यह महिला इस बड़े सांप से इतनी आसानी से खेल रही है जैसे लगता है इनका डेली का उठना बैठना रहता है
इनका कहना यह है कि यह सांप male है इसलिए नहीं काट रहा अगर यह female रहता तो यह कटता जरूर
इनके इस बात से आप सभी लोग कितने सहमत है
यह महिला इस बड़े सांप से इतनी आसानी से खेल रही है जैसे लगता है इनका डेली का उठना बैठना रहता है
इनका कहना यह है कि यह सांप male है इसलिए नहीं काट रहा अगर यह female रहता तो यह कटता जरूर
इनके इस बात से आप सभी लोग कितने सहमत है
आखिर dharmendra pardhan जी को किस खुशी के लिए संसद भवन में माला पहना कर Welcome किया जा रहा है।
अपने पद से इस्तीफा दे दिए इसलिए
आप लोग के पता है तो बता सकते हैं।
यह दृश्य बहुत कम देखने को मिलता है! 🐍
सर्पिणी के नन्हे सपोलों का जन्म देखकर प्रकृति का अद्भुत रूप दिखाई देता है।
हर जीव अपनी संतान और अपने वंश को आगे बढ़ाने का प्रयास करता है।
चाहे इंसान हो या जंगल का जीव,
आपका क्या कहना है? 🫵🏼
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आवाज में बहुत दम होता हैं, कल एक व्यक्ति प्रशिक्षण में दाल के साथ राजमा मिला था तो शिकायत किया,
फिर आज उसको लंच में राजमा की जगह केला का कोकता मिला, इसलिए कहते हैं आवाज में दम होता हैं लोग उसको नेता से भले सम्बोधित किये पर उसने कहा की ये मेरा अधिकार हैं छीन के लें...Open news
आजकल सोशल मीडिया पर एक दिखावे का ट्रेंड चलाया जा रहा है, जिसमें देश की करोड़ों SC/ST आबादी को मिले संवैधानिक आरक्षण पर सवाल उठाए जा रहे हैं। लेकिन ज़मीन पर हकीकत इससे कहीं अलग है।
पिछले कई दशकों में आरक्षण खत्म करने की मांग कई बार उठी, लेकिन भारत का संविधान सामाजिक न्याय और समान अवसर की भावना के साथ खड़ा है। इसलिए केवल नारे लगाने से व्यवस्था नहीं बदलती।
सबसे ज़रूरी सवाल यह है कि जिस सामाजिक भेदभाव और ऐतिहासिक अन्याय की वजह से आरक्षण की व्यवस्था बनाई गई, क्या वह पूरी तरह खत्म हो चुका है?
आज भी देश के अलग-अलग हिस्सों से दलितों और आदिवासियों के साथ भेदभाव, हिंसा और सामाजिक बहिष्कार जैसी घटनाएं सामने आती रहती हैं। जब तक ऐसी असमानताएं मौजूद हैं, तब तक सामाजिक न्याय पर गंभीर चर्चा होना ज़रूरी है।
सिर्फ आरक्षण पर बहस करने के बजाय, हमें उस सोच और भेदभाव को खत्म करने पर ध्यान देना चाहिए जिसने इसकी आवश्यकता पैदा की। साथ ही, SC/ST समुदायों की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने वाले कानूनों का प्रभावी और निष्पक्ष क्रियान्वयन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
आरक्षण तो 70 साल से है..भेदभाव तो बहुत पुराना है इसलिए कास्ट को खत्म करना बहुत जरूरी है..यदि कास्ट आधारित भेदभाव नहीं होता तो शायद आरक्षण की नौबत ही नहीं आती
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जाति खत्म होगी तभी भेदभाव खत्म होगा, तभी आरक्षण की ज़रूरत भी स्वाभाविक रूप से खत्म होगी।
क्या आप भारत में जाति आधारित भेदभाव और जाति को पूरी तरह खत्म करने का समर्थन करते हैं?