सबसे अच्छी मायावती जी, बाकी सब बेकार हैं।
हरदोई जिले के संडीला विधानसभा में जनता ने कहा सबसे अच्छी मायावती जी बाकी सब बेकार हैं,ठग है।
हम ���ज भी मायावती जी की बनवाई कॉलोनी में रह रहे हैं।उनकी बनवाई कॉलोनी आज भी मजबूती से खड़ी है।
जमीन पर माहौल बसपा के पक्ष में दिख रहा है।जितने भी मीडिया सर्वे देखो सभी में लोग बसपा को चुनते दिख रहे हैं। यूपी की जनता पांचवीं बार बसपा की सरकार बनाने के लिए कमर कस चुकी है।
सबसे अच्छी मायावती जी, बाकी सब बेकार हैं।
हरदोई जिले के संडीला विधानसभा में जनता ने कहा सबसे अच्छी मायावती जी बाकी सब बेकार हैं,ठग है।
हम आज भी मायावती जी की बनवाई कॉलोनी में रह रहे हैं।उनकी बनवाई कॉलोनी आज भी मजबूती से खड़ी है।
जमीन पर माहौल बसपा के पक्ष में दिख रहा है।जितने भी मीडिय��� सर्वे देखो सभी में लोग बसपा को चुनते दिख रहे हैं। यूपी की जनता पांचवीं बार बसपा की सरकार बनाने के लिए कमर कस चुकी है।
संकल्प दिवस: 109 साल पहले लिया संकल्प, जिसने देश के कई करोड़ो की जिंदगी बदल दी।
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आज संकल्प दिवस है। यह दिन देश के 27 करोड़ अनुसुचित जातीयो के लिए काफी महत्वपूर्ण है। बाबा साहब अगर 109 ���ाल पहले आज के ही दिन संकल्प न लेते तो एससी में मिडिल क्लास बनाना मुश्किल था। अधिकारों की जानकारी तक नही हो पाती।।
भारतीय शोषित समाज के लिए आज का दिन काफी ज्यादा महत्वपूर्ण है। आज से 109 साल पहले अगर आज ही के दिन 23 सितम्बर 1917 को एक महान हस्ती "संकल्प" न लेते तो;
1.मान्यवर कांशीराम, मायावती जी, पासव��न जी, व संसद में शोषित समाज के 131 सांसद नही होते।
2.जो पढ़ रहे है उनमें से कई आई ए एस, आई पी एस, आई एफ एस से लेकर क्लर्क तक इतने बड़े स्तर पर शोषित समाज से नही होते।
3.शोषित समाज से व्यवसायी बनने के रास्ते मे रुकावट ही रुकावट मिलती।
4.राजनीति में दलित राजनीति नाम कोई नही लेता। सिम्पल शब्दो मे शोषित समाज समाज मे मुख्यधारा से नही जुड़ पाता।
5.सबसे मुख्य पशु समान जीवन से बाहर न आ पाते।।
बाबा साहब विश्व ��ी प्रसिद्ध कोलम्बिया यूनिवर्सिटी से पढ़कर वापस आये तब सयाजी गायकवाड़ से किये गए अनुबन्ध के आधार पर वडोदरा रियासत में सचिव के पद पर कार्य करने लगे। बाबा साहब दक्षिण एशिया के उन प्रथम व्यक्तिओ में से जिन्होंने कोलम्बिया यूनवर्सिटी से शिक्षा ली थी। एक ज्ञानी व्यक्ति के साथ साथ वडोदरा रियासत के सबसे महत्वपूर्ण पद पर आसीन होने के बाद भी चपरासी बाबा साहब को फेंक कर फाइल देता था, बाबा साहब के पा���ी पीने का गिलास अलग था।
बाबा साहब को रहने के लिए किसी ने ठिकाना नही दिया। एक पारसी गेस्ट हाउस में अपने आप को गैर शोषित वर्ग से बोलने की वजह से रहने की अनुमति मिली। कुछ दिन बाद पारसियों को बाबा साहब की असलियत पता लग गयी, पारसियों का एक समूह बाबा साहब के पास आया और उन्हें घर खाली करने के लिए कहा। बाबा साहब के कुछ समय का मोहलत मांगने के अनुरोध को खारिज कर दिया गया। बाबा साहब को तुरंत उनके समान के स���थ बाहर कर दिया गया। बाबा साहब वँहा से सीधा रेलवे स्टेशन आकर ट्रैन की इंतजार में बैठ गए।
ट्रैन आने में 5 घण्टे थे। बाबा साहब परेशान थे। इतनी शिक्षा व ज्ञान के साथ उच्च पद होने के बाद भी जातिवाद की वजह से बेईज्जती कर दी गयी। बाबा साहब स्टेशन के पास एक पार्क में आकर बैठ गए। काफी देर सोचते रहे, पूरा समाज आंखों के सामने घूम रहा था, उन्हें एहसास हुआ कि जब मेरे साथ ऐसा हुआ तो मेरा समाज तो जानवर से भी बेकार स्तिथि में जी रहा है, शोषित समाज के कोई मानव अधिकार नही थे। इसलिए एकाएक बाबा साहब ने यह संकल्प लिया कि अब नौकरी के चक्कर मे लगने की जगह पूरी जिंदगी शोषित समाज को गुलामो व जानवर से भी बदतर स्तिथि से बाहर निकालने में लगा दूंगा और अगर नाकामयाब रहा तो अपने आप को गोली मार लूंगा।
तो मित्रो। आज में एक स्वतंत्र लेखक के तौर पर इसलिए लिख पा रहा हूँ क्योंकि बाबा साहब ने आज से 109 साल पहले आज ही के दिन संकल���प लिया था। इसलिए यह सही दिन है जब हमे भी संकल्प लेना चाहिए कि अंधविश्वास, धार्मिक मान्यताओं को छोड़कर समाज मे शिक्षा का प्रसार करने व समय लगाएंगे व किसी न किसी रूप में Pay back to Society के अंतर्गत शोषित समाज के भाई व बहन की ज्ञान, सुरक्षा, जनजागरूकता व आर्थिक तौर पर मदद करनी है। तभी बाबा साहब का संकल्प पूरी तरह से कामयाब रहेगा। ।
विकास कुमार जाटव