अफसरों ने अपने फोन पब्लिक रिलेशन ऑफिसर (PRO) या स्टेनो को दे रखे हैं। यही लोग तय करते हैं कि आपकी बात अफसर से होगी या नहीं। नियम है कि DM-SSP सरकारी नंबर अनिवार्य रूप से अपने पास रखेंगे। लोगों की कॉल खुद उठाएंगे।
लोगों की समस्याओं का तेजी से समाधान हो, इसके लिए सरकार इन नंबरों पर करोड़ों रुपए खर्च करती है। सिर्फ पुलिस विभाग के सरकारी नंबरों के रिचार्ज पर सालभर में 9 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। लेकिन, अधिकारी हैं कि लोगों की समस्याएं फोन पर सुनना ही नहीं चाहते।
इसकी शिकायत समय-समय पर सांसद-विधायक मुख्यमंत्री से करते रहे हैं। तो क्या वाकई में अफसर सरकारी नंबर नहीं उठाते? इसकी पड़ताल करने के लिए दैनिक भास्कर ने 75 जिलों के जिलाधिकारी और पुलिस कप्तानों को फोन किया। एक बार नहीं बल्कि तीन बार किया गया।
सिर्फ तीन DM ने खुद फोन उठाया। SSP की स्थिति तो और खराब, किसी ने फोन ही नहीं उठाया। पूरी रिपोर्ट: https://t.co/N03UGyrxGV
जिस वैकेंसी में एक से अधिक विभाग हो उस वैकेंसी के लिए डिपार्टमेन्ट स्किप का आप्शन होना चाहिए , यह इसलिए जरूरी है कि कुछ छात्र पहले से ही दूसरे विभाग में चयनित होते हैं और वो बेहतर विभाग के लिए दूसरी वैंकेसी में भी भाग लेते हैं ऐसे में अगर डिपार्टमेन्ट स्किप का आप्शन अगर नहीं होगा तो पहले से चयनित छात्र हर विभाग के लिए DV करायेगा और बाद में अगर उसे अच्छा विभाग नहीं मिला तो पुनः उसका चयन दूसरे विभाग में हो जायेगा और वह उस विभाग को ज्वाइन नहीं करेगा जिस कारण उस वैंकेसी की एक सीट खराब हो जायेगी ।
अतः Department skip का आप्शन होना चाहिए
#UPSSSC_JE_ALLOW_DEPARTMENT_SKIP
गुंडागर्दी किसे कहते हैं, वह इस वीडियो में देख लीजिए।
गाजियाबाद में दो लड़के जंतर-मंतर जा रहे थे। हिन्दुवादी नेता सत्यम पंडित उन्हें पीटता है, गाली देता है। माफी मंगवाता है।
ये तो खुलेआम कानून व्यवस्था को चुनौती है।
सोचो इनको आधे घंटे में ही दिक्कत हो गई,
जो युवा अपनी भविष्य के लिए महीनों से लड़ रहे हैं,
उनका क्या होगा,
वो तो सिर्फ अपना हक मांग रहे है।
इस पर क्यों नहीं लिखते सांसद महोदय??
हर आंदोलन गलत है।
लोग गलत हैं।
आवाज़ उठाना गलत है।
सवाल पूछना गलत है।
विरोध करना गलत है।
जवाब मांगना गलत है।
पारदर्शिता मांगना गलत है।
व्यवस्था पर प्रश्न उठाना गलत है।
अधिकार मांगना गलत है।
न्याय की उम्मीद करना गलत है।
फिर मैं पूछता हूँ -
क्या पेपर लीक सही है?
क्या मिलावटी पेट्रोल सही है?
क्या मंदिरों से चंदा चोरी सही है?
क्या भर्ती परीक्षाओं में वर्षों की देरी सही है?
क्या बेरोज़गारी सही है?
क्या महंगाई सही है?
क्या अस्पतालों में भ्रष्टाचार सही है?
क्या शिक्षा में घोटाले सही हैं?
क्या नकली दवाइयाँ सही हैं?
क्या पुलों का गिरना सही है?
क्या सड़कों पर गड्ढे और हादसे सही हैं?
क्या टैक्स देने के बाद भी बदहाल सुविधाएँ सही हैं?
क्या बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ सही है?
क्या युवाओं के सपनों का टूटना सही है?
आवाज़ उठेगी तभी तो कुछ बदलेगा अगर हर protest को हम ऐसे ही उसकी कमिया बताकर कमजोर करेंगे तो एक दिन आवाज़ उठाने वाले भी नहीं बचेंगे तब कौन आएगा आगे जब तुम पर ही बीतेगी |
मानवता जिन्दा रखो ||
एक और पेपर लीक।
एक और परीक्षा रद्द।
इस बार महाराष्ट्र का TET।
देश की शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को वसूली का सिस्टम बना दिया गया है, जिससे देश का हर युवा असुरक्षित है।
यह सिर्फ पेपर लीक नहीं,
यह युवाओं के भविष्य की चोरी है।
ये तीनों विधायक Akhilesh Yadav पर राम मंदिर के विरोध का आरोप लगाकर पार्टी के बगावत किए थे।
इन्होंने कहा था कि श्री Akhilesh Yadav जी ने हमें राम मंदिर के दर्शन करने से मना किया इसलिए हम सनातन के सम्मान में सपा छोड़ रहे है।
आपको मालूम है इन तीनों गद्दारों ने राज्यसभा चुनाव में BJP को वोट दिया था और उसके बाद अखिलेश यादव जी पर रामद्रोही का आरोप लगाकर बीजेपी में शामिल हो गए थे।
अब जब राम मंदिर में 1000+ करोड़ का दान चोरी हुआ है तो इन गद्दारों की अंतरआत्मा भगवान राम के लिए नहीं जाग रही है।
ये तीनों गद्दार राम मंदिर के दान चोरी पर एक शब्द नहीं बोल रहे है।
अब इनके सनातन धर्म का अपमान नहीं हो रहा है,अब भगवान राम का अपमान नहीं हो रहा है।
बाबा योगी आदित्यनाथ जी जो आतंक मचाए हैं ,
लोगों की आवाज दबाने का,गला दबाने का..
जिस मुकदमे में वह मुझे लखनऊ जेल भेजे थे उसी मुकदमे में जब वह सांसद थे तो लोकसभा में रो रहे थे।
ये बाते 14 दिन बाद जेल से छूटने वाले Asutosh Pandey ने कही है।
आशुतोष पांडेय को 31 मई को प्रयागराज में छात्रों के आन्दोलन का नेतृत्व करने के बाद गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया था।
ट्रंप ने एक बार फिर भारत के लिए मुंह खोला, और बेहद अपमानजनक लहजे में बातें कहीं-
“कई वर्षों तक भारत ने अमेरिका का फायदा उठाया। भारत हमसे भारी टैरिफ वसूलता था और बदले में कुछ नहीं देता था। लेकिन अब स्थिति बिल्कुल उलट है और अमेरिका भारत से काफी पैसा कमा रहा है।”
ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत के साथ एक समझौता हो जाएगा, क्योंकि “मुझे आपके प्रधानमंत्री बहुत पसंद हैं। वह मेरे अच्छे दोस्त हैं और हमारे संबंध अच्छे हैं।”
जिस टोन और जिस बेशर्मी से ट्रंप ने ये बातें कही हैं, उसके सामने भारत की चुप्पी का आखिर फायदा क्या है?
अकेले ट्रंप की वजह से दुनिया और भारत के सामने आर्थिक मुश्किलें खड़ी हो रही हैं।
ईरान युद्ध के चलते हॉर्मूज स्ट्रेट बंद हुआ, भारत का energy और fertilizer supply chain एकदम तितर-बितर हो गया, जिसका नतीजा हम भुगत रहे हैं।
उसके बाद अमेरिका का दबाव- कच्चे तेल की खरीद को लेकर।
फिर ट्रंप द्वारा टैरिफ का इस्तेमाल करके भारत को अमेरिका से आयात बढ़ाने के लिए मजबूर करना।
यह सब भारत को एक तरह से खाई में धकेलने जैसा है।
जिस आशुतोष पांडेय को प्रयागराज पुलिस ने उठाया है, उसकी कल TGT की परीक्षा है,
कौन देगा उसकी परीक्षा?
अपने शब्दों के चंदन से योगी आदित्यनाथ का प्रधानमंत्री पद पर राजतिलक करने वाले कुमार विश्वास देंगे?
या फिर सत्ता की गुदगुदी की खातिर भांति भांति के स्वांग रचने वाली विदूषक परंपरा के निर्विवाद चक्रवर्ती सम्राट बन चुके रविकिशन देंगे?
आखिर क्या गुनाह है आशुतोष पांडेय का?
पेपर लीक, धांधली और परीक्षा की संदिग्ध प्रणाली के खिलाफ छात्रों के लोकतांत्रिक विरोध की अगुवाई करना?
सांसद संजय सिंह के पास छात्रों के दर्द का चिट्ठा ले जाने की कोशिश करना?
एक योग्य अभ्यर्थी को उसकी परीक्षा से रोकने के इस महापाप का भागीदार कौन होगा?
कोई एक या फिर एक पूरी की पूरी व्यवस्था,
जिसकी खातिर रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि अपने 'रत्नाकर काल' में ही संदेश दे गए थे,
कि पाप के भागीदार वे सभी होते हैं जो उस व्यवस्था का हिस्सा या उससे लाभान्वित होते हैं।
कोई ये कहकर नहीं बच सकता कि हम तो मजबूर थे, हमें ऊपर से कहा गया था!!
प्रारब्ध और नियति के रजिस्टर में 2 और 2 सिर्फ 4 होता है,
न 5 की गुंजाइश होती है और न ही 3 की।
@PMOIndia@CMOfficeUP@HMOIndia@dgpup
Hates off' @SanjayAzadSln सर ।
जिस मजबूती से प्रतियोगी छात्रों की आवाज आप बने है उसके लिए बहुत बहुत आभार 🙏
लोकतंत्र के विपक्ष की भूमिका का निर्वहन आप ही कर रहे है ।