The Hypocrisy of Accepting 9 Lakh Rank Private/Management/NRI Quota Doctors But Rejecting SC, ST, OBC Doctors.
The argument against reservation on the basis of merit is nothing more than a smokescreen.
Those who make this argument are not concerned about merit at all.
Their real issue is with individuals from Scheduled Castes, Scheduled Tribes, and Other Backward Classes, whom their forefathers, and they themselves, have deemed to be of lower status, gaining a place in the system.
Ye log kaise aa gaye!
Ye hai unki problem.
It's not about merit; it's about caste prejudice. The hypocrisy is glaring.
They are okay with the fact that students securing admission through management or NRI quotas, even with a rank as low as 9 lakhs, or doctors graduating from private medical colleges.
Their selective outrage exposes the deep-seated bias.
तुलसीदास दुबे ने रामचरितमानस की पहली कॉपी बाबर के पोते अकबर के फ़ाइनैंस मिनिस्टर टोडरमल के पास रखी थी, जो उनके मित्र थे। तुलसीदास ने मुग़लों के खिलाफ एक शब्द नहीं लिखा। बल्कि ये भी लिख दिया कि वे मस्जिद में सोते हैं। उनका पंगा मुग़लों से नहीं, अवर्ण हिंदुओं से था। भर भर कर गाली दी है तुलसी ने ओबीसी जातियों को।
गीता प्रेस, रामचरितमानस (134वां संस्करण, पेज 970-71)
भगवान खुद अपनी रक्षा नही कर सकता और सोचते हो कि आप की रक्षा भगवान करेगा।
ब्राह्मण वादियों के द्वारा बनाया गया धर्म धंधा के लिए भगवान का पिछवाड़ा टूट गया
शिक्षा वह दरवाजा हैं, जिसे खोलकर आप तरक्की के सारे रास्ते खोल सकतें हो,
किताबें खुद चुप रहती हैं, लेकिन जिसने पढ़ लिया उसकों बोलना और लड़ना सिखा देती हैं। डॉ० आंबेडकर
पटना में जिन 16 पार्टियों की बैठक आज चल रही है उनके कुल 1722 MLA है। ये बीजेपी से लगभग 400 ज़्यादा है। भारत में तानाशाही को लेकर जो डर दिखाया जाता है, वह गैरवाजिब है। बहुत बड़ा देश है। दक्षिण में बीजेपी नहीं है। पूर्वोत्तर को छोड़ दें तो पूरे पूर्वी भारत में कहीं नहीं है।
भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी @TCS के HR हेड ई.एस. चक्रवर्ती और उसके तीन सहयोगियों ने कई हज़ार इंजीनियर रिश्वत लेकर कंपनी में भर लिए। क्या आप अब भी कहेंगे कि प्राइवेट कंपनियों में सारी नौकरियाँ मेरिट के आधार पर दी जाती हैं? और जहां पैसा चलता हो, वहाँ रिश्तेदारी और जाति क्यों नहीं चलेगी? जब बेस्ट टैलेंट चुनने का दबाव ही नहीं है तो सब चलेगा।
मोदी जी धाकड़ फैसले लेने के लिए जाने जाते है, पर पड़ोसी राष्ट्र बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसिना मे अगले साल के चुनाव के लिए सबसे धाकड़ फैसला लिया है. उन्होंने #EVM के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की घोषणा की है.
#IndiaBole_BanEvm
भारतीय इतिहास में ब्राह्मणों ने धर्म परिवर्तन कब किया?
पिछले 200 साल में ब्राह्मणों ने अपना काग़ज़ी इतिहास कुछ ऐसे बनाया?
1. काल्पनिक काग़ज़ी वैदिक काल स्थापित कर ख़ुद को 3500 साल पहले आया हुआ ब्राह्मण विदेशी घोसित किया।
2. उसके बाद ख़ुद को बुद्ध का मनपसंद चेला स्थापित करने हेतु तिपितक के एडजेक्टिव बमण का अनुवाद हर जगह जातिसूचक ब्राह्मण कराया ताकी सभी लोग इतिहास पढ़ते वक्त कंफ्यूज रहे की विद्वान भिक्खू की बात हो रही या पिछले हज़ार साल में पनपे जातिवादी ब्राह्मण की।
3. इतिहास के जीतने भी बौद्ध भिक्खू हुए उन्हें ब्राह्मण बताना सुरू किया ताकी लोग यह समझे की इतिहास में जीतने भी बुद्धिस्ट लोगो ने दुनिया भर में परचम फैलाया वो ब्राह्मण थे। सोचने वाली बात है कि बुद्धिस्ट भिक्खुओं के सबूत मिले उनके विश्वविद्यालय भी मिले लेकिन जातिवादी ब्राह्मण का न कोई राजा मिला न कोई गुरुकुल। और आज सारे ब्राह्मण ग्रंथ बुद्ध को गाली देते नज़र आते है।
4. मुस्लिम साम्राज्य में ब्राह्मण संस्कृत में अल्लाहउपनीषद और मुग़ल को पिछले जन्म का अपने ब्राह्मण भाई बताने लगा।
5. वही ब्राह्मण जो ख़ुद को बुद्ध का शिष्य बता रहा था अब उसने ये तक नहीं लिखा की बौद्ध विश्वविद्यालय कब और किसने जलाया, बौद्ध कैसे ख़त्म हुए। जब उसके बाप दादे बुद्ध के शिष्य थे तो अपने बाप दादो के इतिहास क्यों ग़ायब किया? हालाँकि वो काल्पनिक पुराण काल्पनिक वेद, उपनिषद् रामायण महाभारत गीता धर्म शास्त्र लिखने लगा और भारतीय मूल लोगो को शूद्र वैश्य कहके स्त्री सहित सबको नीच पापयोनी गाली देने लगा। क्षत्रिय को नीचा दिखाने हेतु उन्हें ब्राह्मणों के नियोग पुत्र महाभारत आदिपर्व में लिखा।
6. फिर काल्पनिक वेद को भारत का इतिहास बताने लगा फिर मुग़लों और बाद में अंग्रेजों ने पूछा की भारत के लोग तो पाली पाक्कित बोलते थे तो संस्कृत में लिखी वेद उपनिषद् धरम ग्रंथ उनका इतिहास कैसे हुआ तब वह यह प्रचारित करने लगा की ईश्वर की आज्ञा है सिर्फ़ ब्राह्मण पीढ़ी दर पीढ़ी गपोड़ेगा और शूद्र स्त्री को पढ़ने लिखने का हक़ नहीं है और क्षत्रिय वैश्य को पढ़ाने का हक़ नहीं इसलिए ये लोग ये सारी बाते नहीं जानते। शूद्र वैश्य के कान में शीशा पिघला कर डालने और जीभ काटने की बात करने लगा।
अब यहाँ सवाल यह है कि ब्राह्मणों को धम्म लिपि आती नहीं थी तो वो बुद्ध का सबसे ज़्यादा पसंद चेला कैसे था?
गुप्त वंश की लिपि 1812AD , 1817AD के क़रीब फ्लीट ने पढ़ी। सम्राट असोक की लिपि 1837AD में जेम्स प्रिंसेप ने पढ़ी।
बुद्ध का जन्म ब्राह्मणों ने कापिलवस्तु न बता कर कीटक बता सबको भ्रमित किया यही नहीं बोधिस्तवों
की मूर्तियों को तरह तरह के देवी देवता बता कर बुद्ध का भारत का इतिहास ग़ायब करने की कोशिश की।
सबसे बड़ा सवाल है काल्पनिक काग़ज़ी वैदिक काल में जब न कोई मंदिर था न ही कोई मूर्ति तो फिर ब्राह्मणों ने अपने ब्रह्मा के दिये वैदिक ज्ञान को नकार कर मुस्लिम साशन में बुद्ध और बोधिस्त्वों को देवी देवता बता मूर्ति पूजा क्यों शुरू की?
ब्राह्मणों के किस अवतार ने उनका धर्मपरिवर्तन करा मूर्ति पूजा शुरू करवाया?
ध्यान से सुनिये SC ST OBC के पेट और पीठ में कैसे छुरा मारा है मोदी सरकार ने?
@DrLaxman_Yadav को मिले RTI के जवाब पर BJP ख़ामोश।
तुम लोग SC ST OBC से नफ़रत क्यों करते हो भाजपाईयों?
🚨केंद्र सरकार अपने विश्वविद्यालयों में SC, ST, OBC के ख़ाली पड़े 80% तक पदों को भर क्यों नहीं रही है? कौन है ज़िम्मेदार?
नौकरी देने में जातिवाद करने वाले सभी वाइस चांसलर बर्खास्त किए जाएँ और जेल में डाले जाएँ। और शिक्षा मंत्री @dpradhanbjp किस बात के ओबीसी है, अगर उनका कुछ चलता ही नहीं है। और @narendramodi ही क्या कर रहे हैं?