Former Visiting Professor Columbia Univ, USA/Humbolt Univ Berlin, Gave Ambedkar Memorial Lecture at York Univ,UBC,SUF Cannada, Parliament of World Religions.
विश्व रैंकिंग 2025 में मेरा नाम
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मैं JNU में नंबर 1, भारत में 11वें और एशिया में 134वें स्थान पर हूँ यह रैंकिंग मुझे समाज विज्ञानियों /वैज्ञानिकों की AD वर्ल्ड रैंकिंग 2025 द्वारा प्रदान की गयी है है. इसे साझा करते हुए गर्व महसूस हो रहा है।समाज का बहुत बहुत साभार.
मनोहर पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित होने वाली मेरी पुस्तक के दूसरे, संशोधित और विस्तारित संस्करण का कवर जारी हो गया है। आपके सहयोग और शुभकामनाओं का आकांछी।
@Chanakya5599 Shri S.D. Bagla (Surya Deo Bagla) was a prominent Indian Administrative Service (IAS) officer belonging to the Uttar Pradesh cadre. After retirement also he Stayed in Lucknow.
SC/ST में पीढ़ी दर पीढ़ी IAS -IPS हो रहे है -यह कपोल कल्पित कथा है ? इसके आँकड़े कहाँ है। UP के पांच IAS/IPS जैसे एस. डी बगला, माता प्रसाद, पी एल पुनिया, हरीश चंद्रा (सभी IAS ), जंगी सिंह, श्री राम अरुण (सभी IPS )
https://t.co/nmyqvphUtu
@Chanakya5599 Sorry -Sri Ram Arun was a 1963-batch Indian Police Service (IPS) officer who served twice as the Director General of Police (DGP) of Uttar Pradesh.
समाजवादियों का पुराना इतिहास-
2004 में अनिल अंबानी ने उत्तर प्रदेश से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और राज्यसभा में प्रवेश किया, लेकिन उन्हें समाजवादी पार्टी का पूरा समर्थन प्राप्त था। हालांकि, लाभ के पद विवाद के बीच उन्हें 2006 में राज्यसभा से इस्तीफा देना पड़ा था।
लखनऊ का कौन सा सोशलिस्ट (समाजवादी) लीडर कैपिटलिस्ट (पूँजीवादी) का हो गया ?
परन्तु तथाकथित प्रगतिशील मीडिया विशेषकर अपने आप को समाजवादी कहने वाले यूट्यूब के एंकर और उस पर समजवादी विचारधारा के पैरोकार (डिस्कशन करने वाले) सब चुप है।
इसी लिए मान्यवर मिडिया को ....कहते थे।
जब तक अनुसूचित जाति/जनजाति के शिक्षकों का IIT में प्रतिनिधित्व नहीं बढ़ेगा,तब तक इन पहचानों के छात्रों के साथ भेदभाव जारी रहेगा।
इसलिए,दलित छात्रों के खिलाफ भेदभाव को रोकने के लिए IIT में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के शिक्षकों की संख्या में जल्द से जल्द वृद्धि की जानी चाहिए।
@umrikar No we can't. We want to built a nation which give's representation to every section of society in the institutions of education, polity, bureaucracy, industry, judiciary, etc., so that we can develop confidence in each other and learn to take collective decision for each other.
आरक्षण क्यों
दलितों/जनजाति/पिछड़ों के प्रतिनिधित्व पर किस समाज में कितनी घृणा,अनादर,निकृष्ट भाषा प्रयोग,ईर्ष्या भरी हुई है यह मेरी 48 शब्द की पोस्ट पर दी गयी प्रतिक्रियाओं से प्रमणित हो गया।कल्पना कीजिये अगर संवैधानिक प्रतिनिधित्व न होता तो क्या दलित इस समाज में स्वतंत्र रह पाते?
@ISinghSarvendra साधुवाद Sarvendra ji, जब मैं स्वतंत्र-जनतांत्रिक-संवैधनिक- संसदीय व्यवस्था में स्वतंत्रता से अपनी एक पोस्ट नहीं लिख सकता तब आप सोचिए यह समाज दलितों/आदिवासियों/पिछड़ों को शिक्षा/ सत्ता/आर्थिक/धार्मिक/सांस्कृतिक आदि संस्थाओं में देखता होगा तो वह कैसे बर्दाश्त करता होगा? जय संविधान
JNU में "बाबासाहेब अम्बेडकर: आर्थिक और विकासीय दृष्टिकोण," पर राष्ट्रीय सेमीनार, यह सेमिनार जेएनयू स्थित समाजशास्त्र की अम्बेडकर पीठ (समाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय) द्वारा आयोजित किया गया। इस सेमीनार में JNU,DU, पंजाब केंद्रीय ,जामिया,जिंदल विवि के प्राध्यपको ने भाग लिया।