पश्चिम बंगाल के 2026 के विधानसभा के चुनाव में 92.47 % वोट पड़े I
यह वोट प्रतिशत बंगाल का आज तक का सबसे बड़ा वोट प्रतिशत था और जनता का लोक तंत्र के प्रति विश्वास बहाली का प्रतीक था ।
This restoration of trust in election process was not possible without successful SIR in West Bengal.
The heavy voter turn out proved the ability of the election commission to conduct free and fair elections with full security and right voters.
This is a verdict on SIR, verdict on Gyanesh Kumar and above all , they could chose the way they want the government to function.
It is my challenge that Kapil Sibbal will lose any election if he decides to contest now; leave aside प्रशांत भूषण who would not even dare to file nomination for any election.
पुराने form-6 की गड़बड़ी यह थी कि फर्जी documents के आधार पर वोटर लिस्ट में नाम आ सकता था और नये SIR के फॉर्म 6 में कथित गड़बड़ी यह है कि गरीब, सयाने और माइग्रेंट लेबर्स के लिये मुश्किल है कि वह अपनी पुरानी वोटर लिस्ट का रिकॉर्ड लेकर आयें I
वैसे तो यह argument सही नहीं है कि किसी को अपने पुस्तैनी घर का पता न हो I
अभी जहां SIR नहीं हुआ वहां पर नया मोडिफाइड form 6 ही लगेगा I इससे स्पष्ट है कि चुनाव आयोग देश के नागरिक होने का प्रमाणपत्र हर हालत में चाहता है और मुझे लगता है कि देश का हर नागरिक और सुप्रीम कोर्ट भी यही चाहेगा कि नागरिक होने की वास्तविक जांच अच्छे से हो l
अब कोई यदि देश का सचमुच नागरिक है तो उसे वोट के अधिकार से वंचित नहीं होना चाहिये I इसलिए पुराने form-6 के आधार पर form-6 भरवाया जा रहा है I
लेकिन मुझे तो नहीं लगता कि सरकार या चुनाव आयोग किसी डर की बजह से समझौता करेंगे I
उनसे उनके पुस्तैनी निवास की जानकारी पर declaration लेकर जांच की जा सकती है कि सचमुच वह देश के नागरिक हैं या नहीं I
चुनाव आयोग अपनी जिम्मेदारी समझता है और सरकार हो या सुप्रीम कोर्ट, वह भी अपनी जिम्मेदारी समझते हैं l
कपिल सिब्बल और प्रशांत भूषण कितना भी भारत की न्यायपालिका को दोषी ठहरायें, न्यायापालिका अपनी जिम्मेदारी को जानती है और सभी निर्णय न्यायपूर्ण व जिम्मेदारी के साथ ही होंगे ।
चुनाव आयोग के द्वारा लिया गया निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया निर्णय था या नहीं,यह विषय अब जांच का विषय नहीं है ।
यदि यह निर्णय ज्ञानेश कुमार जी द्वारा एकतरफ़ा निर्णय था और बाकी दो चुनाव आयुक्तों को लगता था कि उनहोंने गलत निर्णय लिया है तो अपनी असहमति भारत सरकार, राष्ट्रपति या / और सुप्रीम कोर्ट में दर्ज करानी थी ।
प्रक्रिया के तहत चुनाव आयोग के निर्णय मुख्य चुनाव आयुक्त के सिग्नेचर से जाते हैं और जब तक असहमति दर्ज नहीं करायी गयी है, वही सर्वसम्मत निर्णय था ।
कयी राज्यों में चुनाव के बाद आज यदि अपने असहमति पत्रों को लीक करके कोई मुख्य चुनाव आयुक्त पर सवाल उठा रहा है तो यह अनुशासनहीनता का मामला बनता है ।
यह पत्र लीक कैसे हुये इस पर जांच बिठा देना चाहिए और दोषियों के ऊपर अनुशासनिक कार्यवाही करनी चाहिए।
अनुशासनिक कार्यवाही शुरू करने का अधिकार मुख्य चुनाव आयुक्त, राष्ट्रपति और संविधान रक्षक होने के नाते सुप्रीम कोर्ट को भी है ।
क्या इन डरपोंकों को मोदी जी हीरो बना रहे हैं ।
क्या आप ओभर रिएक्ट नहीं कर रहे हैं ।
इनके साथ न तो कोई छात्र है और न ही किसान। अब यह सिद्ध कैसे होगा । आपने तो ट्रेन तक बंद कर दीं और दिल्ली को छांवनी में तब्दील कर दिया अब भी समय है ।
ये सचमुच
" अरेस्ट होने के लिये ही आये हैं " ।
वह आपने कर दिया ।
युद्ध होने दीजिये । हम भी तो देखें, इनमें कितना दम है ।
@shivlalpatel18 अभी भी इसके पास सबूत नहीं है । सबूत ले जायेगा , बोलता है । जब आंदोलन कर रहे हो तब सबूत के साथ आना चाहिए और यह.भी बताना होगा कि आपने यह सबूत चुनाव आयोग को दिये हैं या नहीं ।
10 october का CJP का आंदोलन कोई आंदोलन नहीं, सीधे-साधे भारत के भविष्य पर हमला है I कॉंग्रेस alliance और CJP की दिशा और अर्थिक आवश्यकता दोनों की आपूर्ति विदेशी साजिश के तहत तमाम उन देशों से पूरी होगी जो भारत को या कि आर्थिक रूप से गुलाम देखना चाहते हैं या फिर गजबा-ए-हिंद स्थापित कर देश को एक लोकतंत्र से मुस्लिम देश की ओर धकेलना चाहते हैं ।
यह समय अपनी आंतरिक कलह से बहुत ऊपर उठकर मोदी जी और मुख्य चुनाव आयुक्त को इस संकट की घड़ी में मदद पहुंचाने का समय है ।
अब लड़ॢयां सिर्फ सीमाओं पर नहीं लड़ी जायेंगी, कयोंकि उसमेः तो निस्सदेह भारत विजयी रहेगा । पर भारत अपनी अंतर्कलह का शिकार न बने , हमको इसी पर
@PNRai1 यह परीक्षा अमित शाह के प्रबंधन की है I
A) क्या वह congress से डरते हैं I
B) क्या वह किसी कारणवश कॉंग्रेस के सहयोगी हैं ।
C) क्या कोई और कारण है कि वह CJP और कॉंग्रेस पर soft और सवर्ण देशभक्तों पर कठोर हैं I
इसका जवाब आयेगा I
गृहमंत्री जी… @AmitShah
शायद अभी व्यस्त हैं आप। किसी राज्य में चुनाव की तैयारियों में होंगे, इसलिए शायद आपने दिल्ली पुलिस के जवानों के साथ हुई बदतमीज़ी और मारपीट का वीडियो नहीं देखा होगा।
चुनाव जीतने हैं, माना। लेकिन थोड़ा ध्यान दिल्ली पुलिस के साथ हो रहे दुर्व्यवहार पर भी दे दीजिए। बेचारे जवानों को आपने क्या बना रखा है?
रील बनाने वाले लड़के-लड़कियों से लेकर छुटभैया नेताओं तक, कोई भी कुछ भी बोल रहा है, पुलिस से बदसलूकी कर रहा है, हाथ उठा रहा है, लेकिन आपका मौन टूटने का नाम नहीं ले रहा।
अभी कोई समझाने आएगा और कहेगा,
“यही तो कूटनीति है… पुलिस ने कार्रवाई की तो दंगे होंगे, सरकार की छवि खराब होगी, विपक्ष यही चाहता है, चुनाव हार जाएंगे!”
लेकिन भैया, चुनाव जीतने के लिए अगर पुलिस के हाथ बाँधकर उसे पिटते देखते रहना है, तो ऐसी जीत से हार बेहतर है।
आप सिर्फ चुनाव प्रबंधन के मंत्री नहीं हैं।
जनता को दिखाइए कि सरकार की रीढ़ में दम है और कानून की वर्दी पहनने वाले जवान अकेले नहीं हैं।
चुनाव आते-जाते रहेंगे, लेकिन पुलिस के मनोबल से खिलवाड़ की कीमत बहुत भारी होती है। 🇮🇳
@ivishalkaushik Idiot,
यह लोकतंत्र का सम्मान नहीं था, UGC पर आंदोलन करने वाले देशभक्तों का अपमान था ।
हम सब समझते हैं लेकिन क्या करें, मोदी जी के जातीय उन्माद का जवाब हम देशद्रोह करके नहीं दे सकतेl
क्या सुकन्या और रोहणी घावरी महिला नहीं हैं, कम से कम उनके सम्मान के लिये बोलिये और फिर बताइये कि कितनी बेहतर स्थिति में हैं ।
क्या माता सीता और माता सबरी के लिये तुलसीदास जी के हृदय में सम्मान नहीं था !
आप तो यही बोल रहे हैं ।
आज भी हिंदी में हमारे बघेल खंडी में ताड़ने का अर्थ है उनके प्रति बहुत सतर्क रहें।
भारत
बघेलखंडी अवधी से ही जन्मी है और तुलसीदास जी की भाषा हमारी भाषा ही थी । चित्रकूट का मुख्य भाग सतना में ही है ।
महिला शिक्षा और शूद्र शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की उसी तरह जरूरत है जैसे के ढोल की डोरी कसने में और गंवार को शिक्षित करने में जो कि बहुत कठिन है । कोई यदि पशुवत भी है तब भी उसे समझाना- बुझाना नहीं छोंड़ देना चाहिए।
यह उन्होंने अशिक्षित वर्ग के लिये कहा है । उनके अनुसार महिलाओं को और शूद्रों को भी शिक्षा का अधिकार है जो उन्हें मिलना चाहिए।
ऋग्वेद की रचना में कयी महिलाओं ने बढ़ चढ़कर हिंस्सा लिया और नारी का सम्मान मनु- स्मृति में इस श्लोक से स्पष्ट है l
"यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता : ।"
जहां नारी की पूजा होती है, वहीं देवताओं का वास होता है ।
विश्व में अकेला एक धर्म है जो दम्पति विवाह को सर्वश्रेष्ठ विवाह मानता है ।
दम्पत्ति का अर्थ है बराबरी का रिस्ता ।
हमारे धर्म में यह मान्यता है कि पति- पत्नी के संबंध जन्म जन्मांतर के संबंध हैं जो अटूट हैं ।
तलाक एक विदेशी सभ्यता का भारत में समावेश है ।
फिर भी यदि समझ में नहीं आता है तब तो आपको सद्बुद्धि देने के लिये भगवान से सिर्फ प्रार्थना कर सकते हैं ।
@PNRai1 नरेंद्र मोदी जी को उनके इन देशद्रोहियों के खिलाफ न खड़े होने को और शक्ति का उपयोग न करने को भारी कमी के रूप में देखा जायेगा न कि उनकी सज्जनता के रूप में ।
*बजरंग दल-जंतर-मंतर पहुँच रहा हैं*
*RSS और VHP के भी*
*5 लाख से अधिक सदस्य*
*10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पहुंच रहे है*
*RSS को-Waiting में रक्खा गया है*
*डरा नही-बस बता रहा हूँ*
Stand with our country. Stand with our PM during these hard times. 🇮🇳
Our government is facing difficult challenges. This is the time to stand together and support our country.