साल 2013 की बात है. मैं ‘आजतक’ न्यूज़ चैनल में हुआ करता था. तब कभी-कभी किसी पॉलिटिकल शो के सिलसिले में तत्कालीन सत्ताधारी काँग्रेस के सीनियर लीडर्स से मिलना हो जाता था. उस दौरान एक बात लगभग सभी बड़े नेताओं में नोट कर रहा था~ ‘9 साल सत्ता में रहने के बाद लगभग सभी में बला का arrogance आ गया था, एक ठसक सी आ गई थी.’ उन्हें लगने लगा था कि ‘अब उनका तख़्त कोई नहीं हिला सकता, कोई है ही नहीं, जो उन्हें तख़्त से उतारे.’ पर ऐसा नहीं हुआ. वे लोकतंत्र के हाथों खदेड़े गए और बेहतरीन तरीक़े से खदेड़े गए.
आज की सत्ताधारी बीजेपी को भी 9 साल हो गए हैं. वही arrogance, वही ठसक इस सरकार के सीनियर्स में भी दिखने लगी है. वही, इनकी देखा-देखी, नीचे काम कर रहे कार्यकर्ताओं में भी आ गई है. इन्हें लगने लगा है कि ‘अब इनका तख़्त कोई नहीं हिला सकता, कोई है ही नहीं, जो इन्हें उनके तख़्त से उतारे.’ पर ऐसा नहीं है.
यह देश सिर्फ़ ‘नेत्रहीन समर्थकों’ का ही देश नहीं है, बल्कि सोचने-समझने वाले नागरिकों का देश भी है. यदि यही arrogance, यही ठसक बरक़रार रही तो प्रजातंत्र के हाथों यह भी खदेड़े जाएँगे और बेहतरीन तरीक़े से खदेड़े जाएँगे. याद रहे, कई राज्यों में खदेड़े भी गए हैं. क्योंकि यह देश आज भी लोकतंत्र की ताक़त और उसकी मज़बूत बुनियाद पर खड़ा है. इसकी ज़मीन के नीचे की हलचल कभी-कभी धरातल के शोर में दब जाती है, पर जब यही हलचल तेज़ हो जाती है तो फिर धरातल पर सिर्फ़ बदलाव आता है और कुछ नहीं.
स्मरण रहे कि हम जिस संसार में रहते हैं उसे ‘जगत्’ भी कहते हैं, जहाँ सब कुछ गतिमान है. कुछ भी ठहरा हुआ या स्थायी नहीं. सबको चलते रहना है. यहाँ देह से दुनिया तक, चला-चली का अद्भुत चलन है, और इस चलन में जो ठीक से नहीं चलेंगे, वे एक दिन चलते कर दिए जाएँगे. जय हिन्द. 🇮🇳
द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने महाकाल लोक की घटना को भ्रष्टाचार का उदाहरण बताते हुए घटना की जाँच व दोषियों को सज़ा की मांग की है।
देखना लाज़िमी है कि कांग्रेस पर राजनीति करने का आरोप लगाने वाली भ्रष्ट सरकार पूज्य शंकराचार्य की मांग पर क्या रुख अपनाती है!
शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती का बयान :
महाकाल लोक में सप्तऋषियों की मूर्तियां क्षतिग्रस्त होने पर शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी ने कहा - जो हुआ उससे यह साफ है कि महाकाल लोक के निर्माण में बड़ा भ्रष्टाचार हुआ है। इसकी जाँच होनी चाहिए और भ्रष्टाचार करने वालों को सजा मिलनी चाहिए।
शिवराज जी,
आपका अधर्म अब सबके सामने है।