भगवान राम की जब #PranPratishta होगी तो भगवान राम योगी जी से जरूर पूछेंगे जब मोदी जी ने यूपी के अनुदेशकों के 17000 2017 में कर दिए थे, फिर क्यों अनुदेशकों को नहीं दे रहे हैं, और अनुदेशकों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में लड़ रहे है। भगवान रामजी के प्रश्न का क्या जवाब देंगे योगी जी। #YogiAdityanath @PMOIndia@narendramodi
बेसिक शिक्षा में शीत कालीन अवकाश का शिक्षकों को मिलेगा वेतन तो अनुदेशक, शिक्षामित्र क्यों नहीं?
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यूपी के बेसिक स्कूलों के सहायक अध्यापकों को 1 जनवरी से 15 जनवरी शीतकालीन अवकाश का पैसा मिलेगा क्योंकि उन्हें 80 से 90000 सैलरी मिलती है लेकिन अनुदेशकों/शिक्षामित्रों को सिर्फ आधे महीने का मानदेय 4500/5000 मिलेगा।
अभी तक शिक्ष���मित्रों और अनुदेशकों को दिसंबर महीने की भीख नहीं मिली है। 9000/10000 को भीख ही कहना चाहिए, क्या हमारा पैसा भी 22 जनवरी की तैयारी में लगा दिया गया है। @SpecialCoverage @shivkmishra
36 हजार कर्मचारियों को मिला कोर्ट से न्याय तो 25 हजार अनुदेशकों को कब मिलेगा न्याय?
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उत्तर प्रदेश में राइट टू एजुकेशन एक्ट के तहत 2013 में उन सरकारी स्कूलों में जहां 100 से ज्यादा छात्र है वहां स्पोर्ट्स पढ़ाने के लिए शारीरिक शिक्षा अनुदेशक, कला पढ़ाने के लिए आर्ट्स अनुदेशक, कंप्यूटर पढ़ाने के लिए कंप्यूटर अनुदेशक, कृषि अनुदेशक, उद्यान एवं फल संरक्षण अनुदेशक रखे गए थे। उस समय उन्हें मात्र 7000 मानदेय दिया जाता था।
फिर अखिलेश यादव सरकार ने इनका मानदेय 15000 का प्रस्ताव बनाकर केंद्र की मोदी सरकार को भेजा जिस पर भारी कटौती करके मात्र 1470 की ही बढ़ोत्तरी हुई।
फिर अगले वर्ष अखिलेश सरकार ने 17000 का प्रस्ताव भेजा लेकिन इसी बीच योगी सरकार 2017 में आचुकी थी। और 17000 का प्रस्ताव केंद्र सरकार ने पास भी किया गया, जिसका योगी जी ने ट्वीट भी किया अनुदेशकों के आए अच्छे दिन अनुदेशकों का मानदेय हुआ 8470 से 17000 लेकिन धोखे की कहानी अब शुरू होती है। करीब 1 साल तक उन्हें बढ़ा मानदेय नहीं दिया गया, फिर हम लखनऊ अपना हक मांगने जाते हैं। जहां योगी सरकार ने उन्हें लाठी से बुरी तरह पिटवाया।
इसके बाद अनुदेशकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सारी सुनवाई के बाद सभी सबूत देखने के बाद हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि अनुदेशकों को 2017 से 17000 के हिसाब से एरियर दिया जाय और जो मानसिक शोषण जो हुआ है उसका 9 प्रतिशत ब्याज दिया जाय।
लेकिन 6 माह बीतने के बाद भी सरकार ने हाईकोर्ट का फैसला लागू नहीं किया। इसके बाद सरकार अनुदेशकों की पीठ पर छुरा भोंक के डबल बेंच में चली जाती है। जहां केंद्र सरकार के वकील स्वीकार करते है कि हां हमने 2017 18 का बजट 17000 के हिसाब से राज्य सरकार को दिया था। करीब 2 साल की सुनवाई और सबूतों का अध्ययन करने के बाद डबल बेंच ने आदेश दिया कि सरकार तत्काल अनुदेशकों को 2017 18 का एक सत्र का एरियर 17000 का अनुदेशकों को दे और आगे के वर्षों के लिए अनुदेशक कोर्ट में अपील कर सकते ह��। ये फैसला राज्य सरकार के दबाव में हाईकोर्ट ने दिया ऐसा अनुदेशकों को भी महसूस हुआ। इसके बाद सरकार ने इस फैसले को भी नहीं माना एक बार फिर सरकार ने अपनी नियत के मुताबिक अनुदेशकों की पीठ में छुरा भौंकते हुए योगी सरकार हम गरीब अनुदेशकों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चली गई। अब कई महीनों से हम अनुदेशक सुप्रीम कोर्ट में लड़ रहे है।
अनुदेशक, शिक्षा मित्रों की आवाज आखिर सरकार के कानों तक पहुंची, इस आवाज को पहुंचाने के लिए दो वर्ष 3 माह लगातार यज्ञ किया सबने मिलकर आहुति दी आज उसका असर दिखा। अब नतीजे का इंतजार सब मिलकर जीतेंगे जरूर
नोटबंदी एक सोची समझी साज़िश थी
- रोज़गार तबाह करने की
- श्रमिकों की आमदनी रोकने की
- छोटे व्यापारों को खत्म करने की
- किसानों को नुकसान पहुंचाने की
- असंगठित अर्थव्यवस्था को तोड़ने की
99% आम भारतीयों पर हमला, 1% पूंजीपति मोदी 'मित्रों' को फायदा।
ये एक हथियार था, आपकी जेब काटने का - परम मित्र की झोली भर कर उसे 609 से दुनिया का दूसरा सबसे अमीर बनाने का!