खुद से भी ज्यादा भरोसा था तुझ पर।
मेरी जान मेरी जान का खयाल ता उम्र रखेगी।
तूने तो कुछ पल मैं ही साथ छोड़ दिया।
अब मेरी जान इस जान को जाने से कोन रोकेगा।
वो वफा की बात करने वाला।
इस कदर बेवफा निकलेगा।
कभी सोचा न था।
वो हमारी एक खरोंच पर रो देने वाला।
आज हमारी मौत पर यूं मुंह फेर लेगा ।
कभी सोचा न था।
जी रहे है मायूस से इस चेहरे पर हंसी का मुखौटा लगा कर।
न वो मिले न मांगने पर मौत। ऊपर वाला भी हमे इस अनसुना करेगा।
कभी सोचा न था।
सोचा न था की वो इस कदर दूर जाएंगे।
की हम मर रहे हैं ये भी उनको बता ना पाएंगे।
खैर अब उनको ये बता कर भी क्या फायदा।
उन्हे अब हमारी जान से ज्यादा कीमती कुछ और है।
तो अब आप ही बताओ की इस जान का क्या करे हम।
जब इसकी उनकी नज़रों में कुछ क़ीमत ही नहीं रही।