#किसको_मिले_कबीरभगवान
संत रामपाल जी महाराज (गाँव- धनाना, जिला- सोनीपत, हरियाणा) से परमेश्वर कबीर साहेब जी की भेंट संवत् 2054, फाल्गुन मास, शुक्ल पक्ष की एकम (9 मार्च 1997) को सुबह 10:00 बजे हुई थी।
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धर्मदास जी को कबीर परमात्मा पहली बार मथुरा में 'जिंदा महात्मा' के रूप में मिले थे। इसके बाद वे अनेक बार विभिन्न रूपों में मिले, उन्हें सतलोक का साक्षात्कार कराया।
धर्मदास जी ने कहा है:
आज मोहे दर्शन दियो जी कबीर।
सत्यलोक से चल कर आए, काटन जम की जंजीर।।
#MondayMotivation
भक्ति से ही दुःख का अंत
आध्यात्मिक ज्ञान के अभाव में परमात्मा के विधान से अपरिचित होने के कारण यह प्राणी इस दुखों के घर संसार में महान कष्ट झेल रहा है और इसी को सुख स्थान मान रहा है।
जानने के लिए अवश्य देखें साधना चैनल प्रतिदिन शाम 07:30 बजे
#SatKabirKiDaya
#सत_भक्ति_संदेश
संत रामपाल जी महाराज का दावा है कि वे शास्त्रों के अनुसार सत्य भक्ति का ज्ञान देकर, अगले 4 वर्षों में, विश्व में आदि सनातन धर्म की स्थापना करेंगे। वे सभी संतों को शास्त्रार्थ के लिए खुली चुनौती देते हैं।
#SantRampalJiQuotes
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यहूदी धर्म के प्रवर्तक माने जाने वाले हज़रत मूसा जी को उनके अल्लाह ने, उनसे अधिक ज्ञानी 'अल-खिज़्र' के पास जाकर इल्म (ज्ञान) प्राप्त करने का निर्देश दिया था। इसका उल्लेख पवित्र कुरआन शरीफ़ के सूरा काफ 18 आयत 60 से 82 में है और वह अल-खिज़्र जो हजरत
#GodMorningSunday#शराब_पीना_महापाप
हाड़ जलै ज्यूँ लाकड़ी, केस जलै ज्यों घास।
सब जग जलता देखकर, भया कबीर उदास ।।
अवश्य पढ़ें आध्यात्मिक पुस्तक "ज्ञान - गंगा"।
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कबीर परमात्मा के दर्शन गरुड़ जी को हुए थे, कबीर सागर में 11वें अध्याय “गरूड़ बोध" पृष्ठ 65 (625) पर प्रमाण है कि परमेश्वर कबीर जी ने धर्मदास जी को बताया कि मैंने विष्णु जी के वाहन पक्षीराज गरूड़ जी को उपदेश दिया, उनको सृष्टि रचना सुनाई। 1/2
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कबीर परमात्मा, संत दादू दयाल जी से सन् 1551 में आमेर (राजस्थान) में मिले थे।
इस पर दादू जी ने कहा है:
जिन मोकुं निज नाम दिया, सोइ सतगुरु हमार । दादू दूसरा कोई नहीं, कबीर सृजन हार ।। कबीरपंथी शब्दावली, पृष्ठ 233
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कबीर परमेश्वर, सतगुरु के रूप में विश्नोई पंथ के संस्थापक संत जम्भेश्वर जी को समराथल (राजस्थान) में मिले थे। जम्भसागर (शब्द 90) में उल्लेख है:
जां जां पवन आसण, पाणी आसण, चंद आसण।
सूर (सूर्य) आसण गुरू आसण संमरा थले।
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संत गरीबदास जी (गाँव - छुड़ानी, जिला- झज्जर, हरियाणा) को कबीर परमेश्वर सन् 1727 में खेतों में 'जिंदा महात्मा' के रूप में मिले और उन्हें सतलोक का साक्षात्कार कराया।
अधिक जानकारी के लिए अवश्य देखिए Sant RampalJi YouTube Channel
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जपो रे मन सतगुरु नाम कबीर।। जपो रे मन परमेश्वर नाम कबीर। चार दाग से सतगुरु न्यारा, अजरो अमर शरीर। दास मलूक सलूक कहत हैं, खोजो खसम कबीर।।
- कबीर सागर, अध्याय अगम निगम बोध, पृष्ठ 45
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मंसूर अली और उनकी बहन शिमली से भी कबीर परमात्मा ने शम्स तबरेज़ के रूप मे भेंट की थी, जिसका वर्णन 'कबीर मंशूर' नामक पुस्तक मे मिलता है।
गरीब, बहुर शमशतबरेज रूप में, समझाये मनसूर।
शिमली पर साका हुआ, पौंहचे तख्त हजूर।।
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सूफी संत रूमी को कैबीर परमात्मा शम्स तबरेज़ के रूप में 15 नवंबर 1244 को
कोन्या (तुर्की) में मिले थे। इसके उपरांत, रूमी ने अपने मुर्शिद (गुरु) शम्स तबरेज़ की प्रशंसा में रचित कृतियों 'मसनवी' और 'दीवान-ए-कबीर' में कबीर परमात्मा (अल-खिज़) का उल्लेख किया है।
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कबीर परमेश्वर हजरत मुहम्मद जी को मिले थे।
कबीर साहेब हजरत मुहम्मद जी को सतलोक लेकर गए, सर्व लोकों की स्थिति से परिचय करवाया। किन्तु हज़रत मुहम्मद जी ने मान-बड़ाई के कारण कबीर साहेब का ज्ञान स्वीकार नहीं किया था।......
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मंसूर अली और उनकी बहन शिमली से भी कबीर परमात्मा ने शम्स तबरेज़ के रूप में भेंट की थी, जिसका वर्णन 'कबीर मंशूर' नामक पुस्तक में मिलता है।
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सामान्यतः स्वामी रामानंद जी को कबीर जी का गुरु माना जाता है, परंतु मर्यादा बनाए रखने के लिए कबीर जी ने गुरु-शिष्य की लीला की थी।
आध्यात्मिक दृष्टिकोण के अनुसार, स्वामी रामानंद जी ने स्वयं कबीर साहेब की समर्थता को स्वीकार किया था।
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धर्मदास जी को कबीर परमात्मा पहली बार मथुरा में 'जिंदा महात्मा' के रूप में मिले थे। इसके बाद वे अनेक बार विभिन्न रूपों में मिले, उन्हें सतलोक का साक्षात्कार कराया और पुनः संसार में भेजा।
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तैमूर लंग को कबीर परमात्मा ने 'जिंदा महात्मा' के रूप में तब दर्शन दिए थे, जब वह भेड़-बकरियाँ चरा रहा था। संत गरीबदास जी ने कहा है:
गरीब, तैमूरलंग को तालिब मिले, एक रोटी की चाहय।
जिंदा रूप कबीर धरहीं, सुनी तैमूरलंग की माय।।
गरीब, हिंद जिंद सब ही दी,