डॉ. श्रवण चौधरी की गिरफ्तारी और अब तक उनकी रिहाई नहीं होना भाजपा सरकार की तानाशाही सोच और प्रशासनिक विफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है। सरकार जनता के मुद्दों का समाधान करने में असफल रही है, इसलिए अब वह आवाज़ उठाने वालों को ही निशाना बना रही है।
राजस्थान यूनिवर्सिटी के बाहर शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन करने वाले RLP कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई कर सरकार ने यह साबित कर दिया है कि उसे लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और युवाओं की आवाज़ से डर लगता है।
सरकार यह समझ ले कि संघर्ष की आवाज़ को हिरासत में लेकर दबाया नहीं जा सकता। डॉ. श्रवण चौधरी कोई व्यक्ति मात्र नहीं, बल्कि युवाओं, किसानों और आम जनता की आवाज़ हैं। जितना दमन होगा, उतना ही बड़ा जनआंदोलन खड़ा होगा।
यदि डॉ. श्रवण चौधरी को तुरंत रिहा नहीं किया गया तो यह आंदोलन राजस्थान के हर जिले और हर तहसील तक पहुंचेगा। सरकार की नाकामियों, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ जनता सड़क पर उतरने को मजबूर होगी, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी भाजपा सरकार और प्रशासन की होगी।
लोकतंत्र में जनता की आवाज़ को कैद नहीं किया जा सकता।
✊ #श्रवण_चौधरी_को_रिह_करो
✊ लोकतंत्र का गला घोंटना बंद करो।
✊ अन्याय के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा।
#ReleaseDrShravanChoudhary
#RLP
#लोकतंत्र_बचाओ
टैक्स से बचना हो तो दुबई चले जाओ
और गोले बारूद से बचना हो तो भारत
वाह !!
लेकिन
अपने सुख में भारत मां की खुशियों का अहसास रखो,
तुम्हे बचाकर ले आयेगा आयेगा मोदी पर विश्वास रखो।
विधायक का पद एक सम्मानजनक और जिम्मेदारी भरा संवैधानिक दायित्व होता है, जिसे जनता अपने क्षेत्र के विकास, प्रगति और भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से सौंपती है। विकास निधि का दुरुपयोग करना जनता के विश्वास के साथ खुला विश्वासघात है।
#भ्रष्टाचारी_भाजपा_विधायक
कांग्रेस के भ्रष्टाचार को नहीं सहेगा राजस्थान” के नारे के साथ सत्ता में आई भाजपा सरकार अपने दो वर्षों के कार्यकाल में बिना किसी विशेष प्रचार-प्रसार के ही विधायकों की वाहवाही बटोरती नज़र आ रही है। इसमें विपक्ष और निर्दलीय विधायकों का योगदान भी सराहनीय माना जाना चाहिए।
हनुमान बेनीवाल को हराकर चुनाव जीतने वाले डांगा को लेकर हनुमान बेनीवाल लगातार यह कहते रहे हैं कि जनता ने जोश में आकर चुनाव के दौरान एक भूल कर दी है, जिसका पछतावा उसे कुछ समय बाद होगा। आज सामने आए स्टिंग ऑपरेशन के बाद उनकी यह बात कहीं न कहीं सच होती दिखाई दे रही है।
खींवसर से तीन बार विधायक रह चुके हनुमान बेनीवाल हमेशा सरकार के विरुद्ध मुखर रहे हैं। सरकारों ने उन पर दबाव बनाने के लिए अनेक प्रयास भी किए होंगे, लेकिन अब तक उन पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं लगा है। यही कारण है कि वे निर्भीक और निडर होकर लगातार सरकारों की नीतियों के खिलाफ खड़े रहते हैं और आम जनता को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष करते रहते हैं।
पिछले दिनों बिना किसी सबूत के BAP विधायक की सदस्यता स्पीकर में रद्द कर दी थी।
भाजपा विधायक सीधे रिश्वत लेते पकड़े गए हैं देखते हैं बीजेपी क्या करती है।
इस बार मेरा बेड़ा पार हो जाएगा इसी आस में बैठा था तू ... लेकिन फिर से OMR बदल गई !
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#RPSC & #RSSB ने हजारों बच्चों का भविष्य चौपट कर दिया, इन संस्थाओं में बैठे #निकम्में और #घटिया किस्म के लोगों ने सिस्टम को खोखला कर विश्वास रूपी धागे को तार-तार कर दिया !
👉 ऊपर से ज्ञान पेलते है न्यारा ...
👉 कोचिंग & टीचर को दोष देकर अपने काले कारनामों पर झट से पर्दा लगा लेते है ।
---------------- #RPSC #RSSB पर फिर से विश्वास कायम रखना है तो इनका जल्द पुनर्गठन करना होगा अन्यथा भविष्य की गर्त कब सतह बन जाए पता नहीं चलता ।
अध्यापक भर्ती लेवल 2 में अभ्यर्थियों के रिवाइज परिणाम में चयनित कैंडिडेट से उच्च होने के बावजूद चयन प्रक्रिया से बाहर रखना जाना, बिल्कुल ही अन्याय पूर्ण है
जी मीडिया का आभार मजबूती से आवाज उठाने के लिए
#देवेंद्र_शर्मा
थार का हनुमान 🔥 थानसिंह डोली जल्दी शादी के बंधन में बंधने वाले है,,
शादी सुर्खियां में रहेगी क्योंकि हनुमान बेनीवाल साहब स्वयं बाराती बनेंगे,,
@DoliThansingh@hanumanbeniwal
राजस्थान पुलिस के पूर्व डीजीपी व लोक सभा में मेरे साथी सदस्य ,टोंक-सवाईमाधोपुर से सांसद श्री हरीश जी मीणा के पुत्र हनुमंत मीणा के आकस्मिक निधन का समाचार अत्यंत दुःखद व पीड़ादायक है।
ईश्वर से प्रार्थना करता हुं कि वो दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान प्रदान करें एवं शोकाकुल परिवारजनों को इस असहनीय दु:ख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
ॐ शांति
RPSC की राजनीति विज्ञान व्याख्याता भर्ती परिणाम का एक ही उद्देश्य है- कोचिंग सिस्टम को बढ़ावा, सामाजिक न्याय पर चोट और मेहनतकश विद्यार्थियों के साथ धोखा?
"RPSC के परिणाम से नाराज़गी, सुधार की मांग"
#save_polity@RPSC1@Save__Polity@BarmerPress@ChoudharyVkk
@vimgodara
➡️ व्याख्याता भर्ती "पॉलिटिकल साइंस" के अभ्यर्थियों से आपके 5 सवाल और उनके जवाब —
▪️ आपका पहला सवाल : क्या आप 40% और 35% की सीमा को हटवाना चाहते है , क्या यह नियम उचित नहीं है ?
✓ हमारा जवाब : हम सभी सामूहिक रूप इसका समर्थन करते है। हम कतई नहीं चाहते इसमें परिवर्तन हो। हम इसके एक पक्ष पर ध्यान दिलवाना चाहते है कि जिस प्रकार सहायक आचार्य भर्ती में तीनों पेपर में मिलाकर 40% है उसी प्रकार व्याख्याता भर्ती में भी दोनों पेपरों में मिलाकर 40% लाने का प्रावधान किया जाना चाहिए।
▪️ आपका दूसरा सवाल : क्या पेपर सिलेबस से बाहर था ?
✓ हमारा जवाब : 100% नहीं , लगभग 60% सवाल सामान्य अभ्यर्थियों की पहुंच से बाहर थे। ऐसे प्रश्न थे जो हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों के लिए चुनौतीपूर्ण थे , विश्विद्यालयो के अनेक प्रोफेसर उनको हल करने में सकपका रहे थे तो हमें तो टीम घंटे के सीमित समय में पहाड़ चढ़ना था।
▪️ आपका तीसरा सवाल : ऐसा क्या परिवर्तन पेपर में हुआ कि 40% लाना मुश्किल हो गया ?
✓ हमारा जवाब : प्रश्नों की लम्बाई , हिंदी भाषा का अनुवादी जाल , एक प्रश्न के भीतर तीन प्रश्न, Nested Question's , विकल्पों की सहनीय स्तर से अधिक जटिलता , 32 पृष्ठों का पेपर सीधा 64 का हो जाना जिससे पैदा हुआ मानसिक असंतुलन। सवालों में अधिकतर प्रश्नों का स्तर PG लेवल का होना , NCERT का वेटेज 30 प्रश्नों से घटाकर 03 प्रश्न कर दिया जाना , राजस्थान के विश्वविद्यालयो में अनुसंशित पुस्तकों को दरकिनार किया जाना।
▪️ आपका चौथा सवाल : आपसे आयोग द्वारा आपत्तियां मांगी गई तब आपने आपत्ति क्यों दर्ज नहीं करवाई ?
✓ हमारा जवाब : आयोग सीधा प्रश्न पत्र पर आपत्तियां नहीं मांगता है , वह प्रश्नों पर आपत्तियां मांगता है , जिन सवालों के प्रामाणिक सोर्स मिले उन पर आपत्तियां दर्ज करवाई है , अधिकतर प्रश्न ऐसे थे जिनके उत्तर ही नहीं मिले तो उन पर आपत्तियां दर्ज करवाने का हमारे पास कोई आधार नहीं था , न ही आपत्ति दर्ज करवाते समय ऐसे विकल्प मौजूद होते है।
▪️आपका पांचवां सवाल : आयोग को लिखित या पोर्टल शिकायत क्यों नहीं भेजी ?
✓ लिखित में पत्र के माध्यम से शिकायते भेजी है , 1100 से अधिक ईमेल गए किए है , ग्रीवांस पोर्टल पर शिकायत प्रकिया जटिल होने के बावजूद हमने 300 से अधिक शिकायतें दर्ज की है। हमनें सिर्फ यहां ही नहीं सरकार , मुख्य सचिव , केंद्र सरकार तक शिकायतें पहुंचाई है।
@aishwaryam99@ankittiwadi@aruchodhar31642@ashok_Jodhpurii@ashok_Jodhpurii@arvindchotia@avinashkalla@dineshbohrabmr@Drananya05@educationnagari@educationnagari@JATbera1@JATbera1@manojpehul@manojpehul@MansaRajasthani@RPSC1@madandilawar@RajCMO@ankittiwadi@ashokshera94@BarmerPress@SpacesEducation@rajeduofficial@Bigbrillar@NDTV_Rajasthan@1stIndiaNews@sharatjpr
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राजस्थान लोक सेवा आयोग ने 23 सितम्बर को व्याख्याता भर्ती 2024 राजनीति विज्ञान का परिणाम जारी किया है। 225 पदों के लिए परीक्षा हुई , 46000 लोगों ने परीक्षा दी। उसमें से केवल 6 ही उत्तीर्ण हुए। आयोग के इतिहास का ऐसा रिजल्ट जिसमें कोई कट ऑफ ही नहीं है। सर जो पेपर 2015, 2018, 2022 की भर्ती में 32 पृष्ठों में सिमट जाया करता था वो इस भर्ती में 64 पृष्ठों में आया। 03 घंटे में प्रश्न पत्र को सिर्फ पढ़ा जा सकता था , बच्चे हल कैसे करते ?
एग्जाम हॉल में हमें पेपर का अत्यधिक कठिन स्तर देख कर लग रहा था कि शायद हमने पढ़े नहीं, हमें अलग रहा था कि 100—150 बच्चे तो पास हो जाएंगे, लेकिन बच्चे पास हुए है आप अंदाजा लगा सकते है पेपर का स्तर क्या रहा होगा।
गैर—मनोवैज्ञानिक प्रश्न पत्र था। जब आयोग ने पाठ्यक्रम का विभाजन माध्यमिक , स्नातक , परास्नातक स्तर में वर्गीकृत कर रखा है लेकिन पेपर इस वर्गीकरण से बाहर था।
स्कूल व्याख्याता को 11 वीं , 12 वीं के बच्चों को डील करना होता है , वहां NCERT पुस्तके अनुसंशित है तो फिर उन पुस्तकों से प्रश्न क्यों नहीं पूछे गए ? जबकि पिछली भर्तियों में 150 में से 30 प्रश्न उनमें से आते ही थे।
पेपर सेटर ने कुंठित मानसिकता से पेपर का निर्माण किया है। जिससे हजारों अभ्यर्थी चयन की दौड़ से बाहर हो गए।
आपके निवेदन/आग्रह है आप हमारी आवाज उठाएं ताकि मामला उच्च स्तर तक पहुंचे , ताकि ऐसे घटनाक्रम की पुनरावृत्ति न हो। 🙏🙏🙏
पॉलिटिकल साइंस व्याख्याता भर्ती के अभ्यर्थियों की पीड़ा जैसी उन्होंने बताई है...
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RPSC इससे भी बड़े कारनामे कर रही है।
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राजस्थान लोक सेवा आयोग ने 23 सितम्बर को व्याख्याता भर्ती 2024 राजनीति विज्ञान का परिणाम जारी किया है। 225 पदों के लिए परीक्षा हुई , 46000 लोगों ने परीक्षा दी। उसमें से केवल 6 ही उत्तीर्ण हुए। आयोग के इतिहास का ऐसा रिजल्ट जिसमें कोई कट ऑफ ही नहीं है।
सर जो पेपर 2015, 2018, 2022 की भर्ती में 32 पृष्ठों में सिमट जाया करता था वो इस भर्ती में 64 पृष्ठों में आया। 03 घंटे में प्रश्न पत्र को सिर्फ पढ़ा जा सकता था , बच्चे हल कैसे करते ?
एग्जाम हॉल में हमें पेपर का अत्यधिक कठिन स्तर देख कर लग रहा था कि शायद हमने पढ़े नहीं, हमें लग रहा था कि 100—150 बच्चे तो पास हो जाएंगे, लेकिन 6 बच्चे पास हुए है आप अंदाजा लगा सकते है पेपर का स्तर क्या रहा होगा।
गैर—मनोवैज्ञानिक प्रश्न पत्र था। जब आयोग ने पाठ्यक्रम का विभाजन माध्यमिक , स्नातक , परास्नातक स्तर में वर्गीकृत कर रखा है लेकिन पेपर इस वर्गीकरण से बाहर था।
स्कूल व्याख्याता को 11 वीं , 12 वीं के बच्चों को डील करना होता है , वहां NCERT पुस्तके अनुसंशित है तो फिर उन पुस्तकों से प्रश्न क्यों नहीं पूछे गए ? जबकि पिछली भर्तियों में 150 में से 30 प्रश्न उनमें से आते ही थे।
पेपर सेटर ने कुंठित मानसिकता से पेपर का निर्माण किया है। जिससे हजारों अभ्यर्थी चयन की दौड़ से बाहर हो गए।
आपके निवेदन/आग्रह है आप हमारी आवाज उठाएं ताकि मामला उच्च स्तर तक पहुंचे , ताकि ऐसे घटनाक्रम की पुनरावृत्ति न हो।
🙏🙏🙏
@RPSC1
कपासन (चितौड़गढ़) में जन- संघर्ष के आगे सरकार झुकी,सूरज माली के परिजनों की मांगो पर सहमति बनी |
प्रदेश में जहां भी अन्याय होगा, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी सदैव पीड़ित पक्ष के साथ खड़े होकर लड़ाई लड़ेगी |