बाक़ी BJP वाले लंपट तमाशा करते
लेकिन जो बिहार बाढ़ में डूबा है, जान माल का भारी नुक़सान हुआ है, लोग परेशान हैं
वहाँ का मुख्यमंत्री मोदी की बर्थडे का जश्न मनाये - तो उसे क्या कहिएगा?
इतनी बेहयाई और थेथरई आती कहाँ से है?
अगर सो कर जाग गए हैं तो इन्हें राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस की बधाई दे और बधाई के पात्र बने!
ये वही शख्स है जिनके राज में लाखों कंपनियां बंद होकर करोड़ो लोग बेरोजगार हो गए या न्युनतम मजदूरी पर काम कर रहे हैं।
#राष्ट्रीय_बेरोजगार_दिवस
इतनी महंगाई के लिए भी एक दिया जलाइए… 🪔
आज एक तरफ़ साहब का जन्मदिन मनाया जा रहा है, दीये जलाए जा रहे हैं, जश्न की तस्वीरें दिखाई जा रही हैं…
और दूसरी तरफ़ जिस घर में रसोई का तेल खरीदना मुश्किल हो गया है, वहाँ चूल्हा कैसे जलेगा?
जिस परिवार की कमाई का बड़ा हिस्सा राशन, दवा, बच्चों की फीस, गैस और रोज़मर्रा की जरूरतों में चला जाता है, उसकी परेशानी कौन दिखाएगा?
और बिहार को देखिए…
एक तरफ़ पानी में डूबे घर, बर्बाद फसलें और राहत का इंतज़ार करते 50 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं।
दूसरी तरफ़ उसी बिहार में जन्मदिन के अवसर पर ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाने के कार्यक्रम हो रहे हैं।
सवाल जन्मदिन मनाने का नहीं है।
सवाल प्राथमिकताओं का है।
जब जनता महंगाई से परेशान हो,
जब बाढ़ में घर डूब रहे हों,
जब परिवार राशन और दवाइयों के लिए संघर्ष कर रहे हों-
तब मीडिया का कैमरा सिर्फ़ जश्न पर क्यों रहे?
एक दिया साहब के जन्मदिन के लिए सही…
लेकिन उस परिवार के चूल्हे के लिए ? जिसमें आज खाना बनाने के लिए तेल तक नहीं है।
जश्न मनाइए, शुभकामनाएँ दीजिए-
लेकिन जनता की तकलीफ़ को जश्न की रोशनी में छिपाइए मत।
ये विशुद्ध अश्लीलता है!
बिहार बाढ़ से पीड़ित है, कई जाने चली गई है मगर एक आत्ममुग्ध बूढ़े के जन्मदिन पर करोड़ों के दिये बहा दिये गए!
मोदी जी शर्म भी नहीं आती?
UPI पर चार्ज
बैंक में पैसा रखने पर चार्ज
ATM से पैसा निकालने पर चार्ज
ATM कार्ड रखने पर चार्ज
बैंक से SMS Alert पर चार्ज
Minimum Balance रखने पर charge
कोई भी वस्तु खरीदने पर Direct और Indirect Tax
कमाई पर Tax, GST अलग से
Toll Tax अलग से, Road Tax अलग से
Education Cess, Environment Cess, Health Cess, Agriculture Infrastructure and Development Cess, Road and Infrastructure Cess
इस सरकार में पानी, हवा पर, शिक्षा-स्वास्थ्य-कृषि- हर चीज़ पर टैक्स लगा दिया है।
यही है इनका Digital India, यही है इनकी Cashless Economy। मोदी जी इसी Digital India का ढोल पीट रहे थे।
मोदी जी क्या बोलते थे कि नोटबंदी से भ्रष्टाचार, कालाधन और आतंकवाद खत्म हो जाएगा, अब तो भ्रष्टाचार ओर अधिक बढ़ा है। नोटबंदी का मोदी जी कोई एक फायदा गिना दें। मोदी जी वहीं करते है जो अमेरिका और उनके पूंजीपति मित्र आदेश देते है। मोदी की कथनी और करनी में भारी फ़र्क़ है। #TejashwiYadav #RJD #Bihar
प्रधानमंत्री जी,
आप फ्रंट कैमरा पर फ़र्ज़ी GDP ग्रोथ का महिमामंडन करते रहिए
लेकिन उसी ग्रोथ की झूठी चकाचौंध में
यहाँ एक माँ को अपनी बच्ची की फ़ीस के ₹3000 के लिए नंगे पैर दौड़ना पड़ रहा है
यह एक माँ के शौर्य से ज़्यादा उसकी मजबूरी बयाँ करती है
यह है GDP की असलियत
GDP के 'फर्जी आंकड़ों' पर ढोल पीटने वाले नरेंद्र मोदी को ये वीडियो देखना चाहिए 👇
महाराष्ट्र में एक मां को अपनी बच्ची की फीस के लिए नंगे पैर मैराथन दौड़ना पड़ा।
'फर्जी आंकड़ों' के बीच देश की जनता के ये असली हालात हैं, जिनपर नरेंद्र मोदी पर्दा डाल रहे हैं।
"मिश्रा" थे इसीलिए बन गए,
अगर यही नाम के पीछे मौर्य, पटेल, यादव, निषाद, चन्द्रवंशी, पाल, चौधरी लगा होता तो कभी नहीं चुने जाते।
इस देश में आपका नाम क्या है वो महत्वपूर्ण नहीं है उससे अधिक महत्वपूर्ण है आपके नाम के पीछे लिखी आपकी जाति क्या है।
ख़ैर हम लोगों को यही उम्मीद भी थी।
जनसमस्या उठाने पर बिहार पुलिस अब पत्रकारों पर फर्जी केस ही नहीं बल्कि जानलेवा हमला भी कर रही है।
बिहार में आपराधिक प्रवृत्ति के मुख्यमंत्री का मनोनयन होने से अब पुलिस का चरित्र भी आपराधिक हो गया है। हालिया दिनों में जब मर्जी जहां मर्जी पुलिस अधिकारी आम नागरिकों की हत्या कर दे रहे है। सरकार विरोधी खबर चलाने पर स्थानीय मंत्री के इशारे पर वैशाली पुलिस ने स्थानीय पत्रकार को फंसाने के लिए उसे फर्जी जुर्म स्वीकार करने के तीन विकल्प दिए:-
1. स्थानीय हत्या में फर्जी कबूलनामा
2. लड़का-लड़की प्रकरण में साजिशकर्ता बनना स्वीकारना
3. देसी कट्टा रखने की स्वीकारोक्ति ताकि ऑर्म्स एक्ट में फंसाया जा सके
पत्रकार द्वारा कृत्रिम अपराध नहीं स्वीकारने पर उसे बर्बर तरीके से पीटा गया। पत्रकार अगर ऐसी घटनाओं पर चुप रहेंगे तो ये सत्ताधारी तानाशाह किसी को नहीं बख्शेंगे।
‘गाँव’ गोद लेने की बात करनेवालों के बुरे दिन आ गये हैं, वो अब अपने ही ख़िलाफ़ हो रहे प्रोटेस्ट के ‘आंदोलनकारियों’ को गोद लेने पर मजबूर हैं।
मुख्यमंत्री जी के सूचनार्थ-ज्ञानार्थ : P से Protest भी होता है।
सावित्रीबाई फुले पर गोबर फेंकने वालों की नस्लें अभी जिंदा है। नेहा पर आज फेंकी गई स्याही उनका अपमान नहीं बल्कि संघर्ष का सम्मान है।
स्याही फेंकने वाले भूल जाते हैं कि क्रांतिकारी उसी स्याही से इतिहास लिखते हैं। स्याही चेहरे पर फेंकी जा सकती है लेकिन हिम्मत और विचारों पर नहीं।
जैसा गृहमंत्री! वैसा उसका संतरी!
बख्तियारपुर फोर लेन पर चाय वाले ने सम्राट चौधरी की @bihar_police के कर्मी से चाय के कुल बिल ₹100 का भुगतान करने को कहा तो यह व्यवहार हुआ!
"मा&₹¢$ चिन्हता है रे? हमसे पैसा मांगेगा?
हमसे कोई पैसा नहीं मांगता!"
चाय वाले ने कहा कि ₹100 नहीं तो कम से कम ₹40 ही दे दीजिए!
पर जिनको मुफ्त का खाने का आदत पड़ गई हो, जिनका मंत्री ही अपराधी हो, वह लोग पैसा क्यों देने लगे?
अगर सम्राट चौधरी में कुछ भी शर्म हो और जरा सी भी हिम्मत हो तो इस पुलिस कर्मी को "उनके AI कैमरे" से पकड़ कर, 10 दिन बाद ही सही, कार्रवाई करके दिखाएं!
नहीं तो बिहार की जनता भी समझ लेगी:
"जैसा संतरी, वैसा मंत्री"!!
@yadavtejashwi #RJD #Bihar
#Crime
भगवान को नचाने का अहंकार रखनेवालों को भगवान ने ही नचा दिया। अपने को भगवान से ऊपर समझनेवालों को भगवान ने चलती गाड़ी से नीचे उतार दिया है और साथ ही उनके घमंड का बुख़ार भी।
ये युवाओं की एकता और उनके अभिभावकों के आक्रोश का संयुक्त परिणाम है क्योंकि:
- ‘वोट चोरी’
- ‘पेपर चोरी’
- ‘चढ़ावा-चंदा-दान चोरी’
- ’नौकरी चोरी’
- ’आरक्षण चोरी’
- ‘कमीशनख़ोरी’
- ’पीडीए पर अत्याचार’
- ’घोर भ्रष्टाचार’
- ‘महंगाई की मार’
- ’मिलावट के सरकारीकरण’
- ‘माताओं-बेटियों तक का अपमान’
- ’देश के जेन ज़ी पर हर तरह से प्रहार’
भाजपा ने इन सभी तरीक़ों से जनता के विश्वास और आस्था तक को ठगा है।
अब तो भाजपावाले भी अपने ही ‘किसी’ का इस्तीफ़ा माँगेंगे क्योंकि जो अपनी ही विधानसभा हार गये उनके भरोसे नाव कैसे पार होगी। दरअसल ये हार उनकी है जिन्होंने उनको चुना था या कहें संगठन पर अपनी मर्ज़ी की तरह थोपा था। अब तो कोई ये भी नहीं कह सकता है कि ‘भाजपा में इस्तीफ़े नहीं होते हैं।’
सबसे ज़्यादा खुश तो उप्र में ‘वो’ हैं, जिनको ‘पीडीए’ समाज का होने की वजह से राष्ट्रीय स्तर का पद न देकर जानबूझकर राज्य स्तर का पद दिया गया था। आज तो वो भी मुस्कुराकर पूछ रहे हैं : ‘5 बड़ा या 7’। वैसे जनता ये भी कह रही है कि जब राष्ट्रीय अध्यक्ष विधानसभा नहीं जिता पाये तो राज्य-अध्यक्ष तो विधानसभा लड़वा भी नहीं पाएंगे।
ये डबल इंजन की डबल हार है।
भाजपा की हार मतलब बदलाव की शुरुआत! भाजपा की सबसे सुरक्षित और परंपरागत सीटें भी अब उनकी हार नहीं बचा पाएंगी। अब भाजपा का संकट हार से बढ़कर इस बात का होगा कि उनका टिकट लेनेवाला ‘ड्रोन और दूरबीन’ से भी ढूंढे नहीं मिलेगा।
सभी विजयी उम्मीदवारों को जीत की बधाई और नई उम्मीदों पर खरे उतरने के लिए सजग-सचेत और संविधान के प्रति वचनबद्ध रहने की अपेक्षा।
(कोष्ठक में विशेष : लड्डू तो भाजपा के अंदर भी बँट रहे हैं…)