इसे कहते हैं
"मुसीबत गले पड़ना"
बेचारे तो अपनी राह जा रहे थे,वह तो मुसीबत खुद ब खुद गले पड़ गई।
ना तरा कुसूर,ना मेरा कसूर
ना तुने सिग्नल देखा,ना मैंने सिग्नल देखा।
"एक्सिडेंट हो गया"😜😂🤣
वह 90's का दौर भी क्या ही बेहतरीन था।
हम टाईर नचा कर भी गेम खेल लेते थे ।
और इससे
दिल,हाथ,पैर, गुर्दे भी मजबूत होते थे।
आज हमारे बच्चे मोबाइल पर शार्टस ,गेम और निंजा टेक्निक स�� खेलते हैं
और
दिल,हाथ,आंखें कमजोर कर रहे हैं 😭
बिहार में लोग सैलाब के पानी और बिजली के खम्भे से मौज मस्ती करते हुए।
एक झटका जो बिजली का लगेगा तो स्नान भी साथ साथ हो जाएगा यमलोक जाने के लिए।😢
क्या बिजली के खम्भे पर चढ़ कर पानी में कूदना चाहिए?
जानवर आज के दौर में इंसानों से "बड़ा दिल" रखते हैं। वफादार ��ी होते हैं।
क्या इंसान के सीने में "छोटा दिल"भी नहीं के एक दुसरे की जान भी आसानी से ले लेते हैं।
देखिए कुत्ते की समझदारी ने कैसे बच्चे को गाड़ी से कुचलने से बचा लिया।
क्या यह रियल है,रील है या फिर AI?
भोपाल गैस काण्ड के बाद अब दिपावली के मौके पर भोपाल कैलशियम कार्बाइड गन से कई घायल तो कई हमेशा के लिए आंखों से महरूम 😔
दिवाली समारोह के दौरान कैल्शियम कार्बाइड गन के इस्तेमाल से घायल होने के बाद 8 से 14 साल के कई बच्चों सहित 60 से ज़्यादा लोगों को भोपाल में अस्पताल में भर्ती कराया गया।
हालांकि उनकी जान को कोई ख़तरा नहीं है, लेकिन कुछ घायलों की आँखों की रोशनी चली गई है, जबकि कुछ के चेहरे जल गए हैं।
क्या हमें ऐसे मौकों पर सावधानी नहीं बरतनी चाहिए?
अभी तो चर्चा शुरू ही हुआ था भारतीय देसी जोगाड़ का😍
अब क्या बना डाला ✴️
कोई बताएगा की यह कौन सा कीड़ा है?
देसी टेक्नोलॉजी अपने चर्म पर,Amirica अब तेरा क्या होगा बे.....😃😀😂🤣
भारत को अब चीन, जापान, अमेरिका की जरूरत नहीं।
भारतीय टेक���नोलॉजी देसी सही पर काफी आगे निकल चुकी है।
मोबाइल चार्ज करने की निंजा टेक्निक
बाहर नहीं जानी चाहिए 😄😀🤣
हादसे बोल कर नहीं आते ।☠️
जिंदगी कभी भी बेवफा हो सकती है।
CNG पेट्रोल पंप पर अचानक आफत टूट पड़ी।⚡
कोई मौत नहीं पर सबक है कि अच्छा दिल रखो ताकि जाने के बाद भी
"दिलों में राज करो"❤️
क्या सांप 🐍के साथ ऐसे खेलना जोखिम भरा नहीं।
आप भी ऐसे खेलना पसंद करेंगे क्या?
America कहता था Indians डरपोक हैं
लो देख लो..... Indians Day by Day, कहां से कहां पहुंच गए...... 😂😅😅😄
यह मिलावट एक ऐसा ज़हर है जो अब आम हो गया है, लोगों की जान से खेलना कितना आसान हो गया है।
पैसे खर्च करने के बावजूद मौत खरीद रहे हैं, कितने लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं, सरकार कुछ नहीं कर रही क्यों।
मिलावट बंद होनी चाहिए।
ज़िन्दगी सब के लिए एक सी नहीं होती। कोई सुखी है तो कोई दुःखी, कोई ऐश व आराम में तो कोई मेहनत व मुशक्कत में, कोई जिंदगी को इंजवाय कर रहा तो कोई सिर्फ त्याग कर रहा है।
बचपन मां बाप के लाड प्यार में कैसे गुजर गया पता ही नहीं चल��, जवानी पत्नी बच्चों के ऐश व आराम को पूरा करने में गुज़र गई।
सब का सब कुछ पूरा कर दिया तो बुढ़ापा खुद का पेट पालने में गुज़र रहा है,वह बच्चे जिन के लिए होंठों पर कभी ना नहीं रहा वह हैं कहां कि इस उम्र में भी आराम की जगह कमर तोड़ मेहनत करनी पड़ती है 😭
वाकई जिंदगी बहुत बेदर्द है।