या? उन्हें पता है कि एक नीट छात्र और उसका परिवार किन मुश्किलों से गुजरता है?"#neet
कल शाम राजीव चौक स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर में शाम की आरती के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे।
हाँ, यह वही मंदिर है जिसे कुछ अंबेडकरवादी और अब्दुलो के समूहों के प्रोपेगैंडा का निशाना बनाया जा रहा था, कि प्रदर्शनकारियों को मंदिर ने शरण नहीं दी.
लड़कियों के झूठे प्रचार के बाद मंदिर को क्षतिग्रस्त करने का प्रयास भी किया गया था.
सनातनियों की शक्ति 💪😀