Patna Shocker: A young girl was R*ped and Thrown on road near Punaichak, around 3 km from the Bihar CM's residence 💥😑
After an alleged sexual assault. She was rushed to hospital, while the incident has sparked outrage and renewed questions about women's safety and policing in the city
#Patna #Bihar
योगी आदित्यनाथ जी! क्या ये आपके राज्य की पुलिस पर संगीन आरोप नहीं लगाए जा रहे हैं? यूपी में भाजपा राज में दलितों, पिछड़ों और कमज़ोरों पर ज़ुल्म की इंतहा होती जा रही है।
राजस्थान के डूंगरगढ़ में सरकारी अध्यापक बच्चों को पिकनिक का बोलकर RSS की शाखा में ले गया तो अभिभावक भड़क गया।
अभिभावक का आरोप है कि सरकारी अध्यापक #RSS की शाखा चलवा रहें है।
क्या सरकार उन्हें इस बात की तनख्वाह दे रही है कि बच्चों को संघ जॉइन करवाये ?
@RahulGandhi@ashokgehlot51
8 जुलाई को बलिया के एक गांव में यूपी पुलिस पहुंची और दलित व्यक्ति कामाशंकर को अपने साथ ले गई.
घर वालों का आरोप है कि पुलिस ने कामाशंकर की पिटाई की, फिर शाम को गांव बाहर छोड़ गई.
कामाशंकर की हालात खराब थी, घरवाले अस्पताल लेकर भागे, वहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.
घर वालों को कहना है कि गांव के प्रधान लल्लू सिंह ने पैसे देकर कामाशंकर की पुलिस से पिटाई करवाई. इस वजह से उसकी मौत हो गई.
जब घर वाले BHU से लाश लेकर घर लौट रहे थे, तो पुलिस एंबुलेंस के आगे पीछे लग गई थी.
📍 कोटाबाग, नैनीताल (उत्तराखंड)
अब क्या इस देश में कोई अपने ही बाग़ के सामने खड़ा होकर आम भी नहीं बेच सकता? क्या रोज़ी-रोटी कमाने के लिए भी किसी उग्र 'भीड़' से परमिशन लेनी होगी?
कोटाबाग में सड़क किनारे अपने ही बाग़ के गेट पर आम बेच रहे मुस्लिम युवकों को मन्नी बिष्ट और उसके साथियों द्वारा घेरने, उनसे पहचान पत्र मांगने और आपत्ति जताने का आरोप बेहद शर्मनाक है।
यह सिर्फ़ आम बेचने का विवाद नहीं, बल्कि ग़रीब मेहनतकशों को उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर डराने और उनके पेट पर लात मारने की साज़िश है। दस्तावेज़ जाँचने का काम देश के क़ानून और पुलिस का है, सड़क पर दादागीरी करने वाली किसी भीड़ का नहीं।
प्रशासन को इस नफ़रती गुंडागर्दी पर तुरंत सख़्त एक्शन लेना चाहिए। राज क़ानून का होना चाहिए, हुड़दंगियों की 'सड़क छाप अदालत' का नहीं!
मुर्गी मारकर खाओगे तो चिकन पार्टी,
बकरा मारकर खाओगे तो मटन पार्टी,
और अगर युवाओं के सपनों और भविष्य को कुचलोगे,
तो लोग उसे "भारतीय जनता पार्टी" कहेंगे।
15 दिन से सोनम वांगचुक इंतज़ार कर रहे हैं लेकिन सत्ता के दरवाज़े बंद हैं।
क्या अहंकार इतना बड़ा हो गया कि देश के एक वैज्ञानिक और शिक्षाविद से दो मिनट बात करना भी मंज़ूर नहीं।
अंग्रेज़ों पर इतिहास में कई मौकों पर आंदोलनकारियों से बातचीत करने का उल्लेख मिलता है, लेकिन आज सवाल यह है कि लोकतांत्रिक सरकार संवाद से क्यों बच रही है।
जनता ने सरकार चुनी थी, ख़ामोशी नहीं।
2014 — मुझे सिर्फ़ 60 महीने दो, मैं तुम्हारी ज़िंदगी बदल दूँगा
2016 — मुझे सिर्फ़ 50 दिन दो, मैं सब कुछ अच्छे के लिए बदल दूँगा
2023 — मुझे सिर्फ़ 5 साल दो, मैं सारा करप्शन का पैसा निकाल दूँगा
2026 — 2047 का इंतज़ार करो 😭
क्या अब भी आप 2029 तक इस आदमी पर भरोसा करोगे?