“मैं अरेस्ट होने वाला हूं, आप पीसफुल प्रोटेस्ट जारी रखें"
◆ जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट के दौरान बोले कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपक��
◆ दरअसल, दीपके ने पुलिस से प्रदर्शन करने की अवधि बढ़ाने की मांग की थी जो मना कर दी गई
@abhijeet_dipke | Abhijeet Dipke | Cockroach Janta Party
इतना बल अगर पेपर लीक को रोकने में लगाया होता तो कॉक्रोचेस अपने घर पर ही होते आज!
धर्मेंद्र प्रधान को बचाने के लिए इतनी पुलिस भेजी है - क्यों इस सरकार को युवाओं से ज़्यादा अपने एक incompetent मंत्री से प्यार है?
#NoTETbeforeRTEact
*IAS, IPS, IFS ,IRS,IES की exam यूपीएससी के माध्यम से भारत में आयोजित होती है। तो IMS (Indian Medical Services) के साथ-साथ IJS (Indian Judiciary Services) या IAS(J) की परीक्षा भी होनी चाहिए। जिससे सभी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ एक समान न्याय भी मिलें। और जो पूर्व से नियुक्त अधिकारीगण/ न्यायधीश इन परीक्षाओं को पास किए बिना नियुक्त हैं। उन्हें भी 2 वर्ष के भीतर इस परीक्षाओं को पास करना चाहिए। अन्यथा उन्हें भी शिक्षकों की भाँति अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी क्या?
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“एक राजा था। उसके चाटुकारों ने उसको कह दिया था कि वह महान है। एक दिन किसी ने उसको आईना दिखा दिया। इसके बाद राजा ने ऐलान कर दिया, “जो आईना दिखाए वह दुश्मन है। जो सवाल पूछे है वो ग़द्दार है।
ऐसा ही एक राजा हमारे देश में भी है”
This is iconic 👏
Shekhar Suman just narrated the story of a Cruel King.
He didn’t name anyone but this fits perfectly on a man we all know.
Must- Must Watch.
@DrDCSHARMAUPPSS विना परीक्षा के पाँच जज की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट मे कैसे जबकि शिक्षक निर्धारित योग्यता पर 25 वर्षो से पढ़ा रहा है इसका मतलब विना TET के शिक्षको द्वारा पढ़ाया सभी विद्यार्थी अयोग्य - तो उन्हे भी कार्यगुक्त क रो
#बिना_परीक्षा_माननीय_सुप्रीम_कोर्ट_में5_नये_जज_नियुक्त
Law के क्षेत्र में प्रोफेशनल डिग्री LLB लेकर वकील बनते हैं ।इसी प्रकार स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में प्रोफेशनल डिग्री बी एड या बीटीसी लेकर शिक्षक बनते हैं ।
simple एलएलबी की डिग्री लेकर बने अधिवक्ता बिना किसी परीक���षा के केवल अनुभव के आधार पर हाईकोर्ट के माननीय जस्टिस ,फिर चीफ जस्टिस ,सुप्रीम कोर्ट के मा जस्टिस और फिर सुप्रीम कोर्ट के chief justice तक बन सकते हैं।
लेकिन बी एड या बीटीसी की डिग्री या डिप्लोमा लेकर बने शिक्षक को नियुक्ति के 25-30 वर्षों बाद प्रमोशन तो दूर नौकरी में बने रहने के लिए भी नई परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी और सफल न होने पर नौकरी से निकाल दिये जाएँगे ।क्या यह न्याय है?
हम माननीय प्रधानमन्त्री जी से अनुरोध करेंगे ���ि देश के 25 लाख शिक्षकों के साथ हो रहे इस अन्याय का संज्ञान लें और एनसीटीई द्वारा 23 August 2010 में निर्धारित योग्यता को आरटीई में सम्मिलित करने की कृपा करें ।🙏
@narendramodi
@AmitShah
@rajnathsingh
@RahulGandhi
@dpradhanbjp
@myogiadityanath
पत्रकार महोदय, कुछ तो शर्म करो,
जी हजूरी छोड़ो, अपना कर्म करो।
देश समस्याओं से देखो जूझ रहा,
लोगों को कुछ भी नहीं सूझ रहा।
रोजगार शिक्षा और महंगाई ,
समस्या जैसे आसमां छू आई।
हर तरफ देखो, पसरी लाचारी,
त्राहिमाम करती जनता बेचारी।
तुम्हारा तो धर्म था सच दिखाना,
कर्म था वाजिब सवाल उठाना।
जनमानस की तकलीफ बताना,
सच्चाई लोगों तक था पहुंचाना।
तुम तो सत्ता से ऐसे डरने लगे,
सरकार का ही भजन करने लगे।
शान में उनकी कसीदे पढ़ते हो
उनके लिए लड़ते औ झगड़ते हो।
तुम्हे गलत कुछ लगता ही नहीं,
जो नेता जी कह दें, वो ही सही।
कानून कैसे भी बनाए जा रहे,
तुम अभिनंदन गीत गाए जा रहे।
हर फैसले को सही ठहराते हो,
नुकसान को भी नफा बताते हो।
साहिब का गुण गाकर सुनाते हो,
लोगों को तुम तो बस भरमाते हो।
खबर बताते नहीं, तुम बनाते हो,
फरमान सरकार का सुनाते हो।
प्रचार में ऐसे तुम रम जाते हो,
पार्टी प्रवक्ता खुद बन जाते हो।
सरकार की दलाली में सब भूले,
सत्ता के झूले में तुम तो ऐसे झूले।
नेताओं की जूतियां तक उठाते हो,
���ूठन भी उनकी शौक से खाते हो।
तुम्हें तनिक भी लाज ना आई,
अपनी रोज़ी की गरिमा बिसराई।
अब भी समय है, थोड़ा मनन करो,
पत्रकार महोदय, कुछ तो शर्म करो,
जी हजूरी छोड़ो, अपना कर्म करो।
~ हनुमान गोपे
आजतक की एंकर अंजना ओम कश्यप लगता है अपनी बची खुची इज़्ज़त भी गवां देगी..
कल अभिनव सर के वीडियो डालने पर महिला विक्टिम कार्ड खेलने वाली अंजना को इस बार महिला से ही टककर मिली है.
बबीता मैडम ने अंजना के कौड़ी के वाले बयान पर वीडियो जारी करते हुए बोला, अगर टीचर्स कौड़ी के हैँ तो अंजना फूटी ���ौड़ी की है.
#इति_सिद्धम
वे अपने लिये संसद के बनाये क़ानून को भी नहीं मानेंगे ,क्योंकि उनको न्यायिक स्वतन्त्रता चाहिये ।
बिना किसी परीक्षा में सम्मिलित हुए केवल अनुभव और सिफारिश के आधार पर नियुक्ति और प्रमोशन लेते रहेंगे ।
आप पर वे नियम थोपे जाएँगे जो संसद ने आपके लिए बनाए ही नहीं हैं
2017 के संशोधन सहित आरटीई में कहीं टेट का उल्लेख नहीं है आरटीई के 23(1) के द्वारा प्रदत्त शक्ति से एनसीटीई ने 23 August 2010 को minimum qualification परिभाषित की है जोकि नियुक्ति वर्षों के अनुसार with tet और without tet है लेकिन माननीय जी ने minimum qualification को TET लिख दिया तो लिख दिया ।
आपको नियुक्ति हेतु निर्धारित परीक्षा उत्तीर्ण करने के नियुक्त होने के 20-25 वर्षों बा��� भी परीक्षा में बैठायेंगे ।
अनुभव के आधार पर पदोन्नति तो दूर नौकरी (उस नौकरी में जिसमें नियुक्ति की प्रक्रिया में कोई दोष या आपत्ति नहीं है)में भी आप नहीं रहेंगे ।20-25 lakhलाख शिक्षकों की नौकरी जाये तो जाये उन पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।
हमने सदैव कहा कि रास्ता संसद से निकलेगा ।इसलिए अब minimum qualification को parliament से define कराने हेतु आगे बढ़ेंगे ।
@narendramodi
@AmitShah
@dpradhanbjp
@myogiadityanath
Will be returning to India to demand the resignation of the Education Minister.
I request the youth of India to join this peaceful protest at Jantar Mantar and exercise our constitutional right to seek accountability from the government.
व्यवस्था की दोहरी नीति के चलते आज जब रीढ़ की हड्डी पर वार हुआ है, तो ख��मोश मत बैठो! आवाज़ उठाओ!
माननीय कोर्ट और सरकार का फ़रमान आ गया है—"चाहे 20 साल से पढ़ा रहे हो, चाहे तुम्हारी भर्ती के समय नियम कुछ भी रहा हो... नौकरी बचानी है, तो #TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) पास करो ।
" तर्क दिया गया कि बच्चों के भविष्य और 'क्वालिटी' (गुणवत्ता) से समझौता नहीं हो सकता।चलो, एक पल के लिए इसे सही मान लेते हैं। लेकिन अब #सिस्टम के ठेकेदारों से सीधे और तीखे सवाल पूछने का वक़्त आ गया है:
क्या इस देश में 'क्वालिटी' की ज़रूरत सिर्फ #शिक्षकों को है?
नेताओं की 'पात्रता' कहाँ है?
#अंगूठाछाप से लेकर दागी #छवि वाले लोग देश की तक़दीर तय कर रहे हैं। मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों के लिए हर चुनाव से पहले एक 'संसदीय व प्रशासनिक पात्रता परीक्षा' #अनिवार्य क्यों नहीं की जाती? देश चलाने वालों की 'गुणवत्ता' की जाँच कौन करेगा?
अफ़सर���ाही पर लगाम क्यों नहीं?
दशकों पुरानी मानसिकता से कुर्सी पर चिपके IAS, IPS और बड़े प्रशासनिक अधिकारियों की हर 5 साल में कार्यकुशलता परीक्षा क्यों नहीं होती?
सिर्फ जनता से जुड़े छोटे कर्मचारियों और शिक्षकों का ही गला क्यों घोंटा जाता है?
बाकी विभागों को खुली छूट क्यों?
जब नियम बीच सेवा में बदले जा सकत��� हैं, तो इसे हर सरकारी नौकरी, हर विभाग और हर ऊंचे पद पर अनिवार्य करो ।
यह कैसा न्याय है? यह न्याय नहीं, तानाशाही है!
सालों-साल ईमानदारी से सेवा करने वाले शिक्षकों को बीच रास्ते में अयोग्य साबित करने की साज़िश बंद करो! अगर बीच नौकरी में नियम बदलने की इतनी ही भूख है, तो यह प्रावधान हर नौकरी और हर राजनेता पर लागू होना चाहिए
अगर नियम एक के लिए है, तो वह नियम सबके लिए लागू करो ।
व्यवस्था की इस दोहरी नीति के खिलाफ हम जी जान से लड़ेंगे ।
✊ #justice_For_Teachers
#StopExploitingTeachers #EqualRulesForAll #SystemReform #TETMandatory #VoiceOfTeachers