साय सरकार बच्चों को स्मार्ट क्लास से जोड़ रही है, इसीलिए कांग्रेस को पीड़ा हो रही है, क्योंकि इन्हें छत्तीसगढ़ के बच्चों की नहीं बल्कि अपने बच्चों की चिंता है बस
मुख्यमंत्री साय जी की बातें सुनिए और छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर देखिए।
दावों में सब कुछ चकाचक है, लेकिन जमीन पर बच्चे शिक्षक और बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान हैं।
झूठ के दावे चाहे जितने गढ़िए, जमीन की तस्वीरें सच छिपने नहीं देतीं।
राज्य सरकार का प्रदेश की सड़कों पर टोल वसूलने का फैसला जनता पर अतिरिक्त बोझ डालने वाला है।
यदि, जिला और ब्लॉक स्तर की सड़कों पर भी टोल लिया जाएगा तो आम लोग आवागमन कैसे करेंगे?
वहीं, ‘हमर लैब’ जैसी मुफ्त स्वास्थ्य सेवाओं को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है और दवाइयों की सप्लाई में भी टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
कोल रॉयल्टी में भी करीब ₹6,000 करोड़ की राशि निजी उद्योगपतियों को वापस किए जाने का आरोप है।
कुल मिलाकर, सरकार की नीतियां जनता के हितों के बजाय निजी हितों को बढ़ावा दे रही हैं।
स्कूलों में नेटवर्क की समस्या के कारण शिक्षक उपस्थिति दर्ज कराने के लिए परेशान हैं। वहीं, कई स्कूल एकल शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं।
शिक्षा विभाग में ट्रांसफर को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कभी 3, कभी 5 तो कभी 10 शिक्षकों की सूची जारी हो रही है।
रिपोर्ट कार्ड बनाने से पहले सरकार को शिक्षकों की कमी, नेटवर्क और ट्रांसफर व्यवस्था सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।
जब भी बात दिमाग लगाने की हो, तो उसमें कांग्रेसी सबसे पीछे खड़े दिखते है, इसीलिए भूपेश काका भी अपने बेवकूफ शहज़ादे के सामने नंबर बढ़ाने के लिए कुछ भी झूठ बोल रहे हैं
महिलाओं को दबाने का माइंडसेट मनुस्मृति से आता है और आज हमारी लड़ाई इसी माइंडसेट से है।
BJP-RSS के लोग चाहते हैं कि लड़कियां/महिलाएं पिंजरे में बंद रहें।
लेकिन हम ऐसा हिंदुस्तान नहीं चाहते। हम चाहते हैं कि सम्मान सभी का हो।
: नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi जी
📍 पुणे, महाराष्ट्र
भाजपा के राज में भ्रष्टाचार और अधिकारी राज हद से ज्यादा बढ़ गया है, जिससे छत्तीसगढ़ की जनता परेशान है।
धमतरी में वन मंडल कार्यालय का भवन महज आठ महीने में ही दरकने लगा है, जिसका लोकार्पण खुद वर्तमान वन मंत्री ने किया था।
वहीं, वन मंडल अधिकारी का तो आतंक है। वे न किसी कलेक्टर की मानते हैं और न ही उच्च अधिकारियों की।
जब अधिकारी ही मनमानी करें और भवन आठ महीने में दरकने लगे तो जिम्मेदारी किसकी है? ऐसी स्थिति के लिए वन मंत्री जी बधाई के पात्र हैं।