चांडिल– टाटा रेल सेक्शन की स्थिति अब अस्वीकार्य हो चुकी है।
पिछले 2 वर्षों से यात्री ट्रेनें लगातार घंटों लेट चल रही हैं, जबकि उसी ट्रैक पर मालगाड़ियों की निर्बाध आवाजाही जारी है। इसका सीधा असर सभी रेल यात्रियों और खास कर के झारखंड के हजारों दैनिक यात्रियों, श्रमिकों, छात्रों और नौकरीपेशा लोगों पर पड़ रहा है।
यह केवल परिचालन का मुद्दा नहीं, बल्कि प्राथमिकता तय करने का प्रश्न है।
क्या रेलवे के हिसाब से झारखंड के लोगों का समय भी उतना ही मूल्यवान है जितना देश की अर्थव्यवस्था के लिए माल परिवहन।
मैं रेल मंत्री श्री .@AshwiniVaishnaw जी से आग्रह करता हूँ कि:
- चांडिल–टाटा सेक्शन में यात्री ट्रेनों को प्राथमिकता दी जाए
- लंबित रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए
- ट्रेन लेट होने की समस्या का तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाए
देश के सभी रेल यात्री एवं झारखंड के नागरिकों की सुविधा एवं गरिमा से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।
तस्वीर में दिख रहे ये दो चेहरे सिर्फ मुस्कान नहीं हैं… ये संघर्ष, त्याग और एक अधूरे बचपन से पूरे हुए सपनों की कहानी हैं। ये हैं खूंटी जिला के तुसुंगा कोचांग के हरी सोय और उनकी बेटी दीप्ति सोय। आज दीप्ति को लेडी सुपरवाइजर पद का नियुक्ति पत्र मिला है। झारखंड मंत्रालय से CDPO और लेडी सुपरवाइजर नियुक्ति पत्र कार्यक्रम कवर करके लौट रहा था, तभी बस स्टॉप पर इन दोनों के खिलखिलाते चेहरे पर नजर पड़ी। बात करने का मन हुआ…और फिर जो कहानी सामने आई, उसने दिल छू लिया। हरी सोय खुद रांची के एक अनाथालय में पले-बढ़े। जीवन ने उन्हें आसान रास्ते नहीं दिए, न किसी का कंधा मिला, न कोई राह दिखाने वाला… लेकिन उन्होंने ठान लिया था कि उनकी अगली पीढ़ी वो सब पाएगी, जो उनसे छिन गया। उसी संघर्ष की छांव में पली दीप्ति… जिसने अपने पिता के अधूरे सपनों को अपना लक्ष्य बना लिया। कठिन हालात, सीमित साधन… लेकिन हौसले कभी छोटे नहीं हुए।
खूंटी… जो कभी नक्सल प्रभावित इलाका माना जाता था, और कोचांग जैसे इलाके तो और भी चुनौतीपूर्ण रहे हैं। उसी मिट्टी से निकलकर दीप्ति पहले नवोदय विद्यालय तक पहुंची, फिर अपने लक्ष्य को तय किया और आज लगातार सफलता की नई इबारत लिख रही है। एक साथ दो परीक्षाओं में सफलता, पहले CISF में कांस्टेबल बनीं और अब लेडी सुपरवाइजर के पद तक पहुंचीं। आज दीप्ति को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नियुक्ति पत्र सौंपा तो पिता हरी बोले- मेरे गांव में सरकारी नौकरी पाने वाली पहली आदिवासी बेटी बन गई मेरी दीप्ति। वो कहते हैं कि ये आईएएस भी बनेगी और मेरे मूंछ उस दिन और कड़क होंगे।
ये कहानी सिर्फ एक सफलता की नहीं है…
ये कहानी है उस पिता की, जिसने कभी हार मानना नहीं सीखा…
और उस बेटी की, जिसने हर मुश्किल को सीढ़ी बना दिया।
सच कहें तो… कुछ कहानियां सुनी नहीं जातीं, महसूस की जाती हैं। और ये उन्हीं में से एक है।
Kangladeshis trying to stop a train running without an engine using rocks, wood, and bricks 💀
And then you have Dhruv Rathee comparing this nation with India… I genuinely feel bad for his fans 😭
People in Superpower Bangladesh climbed on roofshed at Mymensingh Railway Station to urinate.
People standing the below the roofshed thought it was raining.
It is just another normal day in Superpower Bangladesh.
₹19,000 crore.
That is what Banks collected in last 3 years just for not maintaining ‘Minimum Account Balance.’
Not from the rich. Not from big borrowers.
From the poorest accounts in the system.
Their crime? They didn’t have enough money.
A farmer misses the minimum balance - Penalty.
A pensioner withdraws money for medicine - Penalty.
A daily wage worker falls short by a few hundred rupees - Penalty.
The poor keep money in banks for safety. Not to be quietly fined for being poor.
Financial inclusion should protect small savings, not punish small balances.
In Parliament today I proposed ending minimum balance penalties so the banking system stops charging people for their poverty.
हर्ष सिंह ने गंदी गाली देकर North East की पढ़ने वाली लड़कियों को कहा -
“तुम्हारा नंगा नाच करवाऊँगा”
इस आरोपी को दिल्ली पुलिस नहीं ढूँढ पाई। मगर इनकी सफ़ाई ANI पर आ चुकी है । मतलब ANI को पता है मगर पुलिस को नहीं मिल रहे आरोपी ।
मंत्री, CM सब ट्वीट कर रहे हैं मगर गिरफ्तारी नहीं हो पा रही ।