मोदी तुम हमे दिल्ली नहीं आने दोगों तो हम तुम्हे यूपी प्रचार करने नहीं आने देंगे। याद रखना।
हर रैली में विरोध करेंगे ...गांव - गांव जाकर। घर - घर जाकर।
ज्यादा दिन अब चुनाव नहीं है , याद रखना। तुम अब क्रूरता कर रहे हो।
हमें अपनी बात रखने दो वरना हम वो करेंगे जो हमे ठीक लगेगा।
फालतू विषयों पर इनसे ज़्यादा कोई नहीं बोलता लेकिन यूजीसी रोलबैक प्रोटेस्ट पर एक शब्द नहीं बोल पा रहे है,
आप लोग इन्हें ब्राह्मण के नाम पर समर्थन देना बंद करो !
सामान्य वर्ग किडनी थोड़े मांग रहा है बे.....
समानता, न्याय, संविधानसम्मत व्यवस्था..........
क्या ये मांग नाजायज हैं ???
1950 में भारत की महान संविधान सभा ने जिस संविधान को स्वीकृति दी, उसको उसके मूल रूप में लागू किया जाए...
नागरिकों के मौलिक अधिकार "समानता" को सम्मान के साथ बहाल करने के लिए जितने संशोधन किए हैं सरकारों ने उसको निरस्त किया जाए....
इसमें नाजायज क्या हैं ???
क्या राष्ट्रीय एकता की भावना को आरक्षण रूपी कोढ़, SC-ST एक्ट रूपी ak47 ने, यूजीसी प्रावधान ने खंड खंड नहीं किया हैं ???
मत भूलिए........
देश के नायकों ने ये संविधान, लोकतंत्र, लोकतांत्रिक सरकार, सुप्रीम कोर्ट etc इस देश मे समानता, न्याय, संविधानसम्मत व्यवस्था को मजबूत बनाकर एक गौरवशाली भारत निर्माण के पथ पर चलने के लिए दिया था।
न कि हर रोज राजनीतिक दलों को संविधान में संशोधन करके निजी राजनीतिक लाभ के लिए राष्ट्रीय एकता को खंड खंड करने के लिए...
सामान्य वर्ग अगर ईमानदारी से "प्राकृतिक न्याय" के लिए लड़ाई लड़ना चाहता है तो इसकी कुछ शर्ते हैं.
सामान्य वर्ग को भूलना होगा कि भारत मे सामान्य वर्ग का कौन सा राजनीतिक दल साथ दे रहा है, कौन सा नहीं, कौन सत्ता में हैं, कौन सत्ता में आएगा ???
सामान्य वर्ग को प्रण लेना होगा कि आने वाले हर चुनाव ओ अपना वोट "कुत्ते" को दे देगा, लेकिन सामान्य वर्ग के अधिकारों का हनन करने वाले राजनीतिक दलों को नहीं..
सामान्य वर्ग के हर व्यक्ति को इस मुहिम को खुद नेतृत्व करके आगे बढ़ाना होगा, इसको जन जन से जोड़ना होगा...
संविधान में संशोधन करके अगर सामान्य वर्ग को प्राकृतिक न्याय ( समानता, न्याय, संविधानसम्मत व्यवस्था) से वंचित किया जा सकता है तो उसी संविधान में संशोधन करके इस प्राकृतिक न्याय को बहाल भी किया जा सकता है...
मै प्रण लेता हु कि सत्ता के दलालों का राजनीतिक बहिष्कार करूंगा, कुत्ते को वोट दूंगा लेकिन इनको नहीं...
मेरा विकल्प "कुत्ता" क्योंकि कुत्ता अपने मालिक के अनिष्ट की अनुभूति होते ही भौंक कर एहसास तो कराएगा..
सामान्य वर्ग के दोस्तों खुद को तैयार करो एक लंबी लड़ाई के लिए, व्यवस्था परिवर्तन के लिए..
जो हमारा नहीं हुआ, उसको तारे दिखाने का समय शुरू हो चुका है...
जाति आधारित आरक्षण को विरुद्ध शान्तिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों को बलपूर्वक जंतर-मंतर से हटाना है और तिलचट्टों की बेहूदगी भी झेलते रहे। यह अच्छी बात नहीं है
प्रिय साथियों...
शिवम् भाई का अभी तक कुछ पता नहीं चला है, आप सबसे एक बार पुनः निवेदन है गुजारिश है प्रार्थना है कि शिवम् सिंह जी का अपने अपने स्तर से पता लगाने में मदद करें।
शिवम् भाई ने समझौता नहीं किया, झुके नहीं इसीलिए उन्हें दिल्ली पुलिस कहां लेकर गई है किसी को कोई जानकारी नहीं है, हम सब लोग परेशान हैं, कल आंदोलन में सबसे ज्यादा अगर किसी को परेशान किया गया तो वो हैं शिवम् सिंह जी, घसीटा गया, मारा गया पीटा है, डिटेन किया गया, दुर्दशा की गई बर्बरता की सारी हदें पार की गई और आज उन्हें जब से सिविल ड्रेस में दिल्ली पुलिस बिना नंबर प्लेट की गाड़ी में लेकर गई है उनका कुछ भी अता पता नहीं है।
बीजेपी सरकार ने शाहीन बाग में 3 महीने तक एंटी-सीएए विरोध के प्रदर्शन की अनुमति दी।
बीजेपी सरकार ने जंतर मंतर में एक महीने के लिए कॉकरोचों को विरोध प्रदर्शन की अनुमति दी।
लेकिन यही बीजेपी सरकार एक भी दिन के लिए यूजीसी नियमों और आरक्षण सुधारों के रोलबैक की मांग करने वालों का विरोध प्रदर्शन को सहन नहीं कर सकती।
सवर्ण विरोधी मानसिकता
अपडेट 🙏
निहायती ग़लत हो रहा है अब हम सबके ऊपर अत्याचार बढ़ रहा है पंकज ध्वरैय्या को पुलिस ने फिर से गिरफ्तार कर लिया है।
यह दिल्ली पुलिस की तानाशाही है, दिल्ली सरकार और भाजपा सरकार और मोदी जी और अमित शाह जी सुन लीजिए हमारे ऊपर जितनी बर्बरता आपको करना हो कर लीजिए लेकिन सनद रहे अब आपकी कुर्सी नहीं बचेगी?
ये बिहार सीवान जिले के संतोष सिंह है। इनका अर्धनग्न अवस्था में वीडियो हाल ही में वायरल हुआ था।
अब बताया जा रहा है कि इन्हें भीमराव अंबेडकर टिप्पणी मामले में SC/ST एक्ट में गिरफ्तारी किया गया है।
यही बिहार पुलिस गोल्डन दास और रुद्र प्रताप कुशवाहा पर कोई एक्शन क्यों नहीं लेती?
बीजेपी के अंधभक्त ब्राह्मण समाज सबसे ज्यादा है।
बीजेपी सरकार में सबसे ज्यादा प्रताडि़त ब्राह्मण समाज ही है.. महिला जो कह रही है उसकी जांच होनी चाहिए...
इस महिला का नाम पिंकी पांडे है यह नालासोपारा की रहने वाली है, इसके साथ कुछ लोगों ने छेड़छाड़ की ओर इसके साथ मारपीट किया गया।
जब पिंकी पांडे न्याय मांगने के लिए थाने पहुंची तो पहले NCR दर्ज किए, उसके बाद महिला आयोग के हस्तक्षेप के बाद FIR दर्ज हुई।
पिंकी का आरोप है कि – FIR के बाद थाने के दारोगा जी ने केस वापस लेने को कहा जब में मना की तो सभी पुलिसकर्मियों ने थाने के अंदर ही मुझे बहुत बेरहमी से मारपीट की गई। कमर और चेहरे पर डंडे से मारा गया।
महिला रोते हुए बोली कि मुझे चलने में भी परेशानी हो रही है। मैने जब वीडियो बनाने की कोशिश की तो मोबाइल छीन लिया गया।
दो छोटे बच्चों की मां अब खुद अस्पताल में इलाज करा रही हैं और इंसाफ की मांग कर रही हैं।
#brahman #UGC