80वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं ढेरों शुभकामनाएं।
आइए, इस स्वतंत्रता दिवस पर हम केवल आज़ादी का उत्सव न मनाएँ, बल्कि एक मजबूत संकल्प भी लें, संविधान को मजबूत करेंगे, हर गरीब, शोषित, वंचित एवं कमजोर नागरिक के अधिकारों की रक्षा करेंगे और लोकतंत्र को दो दलों की जागीर नहीं बनने देंगे।
भारत का भविष्य हमारे युवाओं के हाथों में है। इसलिए हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए, कि हर युवा को शिक्षा, समान अवसर, कौशल और अपनी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ने का अधिकार मिले।
जय भीम, जय भारत
1. उत्तराखण्ड स्टेट के हल्द्वानी में अभी हाल ही में, कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खड़गे के हुये प्रोग्राम के बाद उनके मंच का दलित होने की वजह से शुद्धीकरण किया गया है। यह जानकारी कल संसद के ज़रिये भी देश को मिली है। यह मामला अति-निन्दनीय व चिन्तनीय है तथा वहाँ कि सरकार बिना कोई देरी किये हुये ऐसे जातिवादी एवं सामन्ती तत्वों के विरुद्ध सख़्त क़ानूनों के तहत् उचित कार्रवाई करके उन्हें जेल भेजे।
2. साथ ही, इस घटना आदि के सम्बंध में आर.एस.एस. के मुखिया को भी संज्ञान लेकर ज़रुर गंभीरता से सोचना चाहिये जो कि दलितों के आर्थिक तौर पर थोड़ा मज़बूत हुये लोगों को आरक्षण से वंचित करने की बात कर रहें हैं।
3. इसके इलावा, अभी हाल ही में महाराष्ट्र के नान्देड़ में शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख श्री सुखबीर सिंह बादल पर किये गये हमले की घटना भी अति-दुःखद व चिन्तनीय है। केन्द्र व महाराष्ट्र की सरकार इस घटना को पूरी गम्भीरता से लेते हुये दोषियों के विरुद्ध सख़्त क़ानूनी कार्रवाई करे।
बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) के कर्मठ, ईमानदार व पूरी तरह से वफादार बलिया की रसड़ा सीट से लोकप्रिय विधायक श्री उमाशंकर सिंह की आज शाम लम्बी बीमारी की वजह से इलाज के दौरान देहान्त हो जाने की ख़बर अति-दुखद। उनके परिवार तथा उनके सभी चाहने वालों के प्रति मेरी गहरी शोक संवेदना। पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा की जितनी भी तारीफ की जाये वह कम है। उनका पूरा परिवार बी.एस.पी. परिवार की तरह है तथा उनके परिवार के सभी लोग मुझे बड़ी बहन की तरह ही पूरा आदर-सम्मान देते हैं।
उनके पुत्र से लगातार सम्पर्क बने रहने के दौरान ही आज शाम उनके देहान्त की ख़बर उनके पुत्र से ही मिली। इस दुख की घड़ी में मैं व पूरी पार्टी उनके व उनके परिवार के साथ है तथा उन्हें किसी भी प्रकार से हिम्मत नहीं हारना है बल्कि इस परिस्थिति का सामना करते हुये आगे बढ़ना है। कुदरत उन सभी लोगों को इस दुख को सहन करने की शक्ति दे।
दिनांक 11.07.2026 : जैसाकि सर्वविदित है कि बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी), दूसरी पार्टियों की तरह अपना राजनीतिक व चुनावी स्वार्थ साधने के लिये धरना-प्रदर्शन, सड़क जाम, हल्लाबोल, सरकारी व प्राइवेट सम्पत्तियों के तोड़फोड़ व दूसरी हिसंक घटनाओं तथा हवाहवाई वादों-दावों एवं मिथ्या प्रचार-प्रसार आदि के माध्यम से जनता को गुमराह करने आदि में विश्वास नहीं करती है।
अर्थात् बी.एस.पी. ऐसी तमाम राजनीतिक व चुनावी चालबाज़ियों से पूरी तरह से पाक-साफ देश की एकमात्र ऐसी अम्बेडकरवादी पार्टी है जो ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ के सिद्धान्त व नीति पर चलकर यहाँ सर्वसमाज में भी ख़ासकर ग़रीबों, मज़दूरों, शोषितों-पीड़ितों व उपेक्षितों के हित व कल्याण हेतु समर्पित है, और जिसका जीता-जागता प्रमाण यहाँ उत्तर प्रदेश में बी.एस.पी. के नेतृत्व में चार बार रही सरकार में व्यापक जनहित, जनकल्याण व विकास का तथा अपराध-नियंत्रण व क़ानून-व्यवस्था के मामलों में ’क़ानून द्वारा क़ानून का बेहतरीन राज’ रहा है।
इससे यहाँ यूपी जैसे विशाल राज्य में एक आदर्श संवैधानिक सरकार देने के साथ-साथ यह भी सूरज की रौशनी की तरह पूरी तरह से स्पष्ट है कि बी.एस.पी., विरोधी पार्टियों व उनके इशारे पर चलने वाले दलित संगठनों व पार्टियोें आदि की तरह छल व छलावा की राजनीति तथा उनके लिये मगरमच्छ के आँसू नहीं बहाती और ना ही संकीर्ण स्वार्थ हेतु गिरगिट की ही तरह रंग बदलती है, बल्कि करोड़ों दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों, मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ-साथ अपरकास्ट समाज के ग़रीबों के वास्तविक हित व कल्याण के लिये ’बहुजन समाज’ में समय-समय पर जन्मे महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों में भी ख़ासकर महात्मा ज्योतिबा फुले, श्री नारायणा गुरु, राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज, परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर व बहुजन नायक मान्यवर श्री कांशीराम जी के बताये रास्तों पर चलकर मुख्यतः सत्ता की मास्टर चाबी के माध्यम से ’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक उत्थान’ का महान लक्ष्य हासिल करना चाहती है।
और अब यहाँ ख़ासकर उत्तर प्रदेश विधानसभा के आगामी आमचुनाव में बी.एस.पी के प्रभाव को तेज़ी से आगे बढ़ता हुआ देखकर विरोधी पार्टियाँ में द्वेष व बेचैनी स्वाभाविक है और इसीलिये वे अपने साम, दाम, दण्ड, भेद आदि हथकण्डों के तहत् कुछ दलित संगठनों व पार्टियों आदि को आगे करके दलित व बहुजन समाज के अन्य विभिन्न अंगों को तरह-तरह से भटकाने व गुमराह करने में लगे हुये हैं,
जबकि शोषितों-पीड़ितों व उपेक्षितों को अच्छी तरह से मालूम है कि ’मा. बहन कुमारी मायावती जी’ के नेतृत्व वाली सरकार ही उनकी सभी राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक समस्याओं का उसी प्रकार से बेहतरीन निदान है जैसाकि उनकी सभी सरकारों में होता रहा है जब सत्ता की शक्ति, संसाधन व ऊर्जा तथा सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल भी हर स्तर पर सबके साथ न्याय एवं सबको न्याय दिलाने के लिये समर्पित व तत्पर रहा।
साथ ही, चुनाव नज़दीक आता देख विरोधी पार्टियाँ अपने हथकण्डों आदि के साथ-साथ दलित संगठनों व गुलाम मानसिकता रखने वाले लोगों के कंधे पर बंदूक रखकर बी.एस.पी. व बाबा साहेब के मूवमेन्ट-विरोधी राजनीतिक स्वार्थ का अपना खेल आगे बढ़ाना चाहती हैं, जिससे सर्वसमाज के लोगों को व विशेषकर दलित एवं ’बहुजन समाज’ के सभी लोगों को बहुत ही ज़्यादा सचेत व सतर्क रहने की ज़रूरत है ताकि विरोधियों केे नापाक इरादे सफल ना हों सकें।
इसको लेकर बी.एस.पी. की असली चिन्ता यही है कि सर्वसमाज के ग़रीब, मज़दूर व बेरोज़गार नौजवान आदि के साथ-साथ समाज के शोषित-पीड़ित व अन्य उपेक्षित लोग, अपनी समस्याओं को लेकर सड़क पर उतरने के क्रम में सरकारी द्वेष, उत्पीड़न व आतंक आदि का शिकार ना बनने पायें,
क्योंकि नौजवान अगर सरकारी ज्यादती के कारण यदि मुकदमा व जेल आदि में उलझ जायेंगे तो इससे उनका भविष्य ख़तरे में पड़ जाने की आशंका है तथा अगर परिवार का मुखिया इन चक्कर में पड़ जायेगा तो उनका घरबार तबाह हो जायेगा और उनके पूरे परिवार के इस प्रकार से अंधकार में डूब जाने का खतरा है, जो बी.एस.पी. कतई भी नहीं चाहती है, क्योंकि बी.एस.पी. का अम्बेडकरवादी मिशन प्रभावित हो सकता है जो कि विरोधियों की असल चाल है।
इसके साथ ही, सर्वविदित है कि दलित-विरोधी सहारनपुर काण्ड में जातिवादी, सामंती व सरकारी आतंक के विरुद्ध बी.एस.पी. व उसके नेतृत्व ने सड़क से लेकर संसद तक में जबरदस्त लड़ाई लड़ी, किन्तु संसद में भी इसका सही से निदान नहीं मिलने के विरोध में तब बी.एस.पी. नेतृत्व ने, दलितों व अन्य पिछड़ों आदि के हक की अनदेखी करने पर परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर द्वारा देश के पहले कानून मंत्री पद से इस्तीफा देने का अनुसरण करते हुये, राज्यसभा से ही इस्तीफा दे दिया था कि जब संसद में भी हमारी बात नहीं सुनी जाती है तो ऐसी संसद में रहने का फायदा ही क्या?
इस प्रकार यह उन जबरदस्त उदाहरणों में एक है जो बी.एस.पी. नेतृत्व ने अपने संघर्ष के क्रम में दिया है अर्थात् स्पष्ट है कि बी.एस.पी. को अपनी तरह ही मगरमच्छ के आँसू बहाने की सलाह देेने वाले संकीर्ण स्वार्थी लोग विरोधी पार्टियों के जातिवादी व विशैले षडयंत्र का शिकार ना बनें तो यह बेहतर होगा।
वैसे भी सभी जानते हैं कि मान्यवर श्री कांशीराम जी ने बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) का गठन देश में जाति के आधार पर सदियों से सताये, तोड़े व पछाड़े गये उन लोगों को ’बहुजन समाज’ को आपसी भाईचारा के आधार पर एकता में जोड़कर राजनीतिक शक्ति अर्थात् ’’हुकमरान जमात’’ बनाने के लिये इसलिये किया था ताकि इन वर्गों के मसीहा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के सत्ता की मास्टर चाबी के माध्यम से आत्म-सम्मान व स्वाभिमान मूवमेन्ट को मंज़िल तक पहुँचाया जा सके, और यह क्रम लगातार जारी है, जिसकी राह में रोड़ा बनकर खड़ा होना बी.एस.पी के मिशन 2027 को प्रभावित करने का घोर बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर-विरोधी अनुचित कृत्य होगा। जय भीम, जय भारत।
आज छत्रपति राजर्षि शाहू जी महाराज की जयंती है, एक ऐसे महापुरुष को याद करने का दिन, जिन्होंने अपने समय से बहुत आगे की सोच रखी।
1902 में, जब देश का बड़ा हिस्सा जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता से जूझ रहा था, तब शाहू जी महाराज ने पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण लागू कर यह साबित किया कि सत्ता का असली उद्देश्य समाज के आख़िरी पंक्ति में खड़े व्यक्ति को भी न्याय दिलाना होता है, न कि केवल कुछ लोगों के हितों की रक्षा करना।
मैं मानता हूँ कि हर पीढ़ी को बराबरी की लड़ाई अपने तरीक़े से लड़नी होती है। शाहू जी महाराज ने अपनी पीढ़ी की लड़ाई पूरी ईमानदारी से लड़ी। आज जब संविधान, आरक्षण और समान अवसर जैसे सवालों पर बहसें फिर से तेज़ हैं तो उनका जीवन हमें याद दिलाता है कि लोकतंत्र की ताक़त उसके सबसे ऊँचे पदों से नहीं, उसके सबसे आख़िरी नागरिक के साथ हुए व्यवहार से मापी जाती है।
आज सिर्फ़ श्रद्धांजलि देना काफ़ी नहीं है। उनके अधूरे काम को आगे बढ़ाना हर वंचित और पिछड़े व्यक्ति तक शिक्षा, सम्मान और बराबर अवसर पहुँचाना ही शाहू जी महाराज के लिए हमारी असली श्रद्धांजलि होगी।
छत्रपति राजर्षि शाहू जी महाराज को मेरा कोटि कोटि नमन।
यूपी की राजधानी लखनऊ के पड़ोसी ज़िला हरदोई में एक सरकारी अधिकारी शाहाबाद के एसडीएम श्री सुशील मिश्रा पर सरकारी निरीक्षण के दौरान दबंगों द्वारा ईंट व पत्थर आदि से किया गया जानलेवा हमला तथा उसमें उनके घायल होकर इलाज के लिये अस्पताल में भर्ती होने की ख़बर है, जो दुर्भाग्यपूर्ण ही नहीं बल्कि अति-चिन्ताजनक भी है। ऐसी घटनाओं की रोकथाम ज़रूरी है ताकि सरकारी कार्यों में कथित भ्रष्टाचार के साथ-साथ प्रदेश को अराजक तत्वों से बचाया जा सके। सरकार व्यापक जनहित के मद्देनज़र, इस ओर ज़रूर समुचित ध्यान दे।
ईद अल अज़हा, अर्थात् आम बोलचाल की ज़ुबान में बक़रीद पर्व की दुनिया भर में रहने वाले सभी भारतीय मुस्लिम भाई-बहनों व उनके परिवार वालों को दिली मुबारकबाद तथा उनके साथ-साथ समस्त देशवासियों के ख़ुश व ख़ुशहाल ज़िन्दगी की शुभकामनायें।
सभी पर्व व त्योहार आदि पूरी शान्ति, आपसी सौहार्द और भाईचारे के साथ गुज़रे तो यह देश व जनहित में हमेशा बेहतर, ताकि देश-प्रदेश के विकास व यहाँ के लोगों की तरक़्क़ी पर पूरी ऊर्जा, शक्ति व संसाधन लग सके, जैसाकि बी.एस.पी. की यहाँ यूपी में रही चारों सरकारों में हमेशा से सभी सरकारों में दुर्लभ रही ’’क़ानून द्वारा क़ानून का राज’’ के तहत् पूरी तरह से सर्वसमाज-हितैषी ’सर्वजन हिताय व सर्वजव सुखाय’ की बेहतरीन सरकार रही।
माननीय प्रधानमंत्री जी की हालिया अपील ऐसे समय आई है जब देश की अर्थव्यवस्था पहले से ही दबाव में है। पिछले तीन महीनों में हमारा विदेशी मुद्रा भंडार लगभग $38 अरब घटकर मात्र $690 अरब रह गया है। रुपया डॉलर के मुक़ाबले ₹95 पार कर चुका है, और व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है। ये केवल आँकड़े नहीं हैं, ये करोड़ों परिवारों की रोज़मर्रा की चिंता हैं।
मैं मानता हूँ कि मौजूदा हालात में अर्थव्यवस्था चलाना आसान काम नहीं है, और दुनिया भी एक कठिन दौर से गुज़र रही है।
ऐसे समय में सरकार का ध्यान मांग बढ़ाने पर होना चाहिए, मांग घटाने पर नहीं। दुनिया का आर्थिक इतिहास हमें एक सीधी बात सिखाता है कि जब आर्थिक गति धीमी हो, तब लोगों से कम खर्च करने को कहना समाधान नहीं होता, समाधान यह है कि टैक्स में राहत देकर, छोटे व्यापारियों को सहारा देकर, मध्यम वर्ग पर बोझ कम कर आम परिवारों के हाथ में थोड़ा ज़्यादा पैसा छोड़ा जाए।
मुझे दुख इस बात का है कि हर बार किफ़ायत की ज़िम्मेदारी उसी ईमानदार करदाता पर आ जाती है जिसने कोविड के समय भी सबसे ज़्यादा सहा। उसने उस वक़्त भी पूरे भरोसे से अपनी भूमिका निभाई थी, तब भी उसके लिए राहत सीमित थी, और आज फिर उसी को बलि का बकरा बनाया जा रहा है और वो भी बिना ये बताए कि सरकार अपनी ओर से उसके लिए क्या करने जा रही है।
केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को रेवडियां बांटने वाली नीतियों पर तुरंत रोक लगानी होगी ताकि सरकारी खजाने पर बोझ कम हो सके। अगर सरकारें fiscal dicipline और productive capital creation पर ध्यान नहीं देंगी, तो थोड़े समय का राजनीतिक लाभ देश को लंबी आर्थिक कीमत चुकाने पर मजबूर करेगा।
देश को अपील नहीं, एक स्पष्ट रास्ता चाहिए। लोग जानना चाहते हैं विकास कैसे लौटेगा, नौकरियाँ कैसे बढ़ेंगी, और किसानों, छोटे व्यापारियों व मध्यम वर्ग को असली राहत कब मिलेगी।
सिर्फ़ नागरिकों से त्याग माँगना शासन नहीं होता। जवाबदेही, दूरदृष्टि और आर्थिक संतुलन यही असली राष्ट्रहित है।
आज बुद्ध पूर्णिमा के अति पावन अवसर पर समस्त देशवासियों, विशेषकर बहुजन समाज के हमारे भाई-बहनों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
तथागत गौतम बुद्ध का जीवन हम सभी को करुणा, समता, शांति और मानवता के मार्ग पर चलने का संदेश देता है। बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने भी भगवान बुद्ध के धम्म को अपनाकर शोषित-पीड़ित समाज को सम्मान से जीने की राह दिखाई थी।
आज के दौर में जब समाज में नफरत, अन्याय और गैर-बराबरी फैलाने वाली शक्तियाँ सक्रिय हैं, तब भगवान बुद्ध की शिक्षाएं और भी प्रासंगिक हो जाती हैं। आज जरूरत है कि हम संवाद, न्याय और भाईचारे को मजबूत करें।
आइए, हम सब मिलकर भगवान बुद्ध के बताए मार्ग पर चलते हुए एक ऐसे भारत के निर्माण का संकल्प लें, जहाँ समाज के हर व्यक्ति को सम्मान, बराबरी और समान अवसर मिले।
जय भीम, नमो बुद्धाय।
मा॰ बहन जी का हर आदेश मान्य है।
मा॰ बहन जी जिंदाबाद
मा॰ आनंद कुमार जी जिंदाबाद
मा॰आकाश आनंद जी जिंदाबाद
पाँचवी बार बसपा सरकार
जय भीम जय भारत जय कांशीराम जय भगत सिंह जय बसपा।
1. देश के SC, ST व OBC समाज के संवैधानिक/क़ानूनी अधिकारों आदि के मामले में, कांग्रेस भी गिरगिट की तरह अपना रंग बदलने वाली यह पार्टी भी, महिला आरक्षण में, जो अब इन वर्गों की बात कर रही है, तो यही कांग्रेस पार्टी है जिसने अपनी केन्द्र की सरकार के रहते हुये किसी भी क्षेत्र में इनके आरक्षण के कोटे को पूरा कराने की कभी पहल नहीं की है।
2. तथा ना ही OBC समाज हेतु मण्डल कमीशन की रिपोर्ट के हिसाब से उन्हें सरकारी नौकरी व शिक्षा के क्षेत्र में 27 प्रतिशत आरक्षण को भी लागू किया, जिसे फिर BSP के अथक प्रयासों से पूर्व प्रधानमंत्री श्री वी.पी. सिंह की सरकार में अनततः लागू किया गया था, जो सर्वविदित है।
3. इसी प्रकार, यू.पी. में पिछड़े मुस्लिमों को OBC का लाभ देने के लिए, पिछड़ा वर्ग आयोग की जुलाई 1994 में ही आई रिपोर्ट को भी सपा सरकार ने ठण्डे बस्ते में डालकर इसे लागू नहीं किया था, जिसे फिर यहाँ बी.एस.पी. की दिनांक 3 जून सन् 1995 में पहली बनी सरकार ने इसे तुरन्त लागू किया, जो कि अब यही सपा अपना रंग बदलकर अपने राजनैतिक स्वार्थ में इनकी महिलाओं को अलग से आरक्षण देने की बात कर रही है।
4. इस प्रकार, अन्य मामलों की तरह इस मामले में भी सपा जब सरकार में नहीं है तो अलग रवैया अपना रही है, किन्तु जब सरकार में होती है तो अलग संकीर्ण जातिवादी व तिरस्कारी रवैया अपनाती है। अतः इन सभी वर्गों को ऐसी सभी छलावा एवं दोहरे चरित्र वाली पार्टियों से हमेशा सावधान रहना होगा, तभी कुछ बेहतर संभव हो पायेगा।
5. जहाँ तक महिला आरक्षण के लिए पिछली (सन् 2011) जनगणना के आधार पर परिसीमन करने का सवाल है, तो इस बारे में यही कहना है कि यदि इसे जिन भी कारणों से जल्दी लागू करना है तो फिर इसी जनगणना के आधार पर करना है और यदि वर्तमान में कांग्रेस पार्टी केन्द्र की सत्ता में होती तो फिर यह पार्टी भी बीजेपी की तरह ही यही क़दम उठाती।
6. कुल मिलाकर, कहने का तात्पर्य यह है कि देश में SC, ST व OBC एवं मुस्लिम समाज के वास्तविक हित, कल्याण व उनके भविष्य संवारने आदि के किसी भी मामले में कोई भी पार्टी गम्भीर नहीं रही है।
7. इसीलिये महिला आरक्षण के मामले में इन वर्गों को अभी जो कुछ भी मिलने वाला है तो उसे इनको फिलहाल स्वीकार कर लेना चाहिये और इस मामले में आगे अच्छा वक्त आने पर इनके हितों का सही से पूरा ध्यान रखा जायेगा अर्थात् इन्हें किसी के भी बहकावे में नहीं आना है क्योंकि इनको खुद अपने पैरों पर खड़े होकर अपने समाज को आत्मनिर्भर एवं मजबूत बनाना है। यही सलाह है।
देश में सामाजिक परिवर्तन के पितामह महात्मा ज्योतिबा फुले जी को आज उनकी जयंती पर मैं कोटि कोटि नमन व अपार श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं।
ज्योतिबा फुले जी ने जो मशाल जलाई है उसे बाबा साहेब ने और आदरणीय बहन जी ने नई ऊंचाई दी है। लेकिन स्वार्थी राजनीतिक दलों ने हमारे महापुरुषों को अपने जातिवादी द्वेष की वजह से इनके सम्मान में बने जिलों का नाम बदल दिया। ऐसे स्वार्थी लोगों से सावधान रहना है।
जय भीम, जय भारत
देश में सामाजिक परिवर्तन के पितामह के रूप में प्रसिद्ध ’बहुजन समाज’ में अति-पिछड़े वर्ग में जन्मे महात्मा ज्योतिबा फुले को आज उनकी जयंती पर मेरे व बी.एस.पी. की ओर से भी शत्-शत् नमन व अपार श्रद्धा सुमन अर्पित।
ख़ासकर शिक्षा के माध्यम से स्त्री/नारी शक्ति के प्रणेता के रूप में महात्मा ज्योतिबा फुले व उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले का नाम इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। महात्मा ज्योतिबा फुले के शब्दों में ’’विद्या बिना मति गयी, मति बिना नीति गयी। नीति बिना गति गयी, गति बिना वित्त गया। वित्त बिना शुद्र हताश हेये, और गुलाम बनकर रह गये।’’ अर्थात यह सब कुछ शिक्षा के अभाव में हुआ और इसीलिये आगे चलकर परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने इनसे प्रेरित होकर शिक्षा की तरफ विशेष ध्यान दिया।
साथ ही, उन्नीसवीं सदी के मध्य में दलितों व शोषितों की मुक्ति के लिये महात्मा ज्योतिबा फुले के ज़बरदस्त प्रयासों के कारण अकेले पुणे में ही नहीं बल्कि पूरे महाराष्ट्र में सामाजिक परिवर्तन की नई अलख जगी और विशेषकर नारी मुक्ति व सशक्तिकरण का ऐतिहासिक कार्य शुरू हुआ, जिस संघर्षों के लिये उनकी जितनी भी सराहना व प्रशंसा की जाये वह कम है।
ऐसे अति-पिछड़े/ओबीसी समाज के महापुरुष की स्मृति व उनके सम्मान में मेरी बी.एस.पी. सरकार द्वारा अनेकों कार्य यहाँ यूपी में किये गये जिनमें अमरोहा को नया ज्योतिबा फुले नगर ज़िला बनाना शामिल है, किन्तु सपा सरकार ने इसे भी अपनी संकीर्ण राजनीति व जातिवादी द्वेष आदि के कारण इसका नाम भी बदल डाला।
उल्लेखनीय है कि बी.एस.पी की सरकार द्वारा कासगंज को कांशीराम नगर ज़िला बनाने के साथ-साथ कानपुर देहात को रमाबाई नगर, संभल को भीमनगर, शामली को प्रबुद्ध नगर व हापुड़ को भी पंचशील नगर के नाम से नया ज़िला बनाया था, जिसे सपा सरकार ने ज़िला तो बनाये रखा लेकिन इन सभी ज़िलों के नामों को बदल डाला, यह है इनके पीडीए का अति-दुखद चाल, चरित्र व चेहरा।
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री बहन @Mayawati जी के निर्देशानुसार जिला स्तरीय बैठक औरैया!
बैठक में उमड़ा जनसैलाब !
मुख्य अतिथि Ex विधायक/एम एल सी कानपुर मुख्य मंडल प्रभारी मा. @Ambedkar153 जी का भव्य स्वागत है
14 अप्रैल डॉ भीमराव अम्बेडकर जी की जयंती पर लखनऊ चलो
भारत ने दुनियाँ को बुद्ध दिए हैं, युद्ध नहीं. बहन कुमारी @Mayawati जी द्वारा लखनऊ में बनवाये गये बौद्ध विहार शांति उपवन में स्थापित बहुजन महापुरुषों की प्रतिमायें यही संदेश दे रही हैं.
सामाजिक परिवर्तन की महानायिका,हम सबकी आदर्श, प्रेरणास्त्रोत, मार्गदर्शक उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रही, पूर्व सांसद व बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय बहन कु. @mayawati जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई।
बहुजन मिशन के लिए अपना जीवन समर्पित कर चुकी आदरणीय बहन कु मायावती जी ने दलितों,पिछड़ों और कमजोर वर्ग को स्वाभिमानी जीवन जीने का रास्ता दिखाया है। बहन जी के शासन में गरीब, शोषित, वंचित लोगों को आर्थिक रुप से सशक्त किया गया।
बहन जी की सरकार में कभी भी किसी जाति विशेष को देखकर कार्यवाही नहीं होती थी इसीलिए आजतक देश के लोग बहन जी के गवर्नेंस मॉडल की मिसाल देते हैं।
यही वजह है कि हम सभी हर वर्ष 15 जनवरी को आदरणीय बहन कु मायावती जी का जन्मदिन
#जन_कल्याणकारी_दिवस के रूप में मनाते हैं।
जय भीम, जय भारत
समस्त देशवासियों तथा दुनिया भर में रहने वाले भारतीय नागरिकों एवं उनके परिवार वालों को आज नववर्ष सन् 2026 की दिली मुबारकबाद एवं उन सबकी सुख, शान्ति, समृद्धि, सुरक्षा एवं आत्म-सम्मान व स्वाभिमान-युक्त जीवन की शुभकामनायें।
नया साल देश में सर्वसमाज के हर ग़रीब व मेहनतकश लोगों अर्थात् समस्त बहुजनों की दिन-प्रतिदिन की ज़िन्दगी नित्य नये नियम-क़ानूनों की क़दम-क़दम पर जकड़नों से दूर सहज व सरल हो तथा यह साल आप सबके लिये बहुत सारी ख़ुशियाँ लाये, यही कुदरत से कामना ही नहीं बल्कि राजनीतिक और सामाजिक जीवन में बहुजन समाज का थोड़ा अच्छे दिन पाने के लिये यही संघर्ष भी है। अन्त में एक बार फिर सभी को नये साल की हार्दिक बधाई।