जिस जाति की महिलाएं अपने पति की मृत्यु के अगले ही दिन अपने देवर के नाते चली जाती हो जो कल तक भाभी या माँ समान थी उसे अपनी पत्नी बनाने से पूर्व जो तनिक भी नहीं सोचते क्या वो जाति समाज वर्ग जौहर के बारे में कुछ कहने योग्य है
गांव-देहात का कल्चर अगर आप देखेंगे तो पायेंगे कि खेती-किसानी हो या पशुपालन, औरत और मर्द जैसे जाट-जाटणी, गुर्जर-गुर्जरी, अहीर-अहीरनी, मीणा-मीणी, माली-मालन, बलाई-बलाईन,... आपको साथ-साथ काम करते दिखाई देंगे, खेत में सांप या अन्य कोई भयानक जानवर आने पर न केवल पुरुष बल्कि कबीलाई महिला भी हाथ में लाठी, जैली, गंडासा,... जो भी आयेगा, लेकर दौड़ पड़ेंगी, किसान आंदोलन में आपने खुद ने देखा है कि महिलाओं के वीडियो आ रहे थे जिनमें वे लाठी वगै��ह लेकर पुलिस की गाड़ियों के पीछे दौड़ती दिख रही थीं, महिला पहलवानों के आंदोलन में भी आपने देखा है कि हमारी लड़कियां सत्ता के खिलाफ डटकर खड़ी हैं, कहने का मतलब मुसीबत के समय औरतों का घर में छुप जान�� या कुएं/आग में कूदकर जौहर कर लेना जैसे कायरता वाले काम कबीलाई लोगों के कल्चर में नहीं थे...
जौहर को जिन नस्लों में "गर्व" का विषय माना गया है, उन नस्लों की औरतें न तो आपको खेत-खलिहान में उस जीवटता से काम करती दिखेंगी, न कभी खेजड़ी के पेड़ पर चढ़कर लूंग छानती नजर आयेंगी, न भैंसा-बुग्गी को दौड़ाती दिखेंगी, न ट्रेक्टर और पिक-अप दौड़ाती दिखेंगी, न सत्ता के खिलाफ सड़कों पर नजर आयेंगी, बस मुसीबत के समय कुआं या आग...
हम लड़ने वाले कल्चर के लोग हैं, डरने वाले कल्चर के नहीं...
इतिहास की फर्जी मनोहर कहानियों से बाहर आ जाओ, आपका असल इतिहास किताबों में नहीं, आपके आस-पास बिखरा पड़ा है।
✍️✍️:- विजेंद्र सिंह
ओबीसी आरक्षण लेने के लिए जाटों ने खुद लिखकर दिया था कि हम चांडाल और शूद्र बहुत पिछड़े दबे कुचले घोर जातिवादी और एक नंबर के नीच है सो यदि अगड़ा पिछड़ा इतना बुरा लगता है तो फाड़ फेंको ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) वाला सर्टिफिकेट किसी ने जबरदस्ती थोड़ी थोप दिया बना दिया तुमको
मुगल से बहुत पहले आए तुर्क, तुर्क बादशाह गयासुद्दीन तुगलक और फिरोज शाह तुगलक दोनो की पत्नी जाटनी थी उसके उपरांत गोकुला की बेटी का विवाह हु�� मुगल से उसके बाद जोधपुर की गुलाबराय जाटनी का राजपूत राजा विजय सिह सो जाटनियो का इतिहास हमेशा राजपूत मुगल तुर्क के हरम मे सेवा देना का रहा है
आप गलत समझ रही है हमारे यहाँ जोधा उर्फ़ मरियम उज्जमानी के जैसे अनेको महिलाओ की हरम मे मुगलो दारा उतारी जाने वाली चुनड़ी जैसे रिवाज़ नहीं है
जाटो का स���ेग है 🤘🤘
जंगल में बैठकर कच्ची शराब कच्ची पीना का यदि इतिहास लिखा जाता तो मीणा जाति का नाम सबसे पहले आता किन्तु चोर लुटेरों और अब��ी मीणी के भतीजों का इतिहास केवल अबली मीणी की सिसकियों वाला ही है जो आज भी अबली महल से आती है शायद अबली मीणी की सिसकियों को ही बहादुरी मान लिया मीणाओ ने
यह बात जगजाहिर है कि मुख्य रूप से 13 सदी तक और मुगल काल तक नहान में मीणाओ का शासन था।
मीणाओ ने कछवाहो से सेकड़ो वर्��ों तक संघर्ष किया लेकिन संघर्ष ,ईमानदारी और हथियार के दम पर किया।
कछवाहो ने छलनीति और धोखाधड़ी से मीणाओ को परास्त किया।
लेकिन मीणाओ के हाथ से सत्ता जाने के बाद भी कछवाह मजबूर थे क्योंकि उनको पता था कि मीणा अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए सिर काट लेंगे और कटवा देंगे।
कछवाहो ने मीणाओ को सेना और नगर की सुरक्षा के लिए मीणाओ को विशेष अधिकार दिए।वो उनकी मजबूरी थी।
ब्रिटिशकाल में मीणाओ की स्थिति दि���ोदिन दयनीय होती गई और कछवाह भी यही चाहते थे और उन्होंने मीणाओ के हितो की रक्षा के लिए कुछ नहीं किया क्योंकि कछवाहा चाहते ही यही थे कि मीणाओ की छवि ख़राब हो क्योंकि कछवाहों से पहले इस पूरे क्षेत्र पर मीणाओ का शासन था।
आमेर,खोह-गंग,झोटवाड़ा,आमागढ़,जयगढ़,नाहरगढ़,माँच,क्यारा,नांगल,नहान,नरेठ,झिरी,हथरोई,मोरागढ़,समरावती,नायला आदि स्थानों को ��छवाहों ने धोखे से हड़प लिए।
चौहानों ने बूंदी,उमरथूना,हिंडोली और रणथम्भौर,गढ़ टटवाडा।
दक्षिण में देवलगढ़(प्रतापगढ़),जालोर,अजमेर(इस क्षेत्र के मीणा रावत उपाधि लगाते है,जो सबसे प्राचीन उपाधि है)
यह सभी मीणा समुदाय के ठिकाने(राज्य/जनपद)थे ।
प्राचीन मत्स्यदेश से लेकर 13 सदी तक इस क्षेत्र पर मीणाओ का शासन था।
श्री मनोज मीणा बिल्कुल शत प्रतिशत सही बात कह रहे है………
@manojmeena
जब लड़ने की बारी आयी थ��� तब जंगल में बैठकर दारू पी रहे थे अब जब दारू पीकर जंगल में नाचने का इतिहास लिखा जाएगा तब मीणा जाति को सबसे ऊपर रखेगे लेकिन अपनी घर की महिलाओ को बेचने वैश्यावृति करवाने वालों को शायद ही कोई योद्धा बहादुर माने अंग्रेज दूरदर्शी थे इस मामले में
जाटों मे भाभी को माँ का दर्जा ये कब हुआ
असल मे भाई की मौत के अगले दिन ही जाटनी देवर को सौंप दी जाती है पुलवामा की वीरांगना मंजू जाट पति के मरते ही कुछ दिनों मे देवर के नाते चली गयी अर्थात नाता प्रथा से विवाह कर लिया ये तो हरकते है जाटों की और बाते संस्कारों की
क्योंकि भाभी का दर्जा हमारे संस्कारों में माँ के समान माना गया है, उनकी ममता और स्नेह में भी वही अपनापन झलकता है जो एक माँ की गोद में मिलता है।
लेकिन अफ़सोस, आजकल की कुछ वेब सीरीज़ ने इन पवित्र रिश्तों की गरिमा को इस कदर धुंधला कर दिया है कि मर्यादा और संवेदनाएं मानो कहीं खो सी गई हैं।
@HarmanBangar4 @socially321@Warlock_Aditya अबे पगड़ी तुम्हारी सलवारे तो एक दिन मे टांग दी थी अब्दाली ने अमृतसर में तुम कायरों को तो बीच में बोलना ही नहीं चाहिए तुम संता बंता के चुटकलों से अधिक कुछ नहीं हो
भारत सरकार अब तक फ़िलीस्तीन को 1000 करोड़ से अधिक की आर्थिक सहा���ता कर चुका है इसी विश्वगुरु देश में फिलिस्तीन बांग्लादेश अफगानिस्तान के लोगों को छात्रवृत्ति मिल है लेकिन सवर्णों को नहीं आप कितना ही इंडिया इंडिया चिल्ला लो लेकिन ये देश आपका सगा नहीं है
जिस जाति की महिलाएं अपने पति की मृत्यु के अगले ही दिन अपने देवर के नाते चली जाती हो जो कल तक भाभी या माँ समान थी उसे अपनी पत्नी बनाने से पूर्व जो तनिक भी नहीं सोचते क्या वो जाति समाज वर्ग जौहर के बारे में कुछ कहने योग्य है
@_SumiShekhawat @Sultanmukhiya1 मुझे किस बात की टेंशन होगी लेकिन बुरा लगता है कि कोई मोदी भक्त ओबीसी नीच जात का अपनी स्वजातीय लड़की को गाली देकर हिन्दुत्व बचा रहा है और हिन्दू राष्ट्र बना रहा है
कुछ महीने पहले यही ��े लोगों के ss viral हुए जो पहले लड़कियों को बहन बना के dm मे कुछ और बनाने के प्रयास करते हुए पकड़े गए थे मुझे नहीं लगता कि सोशल मीडिया पर कोई नैतिकता का सर्टिफिकेट देने योग्य है जो कुछ दिनों पूर्व नागौर बलात्कार कांड में FIR viral कर रहे थे सर्मथन कर रहे थे
सीडी के विषय में लड़ने का कोई अर्थ ही नहीं है जिसके पास नही�� आई वो मांग रहा है और जिसके पास है वो देखकर दूसरों को चरित्र प्रमाण पत्र दे रहा है लगभग सभी के पास सीडी के बारे आवश्यक जानकारी आ चुकी है आप किसी का मन मस्तिष्क नहीं बदल सकते कमेन्ट मे जो नैतिक बने है dm मे वही सीडी भक्त
सोशल मीडिया दिखावटी लोगों के बाहुल्य क्षेत्र है जहा लोग सबसे अधिक नैतिक नारीवादी सज्जन बनने का ��्रयास करते हैं लेकिन वास्तविकता इससे अलग है जो व्यक्ति जिस चीज़ का दिखावा करता है वही व्यक्ति उस चीज़ मे सबसे कमजोर होता है यही मनोविज्ञान कहता है और यही इतिहास