मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में बीजेपी स्वीप करेगी क्योंकि दोनों ही जगह मोमेंटम बीजेपी के पक्ष में है।
मध्य प्रदेश में बीजेपी 160+ जानें की संभावना है।
छत्तीस गढ़ में बीजेपी 55+ जाएगी।
राजस्थान में 110 के आस पास रहेगी।।
तेलंगाना में कांग्रेस स्वीप करेगी 70+ सीटों के साथ।
@ShrrinG
1. जैसाकि सर्वविदित है कि परमूपज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर व उनके परम अनुयायी मान्यवर श्री कांशीराम जी की देश भर में बहुजन-हित हेतु ज़बरदस्त त्याग-तपस्या, आजीवन कड़ा संघर्ष व उनके उच्च आदर्श हमेशा ही प्रेरणा के स्त्रोत रहे हैं, जिस पर चलकर ही बी.एस.पी. ने देश की राजनीति में अभूतपूर्व सफलतायें अर्जित की हैं और अब ख़ासकर आगामी यूपी विधानसभा आमचुनाव को लेकर सर्वसमाज के साथ उत्साहपूर्ण ज़बरदस्त तैयारी भी की जा रही है।
2. यहाँ यह भी कहना हैं कि मेरा निजी नहीं बल्कि पूरा ’बहुजन समाज’ ही मेरा विराट परिवार है और उनका हित व कल्याण मेरे लिये सर्वोपरि है और हमेशा ही रहेगा। इसी को मद्देनज़र रखते हुये व ख़ासकर पार्टी में अनुशासन बनाये रखने के लिये ही मेरे द्वारा पिछले कुछ दिनों में, अनेकों सख़्त फैसले भी लिये गये हैं और इसको लेकर मेरे अपने भाई-बहन व उनके परिवार के लोग कभी भी अपवाद नहीं रहे हैं, जो कि जग-ज़ाहिर है।
3. वैसे तो श्री आकाश आनन्द का व्यक्तित्व पार्टी में काफी हद तक ठीक ही रहा है, लेकिन इनको लेकर पिछले दिनों कुछ ऐसे कारण भी रहें हैं जिसकी वजह से पार्टी संगठन में कई बार कुछ ज़रूरी परिवर्तन भी करने पड़े हैं और फिर अन्ततः श्री आकाश आनन्द के ससुर श्री अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास लेने के लिए मजबूर भी होना पड़ा है।
* जिसके बाद से श्री आकाश आनन्द के व्यक्तित्व व कार्यशैली आदि में काफी कुछ बदलाव भी लोग देख रहे हैं, जिसका ख़ास प्रमाण पार्टी में वापिसी हेतु अभी हाल ही में सोशल मीडिया ’एक्स’ पर किया गया उनका एक पोस्ट भी है, जिसकी काफी चर्चा भी है।
4. इसको लेकर पार्टी के अधिकांशः लोगों का यही कहना है कि श्री आकाश आनन्द के अनुरोध को स्वीकार करते हुये उनकी पूर्व की दी गई ज़िम्मेवारियों के साथ इनको पार्टी में पुनः कार्य करने का मौक़ा दिया जाये, जिसके लिए इनके पिता के साथ-साथ इनके छोटे भाई श्री ईशान आनन्द ने भी अपनी सहमति जताई है। वास्तव में श्री ईशान आनन्द ने तो अपनी मिशनरी भावना प्रदर्शित करते हुये यह भी कहा है कि वे बिना किसी पद के ही पार्टी में मा. बहनजी के दिशा-निर्देशन में जो भी उनको कार्य सौंपे जायेंगे तो उसे वे अपनी पूरी ईमानदारी व निष्ठा से ज़रूर निभायेंगे।
5. ऐसे में अब पार्टी काफी सोच-विचार करने के बाद पार्टी व मूवमेन्ट के हित में श्री आकाश आनन्द को पुनः बी.एस.पी. का राष्ट्रीय संयोजक (नेशनल कन्वेनर) बनाकर इनको फिर से पार्टी में कार्य करने का मौक़ा दे रही है। उम्मीद है कि श्री अशोक सिद्धार्थ द्वारा राजनीति सेे संन्यास लेने के बाद से अब पार्टी में सब कुछ ठीक व सुचारू ढंग से चलेगा और पार्टी संगठन में भी बार-बार परिवर्तन नहीं करना पड़ेगा, हालाँकि यह काफी कुछ श्री आकाश आनन्द के ऊपर भी निर्भर करेगा।
6. इन्ही कुछ ज़रूरी बातों के साथ ही अब मैं पार्टी व मूवमेन्ट के हित में आज लिये गये इस फैसले के साथ ही श्री आकाश आनन्द के राजनैतिक उज्जवल भविष्य की कामना के साथ ही इनको (श्री आकाश आनन्द) व इनके छोटे भाई श्री ईशान आनन्द को तथा इनके पिता श्री आनन्द कुमार को भी अपना बहुत-बहुत प्यार व आशीर्वाद देती हूँ। इतना ही नहीं बल्कि पिछले दिनों हर परिस्थिति में मेरा साथ निभाने के लिए ख़ासकर ’बहुजन समाज’ के सभी लोगों का व अपने सभी शुभचिन्तकों आदि का भी मैं पूरे तहेदिल से व सम्मान के साथ उनका आभार भी प्रकट करती हूँ।
Videos of new babas are popping up in every corner of India. They all use the same script: bodyguards, convoy SUVs, a bizarre gimmick to "fix" devotees' troubles, and rows of women sitting with folded hands.
I don’t know if India will be a developed nation by 2047, but every single district will definitely have its own Maharaj, Sarkar, Dham, Baal Sant, etc, and all of them will be flourishing.
किस बात के अच्छे दिन जब,
1- शेयर मार्केट पाताल लोक में चला गया
2- एशियन गेम्स में 10 वें नंबर पर हैं हम
3- मंहगाई चरम पर है
4-भ्रष्टाचार अपने उच्च स्तर पर है
5- सड़के चांद के सतह जैसी हो गई हैं
6- विधायकों की गुंडागर्दी आसमान छू रही है
7- पेट्रोल डीजल मंहगा हुआ पड़ा है
8- रुपया धरातल में चला गया है
9- अमेरिका हमको पेले पड़ा है
10- चीन हमसे 100 साल आगे चल रहा है
11- 5 किलो राशन के बदले 900 की गैस मिल रही है
12- व्यापारी लोग माल स्टोर करके मंहगी होने पर जनता को बेचते हों
13- गांवों में अस्पताल नहीं है
14- गाँव में स्कूल नहीं है
15- प्राइवेट स्कूल खून पी रहे हैं
16- प्राइवेट अस्पताल में 400 की दवा 4000 में मिल रही है
17- सरकारी एम्बुलेंस दलाली में मिलती है।
2014 में जिस उम्मीद से लोगों ने चुनाव किया था, उसमें पूरी तरह से फेल हुए हैं।
पुरुष को जिस भी स्त्री से सच्चा प्यार होता है, वो अपनी प्रेमिका को कभी भी हवस की निगाह से नही देखता है। उसकी प्रेमिका उसके लिए हमेशा सर्वोपरी होती है। उसके प्रति हमेशा ईमानदार रहता है। उसे खुश करने के लिए अपना हर सफल प्रयास करता है लेकिन फिर भी अंत में पुरुष को छला जाता है।
अगर कोई स्त्री आपके बारे में, अपने घरवालों को बताए, और अपनी बहन से भी आपकी बात करवाए, उसका पूरा खानदान भी आपके बारे में जानता हो,
तब भी उस स्त्री पर यक़ीन करके ख़्वाबों के सफ़र में आगे मत बढ़ना, वो आपको इतनी ऊंचाई से गिराएगी कि आप सारी उम्र दोबारा उठने के काबिल नहीं रहोगे...
जब जब मोदी सरकार किसी वास्तविक मामले में फंसती दिखती है, तब तुरंत सूत्रों के आधार पर खबरें चलनी लगती हैं।
हंसी की बात ये कि कुछ ही दिनों बाद सूत्रों के आधार वाली खबरों पर सरकार खुद ही मूत्र विसर्जन कर देती है।
जिस मीडिया को मोदी सरकार अपने बड़े बड़े मामलों की भनक तक नहीं लगने देती, वही मीडिया जब सूत्रों के आधार पर खबर चलाने लगती तो खुद ही अपना क्रेडिट खो बैठती है।
लेकिन बेशर्म इतने कि फिर से सूत्रों के आधार की खबर बताने लगेंगे।
पिछले कुछ सालों में जिस संस्थान ने अपनी विश्वसनीयता सबसे ज्यादा खोई है, वो भारतीय मुख्य धारा मीडिया है।
ये ठीक है कि मोदी प्रेस कॉन्फ्रेस नहीं करते, उनके सरकार के लोग स्पष्ट बात नहीं बताते पर ये भी सत्य है कि वो इसलिए ऐसा कर पाते हैं क्योंकि मुख्य धारा मीडिया उन्हें ऐसा करने देती है।
कोई भी बड़ा पत्रकार कभी भी मोदी शाह या गडकरी प्रधान जैसे लोगों से सबके सामने कठिन सवाल पूछ सकता था। बहुत मौके मिलते हैं।
पर गुलामों को जब पेटभर खाने को मालिक देते रहें और सोने को छत।
तो वो इससे आगे कुछ न सोच पाते।
आडवाणी, यशवंत सिन्हा और मुरली मनोहर जोशी जी की तरफ़ से ट्वीट कर रहा हूँ 😂🤣👇🏿
बीजेपी का “75 साल पर रिटायरमेंट” नियम भी बड़ा दिलचस्प है—मानो यह कोई संवैधानिक नियम नहीं, बल्कि चुनिंदा नेताओं के लिए एक्सपायरी डेट हो। #सवर्ण_नेता 75 की उम्र में “मार्गदर्शक मंडल” भेज दिए जाते हैं, जबकि पिछड़े, अति-पिछड़े और दलित नेताओं के लिए शायद नियमावली में लिखा है—“जनता का आशीर्वाद और सत्ता का आनंद, दोनों आजीवन जारी रहेंगे।”
लगता है पार्टी में उम्र नहीं, सामाजिक समीकरण देखकर रिटायरमेंट की घंटी बजती है। किसी के लिए 75 पर विदाई समारोह, तो किसी के लिए उम्र सिर्फ़ सरकारी दस्तावेज़ में दर्ज एक संख्या—कुर्सी पर उसका कोई असर नहीं।
यानी संदेश साफ़ है:
सवर्ण नेताओं के लिए 75 साल अंतिम पड़ाव, और बाकी नेताओं के लिए सत्ता की पारी—जब तक बैटरी चले, तब तक इनिंग जारी 😂🤣
@AjiHaaan नरेन्द्र मोदी, अजीत डोभाल, हरदीप पुरी, जयशंकर, और पीयूष गोयल, केजरीवाल, rss, फोर्ड फाउंडेशन जैसे cia एजेंट पहले से ही देश पर कब्जा किए बैठे हैं। किस में इतनी हिम्मत जो अमेरिका के प्यादों को हटा दे
@AjiHaaan Vandyke को जेल से निकाल कर US जाने की परमिशन देने वाले बगावत का ज्ञान पेल रहे 🤣... Regime Change Operation की शुरुआत 2011 में हुई थी और 2014 में अमरीका ने अपना पालतू बिठा भी दिया, बस लोगो ने समझने में थोड़ी देर कर दी।
सुप्रीम सिंडीकेट कैसे काम करता है:
जज साहब का बेटा चुनाव आयोग का वकील, केस मुख्य चुनाव आयुक्त की बेटी का और जज साहब का फैसला बेटी के पक्ष में.
जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा जिनकी कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत शर्मा ने ज्ञानेश कुमार की बेटी मेधा रूपम का केस बेंच बदल कर लगाया और जैसी उम्मीद थी मेधा रूपम पर हाई कोर्ट का लगाया 5 लाख रु का जुर्माना भी स्टे हो गया.
जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा का बेटा चुनाव आयोग का स्टैंडिंग काउंसिल है.
उसी दिन जस्टिस शर्मा चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति मामले पर सरकार के पक्ष में फैसला देते हैं.
लोकतंत्र, इंसाफ, नैतिकता और Conflict of Interest सबको एक ही स्ट्रोक में बाउंड्री के बाहर कर दिया जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सूर्यकांत ने.
देश विरोधी गतिविधियों में शामिल अमेरिका नागरिक मैथ्यू वैनडाइक को एक महीने के लिए अपने परिवार से मिलने की अनुमति दी गई है।जब कि NIA की तरफ से कहा जा रहा है कि,आतंकवाद से जुड़े आरोपों की जाँच अभी जारी है।माननीय My Lords और आदरणीय साहेब को सलाम है।जो भारतीय ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से अमेरिका में सिर्फ़ रोज़गार के लिए रह रहे थे उन्हें हथकड़ी लगाकर भारत भेजा गया था।कोई भी भारतीय किसी आतंकवादी गतिविधि में लिप्त नहीं था।और आख़िरी बात मैथ्यू एक महीने बाद भारत लौटेगा ? शायद नही…
कल शी जिनपिंग जी वाशिंगटन पहुँचे। सारे प्रोटोकॉल तोड़ ट्रम्प जी स्वयं लेने गए एयरपोर्ट। लाल दरी बिछाई।
क्यों?
क्यूँकि चीन की जीडीपी 21 ट्रिलियन डॉलर हो गई है। ये दुनिया केवल शक्तिशाली को प्रणाम करती है और एकमात्र शक्ति आर्थिक शक्ति होती है। Moral highground वालो पे ये दुनिया …… भी नहीं है।
1987 में चीन की जीडीपी भारत से कम थी। क्यूँकि जनसंख्या अधिक थी तो प्रतिव्यक्ति आय भारत से बहुत कम थी।
फिर चीन ने कहा कि जो बिल्ली चूहे पकड़ेगी उसी को हम पालेंगे। आवश्यक नहीं कि उसका रंग लाल ही हो। उसने SEZ बनाये और कहा कि इनमें चीन का कोई ओद्योगिक या श्रमिक क़ानून लागू नहीं होगा। बनाओ और बेचो, और जिसको वहाँ अच्छा लगे, वो नौकरी करे, सरकार बीच में नहीं पड़ेगी।
परिणाम सामने है। ट्रम्प जी बिछे जा रहे है।
हम 1991 में दिवालिया हुए तो थोड़ा अर्थव्यवस्था को मुक्त किया। उसी का परिणाम है आज थोड़ा ढंग से खा रहे है, बिना फटे हुए कपड़े पहनते है। लेकिन उससे आगे नहीं बढ़ पाए।
क्यूँकि आज भी भारत में आप उद्योग लगाने जाएँगे तो 150 से अधिक परमिशंस, क्लीयरेंस लगेंगे, उसके बाद भी 58 इंस्पेक्टर है जो आपकी फैक्ट्री बंद करा सकते है, यूनियन वाले आपकी फैक्ट्री जला सकते है, रंगदार हफ्ता ना देने पर आपको गोली मार सकता है, NGT, MoEF, या कोई कोर्ट आपकी फैक्ट्री पर ताला जड़ सकता है, और लगभग 70000 compliances आपको हर वर्ष फाइल करनी है जिनमें चालीस प्रतिशत ऐसी है कि फाइल करना भूल गए तो आपको जेल हो सकती है।
हमने कुछ SEZ भी बनाये थे। क्लीयरेंसस नहीं मिली, बंद हो गए।
अर्थव्यवस्था को मुक्त करने को कहो तो लाल झंडे वाले व केसरिया झंडे वाले, दोनों वामपंथी भड़क जाते है क्यूँकि दोनों मानते है कि money corrupts.
मौसम बदले, ना बदले नसीब…….
@narendramodi@AmitShah@nsitharaman@HMOIndia@PMOIndia@FinMinIndia
देश की आजादी से लेकर अबतक रुपए में डॉलर के मुकाबले कितनी गिरावट आई है??
1947— नेहरू जी — ₹3.30/USD
1970— इंदिरा गांधी — ₹7.50/USD
1980— चौधरी चरण सिंह — ₹7.86/USD
1990— VP सिंह/चंद्रशेखर — ₹17.50/USD
2000— अटल बिहारी बाजपेयी — ₹44.94/USD
2010— मनमोहन सिंह — ₹45.73/USD
2020— नरेंद्र मोदी — ₹76.38/USD
2026— नरेंद्र मोदी — ₹95.9/USD
जब जब देश में गैर कांग्रेस सरकार आईं है तब तब रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है।