नरेंद्र मोदी जी भारतीय इतिहास के सबसे बुरे प्रधानमंत्री हैं...??
○ हाँ, मैं सहमत हूँ
○ नहीं, मैं असहमत हूँ
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@ishita_9529 जब तक गुजारे भत्ते और एलुमनी बंद नहीं होगी तब तक तलाक़ भी बन्द नहीं होगें क्योंकि पैसे लड़की के घरवालों को चाहिए होते हैं सारी भूमिका उन्हीं की होती है
वाय ही इज माई फेवरिट!!
तमाम चुनावी हार और सांगठनिक समस्याओं के बावजूद यह शख्स मेरा फेवरिट पोलटिशियन है।
लोग कहते है कि तुम्हे इसमे दिखता क्या है??
ओके, तो आज बताता हूँ, कि मुझे राहुल में क्या नजर आता है।
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गिनीज बुक वाले अगर चेक करें, तो पाएंगे, कि मानव इतिहास के 5000 साल मे, किसी का सबसे ज्यादा अपमान, लानत- मलामत की गई, तो वह शख्स राहुल है।
जबकि वे कोई हिटलर, चंगेज या ईदी अमीन नही। उसने कोई अमानवीय, अकरणीय काम नही किया।
कमी यही कि एक खास खानदान में जन्मे है। उन्हें हटाने, हिलाने, गिराने के लिए, एक वेल फंडेड, वेल कोर्डिंनेटेड, ऑर्गनाइज्ड कैम्पेन- बरसों बरस से जारी है। और भीतर की मजबूती देखिए..
बंदा हिलता नही।
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दुनिया मे कौन है जिसके पिता, माता, बहन, के साथ दादा, दादी, परनाना और लकड़नाना तक जाकर गालियां दी गयी।
पुरखो की गंदी कहानियां बनाई। और जवाब छठी पीढ़ी के बालक से मांगा???
अनप्रिसिडेंट इन ह्यूमन हिस्ट्री!!!
लेकिन यह शख्स हंसता रहता है। पलटकर जवाब नही दिया, तल्खी नही दिखाई। किसी के लिए मुंह से एब्यूज न निकाला, बदला नही चुकाया।
मोहब्बत की दुकान की बात करता है। गाली देने वालो को गले लगाता है। धोखा देने वालो को भी शुभकामनाएं देता है। ऐसे व्यक्ति से कोई नफरत कैसे कर सकता है?
मैं तो नही।
लेकिन कारण और भी है।
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आप इमरजेंसी को क्यो याद करते हैं, क्यो??
इसलिए कि राहुल डेमोक्रेटिक है।
अपनी मर्जी पर भी दूसरों की इच्छा चलने देते हैं। मित्रों की सुनते मानते हैं। सामने वाले की तानाशाही को जस्टिफाई करने के लिए यह कहना सम्भव नही कि- अरे, तुम खुद भी तो तानाशाह हो।
क्या करें? तो याद दिलाओ, इमरजेंसी..
"कि अरे, तुम नही तो क्या, तुम्हारी दादी तानाशाह थी"
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नेहरू की औरतों के साथ तस्वीरे लगाते हैं, क्यो?
क्योकि स्नूपिंग करने वाले, अपनी बीवी को छोड़, दूजी महिलाओं को गंदी निगाह से ताड़ने वाले नेता के बचाव में, आप ये नही कह सकते- कि राहुल, तुम भी तो चरित्रहीन हो!!
उसके दो दशक के राजनीतिक कॅरियर में चरित्रहीनता का लेशमात्र भी आरोप नही। अब अगर तुम चरित्रहीन नही- तो तुम्हारा परनाना तो था।
ये देख फेक फ़ोटो।
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1947 से लेकर बोफोर्स तक घोटालों की लम्बी सूची दिखाते है। क्यो??
इसलिए कि 2004 से लेकर केंद्र और राज्यो की तमाम सरकारों को एक फोन लगाकर, बड़े से बड़ा काम करवाने की हैसियत राहुल की थी-
एंड डोंट माइंड- 2014 के बाद भी है।
लेकिन ठेका, रुपया, कमीशन, आय से अधिक सम्पत्ति भ्रष्टाचार का चिन्दी भर भी आरोप राहुल पर नही। तब आप 1957 और 1987 के आरोप दोहराते हो- तू नही..
तेरा बाप तो करप्ट था।
अब अलग बात की वे केस भी हवाई निकले थे।
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आप 84 के दंगे याद करते हो-क्यो?
क्योकि UPA से लेकर अब तक MP, राजस्थान, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, हिमाचल जैसी सरकारे दंगामुक्त रही। झारखंड महाराष्ट्र में उसकी समर्थंक सरकारों पर भी दाग नही।
याने दंगाई संस्कृति के लोग, राहुल की सरकारों पर दंगापरस्त होने का आरोप नही लगा सकते।
तो जा- तेरा बाप तो दंगापरस्त था।
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जो अवगुण राहुल में नही, वो पुरखो में खोजे जाते हैं। और पुरखो पर इतने सारे अवगुण थोपे गए है, शायद कोई अपकर्म शायद बचा न होगा।
रिट्रोस्पेक्ट मे आप मान लें, की हर वो मानवीय, या राजनीतिक अवगुण, जिस जिसकी कोई कल्पना कर सकता है- एक भी राहुल में नही मिला।।
इनफैक्ट, बार बार नेहरू, इंदिरा, राजीव, औरंगजेब, गजनवी, गौरी, पृथ्वीराज चौहान के गीत गाने का मतलब ही यही है..
कि सामने खड़े राहुल में कोई कमी, तो उनके चैलेंजर्स भी नही खोज पा रहे।
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वो भी तब, जबकि ये लोग 12 साल से दिन रात राहुल के इर्द गिर्द आईबी, रॉ और फूल छाप कांग्रेसी घुसाकर निगरानी रखते है। पेगागस लगाकर उसके फोन तक में घुसे रहते है-
उन्हें अगर 12 साल के बाद भी कोई चारित्रिक, भ्रष्टाचार, पैसे के लेनदेन या और कोई भी लूज पॉइंट नही मिल सका। तो मान लीजिये कि ऐसे शख्स के जोड़ का मनुष्य ..
इस धरती पर तो मौजूद नही।
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ऐसे में भारतीय राजनीति के राक्षसी जंगल मे..
गन्दे दांतो, लम्बी दाढ़ी, और टकले सर वाले तमाम रक्तपिपासु दैत्यों के बीच, यदि कोई एक श्वेतवर्णी मुनि दिखाई देता है-
तो वह राहुल है। एंड दैट इज वाय
ही इज माई फेवरिट!!
❤️
हमारे राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों का चुनाव और निर्धारण करने में सबसे बड़ी भूमिका गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की थी। इसे संविधान सभा ने भी स्वीकार किया। इस पर सवाल उठाना न सिर्फ हमारे स्वतंत्रता आंदोलन के नायकों और महापुरुषों का अपमान है, बल्कि समूची संविधान सभा का अपमान है।
क्या आज सरकार में बैठे लोग इतने अहंकारी हो गए हैं कि वे अपने को महात्मा गांधी, नेताजी सुभाषचंद्र बोस, डॉ अंबेडकर, डॉ राजेंद्र प्रसाद जैसे महापुरुषों से भी बड़ा समझने लगे हैं?
जरूरी मुद्दों से देश का ध्यान भटकाने के लिए संसद में वंदे मातरम पर बहस की जा रही है क्योंकि यह सरकार इस देश के वर्तमान की असलियत छुपाना चाहती है। पेपरलीक, बेरोजगारी, आरक्षण, महंगाई, महिलाओं की और देश की तमाम समस्याओं पर संसद में चर्चा क्यों नहीं हो रही है? हिम्मत है तो वर्तमान की बातें कीजिए।
आप लोगों ने कॉमेडियन से रोस्ट करते खूब सुना देखा होगा लेकिन कभी साहित्य के मंच से प्रधानमंत्री का ऐसा रोस्ट नहीं सुना होगा !!
सीधे प्रधानमंत्री के ऊपर ऐसा रोस्ट वीडियो आज तक नहीं देखा सुना होगा।
हमारी बेरोज़गारी पर भाषण देता है प्रधानमंत्री, कि वह 18 घंटे काम करता है।
वीडियो 👇👇
दो भाई, वोट चोरों की तबाही!
वोटर अधिकार यात्रा में शामिल होकर, तेजस्वी, मुझे और INDIA गठबंधन के सभी नेताओं को अपना समर्थन देने के लिए आपका बहुत धन्यवाद @yadavakhilesh जी।