@aditya34608@shr7ky@Neha_S_Patel@BonafideVJ Unki shift wise job hai, agar nahi hai to honi chahiye. They must demand work life balance. Hum aazad desh ke nagrik hain hame naukri karni hai jo hum 100% dil se imandari se kar rahe hain. Mansik gulami nahi karni hai, Tanashahi nahi chalegi.
@Adult_humorr@xsnapstories Tu rehnede bhai, aaga picha kuch pata nahi. 500 se jyada bankers ne suicide kar liya stress ki wajah se aur tum log bakchodi kar rahe ho goons bata rahe ho bankers ko
देश के बड़े बड़े स्टैंडअप कॉमेडियनों से लेकर व्हाट्सएप मैसेजेस और फेसबुक पोस्टों पर बैंक कर्मियों की कार्यशैली का खूब मजाक बना ,लोगों ने ठहाके लगाए,
लेकिन आज जब वहीं बैंक कर्मी जब काम के बोझ के तले दबकर डिप्रेशन का शिकार हो रहा और सुसाइड कर रहा तो लोगों ने मुंह में फेवी क्विक डाल रखी है।
बैंकरों पर लगातार काम का दबाव बढ़ाना समाधान नहीं है। बैंकर भी इंसान हैं, उन्हें परिवार और आराम का समय मिलना चाहिए। सरकार और बैंक प्रबंधन से मांग है कि 5-Day Banking लागू करने पर तत्काल सार्थक संवाद शुरू कर समयबद्ध निर्णय लिया जाए। #5DayBankingNow#StandWithBankers
@Sowmyakutt3v@RakSang Can't we have only those remaining 1st,3rd and 5th Saturdays as holidays. It will be a huge relief and true work-life balance for bankers. Don't post like a bot get the facts n details from a known PSB banker then talk.
@Ravi_nik09 Ya to tu IT cell wala hai ya fir bankers ki plight ka mileage le raha hai... Dono hi cases me tu gandh hai bhai... Bankers ki hai kyu le raha hai, sukh shanti bhari jindagi pasand nahi kya tujhe.
Pahle kisi kareebi dost jo ki PSB me ho usse baith ke poori jankari lo fir bako
बैंक कर्मचारी भी किसी के बेटे-बेटी हैं, किसी के पति-पत्नी हैं, किसी के माता-पिता हैं।
वे काम से भागना नहीं चाहते।
वे बस इतना चाहते हैं कि नौकरी करते-करते उनकी जिंदगी खत्म न हो जाए।
लगातार बढ़ता काम , स्टाफ की कमी , टारगेट का दबाव, लंबे working hours और ट्रांसफर का तनाव इन सबका असर सिर्फ कर्मचारी पर नहीं, उसके पूरे परिवार पर पड़ता है।
इसलिए बैंक कर्मचारियों की मांगें बिल्कुल साफ हैं 👇
• 8 घंटे की शिफ्ट और तय working hours लागू हों।
• ऑफिस के बाद अनावश्यक कॉल, WhatsApp और काम का दबाव बंद हो।
• स्टाफ की पर्याप्त भर्ती हो, ताकि मौजूदा कर्मचारियों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
• टारगेट तय करते समय मानवीय और व्यावहारिक मानक अपनाए जाएं।
• टारगेट पूरा न होने पर अपमान, धमकी या अनावश्यक मानसिक दबाव की व्यवस्था खत्म हो।
• ट्रांसफर नीति पारदर्शी हो और परिवार/स्वास्थ्य जैसी परिस्थितियों का ध्यान रखा जाए।
• कर्मचारियों को उनकी छुट्टियां और साप्ताहिक अवकाश वास्तव में मिलें।
• मेंटल हेल्थ काउंसलिंग और confidential support system हर बैंक में उपलब्ध हो।
• लगातार ओवरटाइम को सामान्य व्यवस्था बनाने के बजाय उसका उचित रिकॉर्ड और नियमन हो।
• कर्मचारियों की शिकायतों के लिए स्वतंत्र grievance mechanism हो, जहां बिना डर शिकायत की जा सके।
और समाज से भी एक छोटी-सी अपील है कि
बैंक कर्मचारी सिर्फ आपकी पासबुक , लोन, कैश या UPI की समस्या हल करने वाला व्यक्ति नहीं है।
वह भी एक इंसान है।
उसे भी थकान होती है।
उसे भी तनाव होता है।
उसे भी अपने परिवार के साथ समय बिताना है।
इसलिए अगली बार किसी बैंक कर्मचारी को चाय पीते या लंच करते देखकर मज़ाक बनाने से पहले एक बार सोचिए ....
हो सकता है उस 15 मिनट के ब्रेक के पीछे 10 घंटे की थकान छिपी हो।
बैंक कर्मचारियों को सहानुभूति नहीं,
सम्मानजनक काम का माहौल और लागू होने वाली ठोस व्यवस्था चाहिए। 🙏