एक बार जर्मनी में एक यहूदी कवि गिरफ़्तार किए गए.
3 साल की बेटी ने माँ से पूछा -पापा को पकड़ कर क्यों ले गये?
माँ बोली - पापा ने हिटलर के ख़िलाफ़ कविता लिखी है।
बच्ची बोली - वो भी पापा के ख़िलाफ़ कविता लिख देता।
माँ ने कहा – वो लिख पाता तो इतना खून ख़राबा क्यों करता!
सांसद महोदय को अपने बेटे के परीक्षा केंद्र देर से पहुँचने का दर्द महसूस हुआ, लेकिन काश यही संवेदनशीलता नीट पेपर लीक से प्रभावित लाखों छात्रों और उनके परिवारों के लिए भी दिखाई देती।
जनप्रतिनिधि से अपेक्षा यही होती है कि वह हर छात्र के दर्द को अपना दर्द समझे, सिर्फ अपने घर का नहीं।
लाठी
लाठी पड़ी
और सतीश बेहोश हो गया।
बेहोशी में सपने का कोई नियम नहीं होता,
सो सपना आया।
सपने में वही सड़क थी,
वही भीड़, वही नारे,
बस सतीश इस बार
भीड़ में नहीं था।
वर्दी में था,
और उसके हाथ की लाठी
किसी की पीठ पर उतर रही थी
जो वेकेंसी नहीं निकलने पर
गुस्से से लाल था।
होश आया
तो पीठ पर निशान थे
और आंखों में करियर।
सतीश अब और मेहनत करेगा।
सुबह चार बजे उठेगा,
और दौड़ लगाएगा
करंट अफ़ेयर्स रटेगा।
इंक़लाब के लिए नहीं
एक ख्वाब के लिए।
लाठी के इस पार से
उस पार हो जाना है,
बैरिकेड क्रॉस करने वालों
पर जम कर लट्ठ बजाना है।
मिलिए कुछ ज्यादा पढ़े लिखे लोगो के फिलॉसफर गुरुजी आचार्य प्रशांत किशोर से भाई सुट्टा, गांजा, बाकी अन्य काम करके ऊब चुके थे।
उसके बाद इन्होंने महिलाओ को दुबली कुचली बता कर उनकी भावनाओ से खेल कर अपना बढ़िया मार्केट सेट कर लिया।
अब भागवत गीता के नाम पर अपनी फिलॉसफी सेट कर रहे है।
गाड़ी में पेट्रोल डलवा के मंदिर गया था जिससे पेपर अच्छा जाए लेकिन पेपर लीक हो गया, गाड़ी खराब हो गयी और मंदिर में चढ़ाया पैसा चोरी हो गया।
सबका मालिक एक है।