वीमेन आयुष्य आर्गेनाइजेशन (WAO), 'आयुष्य मन्दिरम्' की एक समर्पित महिला इकाई है। इसका मूल उद्देश्य महिलाओं के समग्र स्वास्थ्य (Holistic Health), स्वच्छता और सशक्
Women Ayushya Organisation (WAO) का उद्देश्य महिलाओं के स्वास्थ्य, योग एवं सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है।
किसी भी प्रकार के भ्रम/आपत्ति से पहले इसकी आधिकारिक स्थिति अवश्य देखें👇
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🌿 11वें आयुर्वेद दिवस के लिए २ दिन शेष: राष्ट्रीय पादप औषधीय बोर्ड (NMPB) ने औषधीय पौधों के संरक्षण एवं संवर्धन से जुड़े परियोजना प्रस्ताव आमंत्रित किए
नई दिल्ली | आयुष्य पथ
11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय पादप औषधीय बोर्ड (NMPB), आयुष मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा औषधीय पौधों के संरक्षण, विकास एवं सतत प्रबंधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से परियोजना प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं।
11वें आयुर्वेद दिवस की थीम “Ayurveda for a Healthier Tomorrow” के व्यापक उद्देश्य से जुड़ी यह पहल देश की औषधीय पादप संपदा के संरक्षण तथा उसके वैज्ञानिक एवं सतत उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण है।
NMPB की “Conservation, Development and Sustainable Management of Medicinal Plants” केंद्रीय क्षेत्र योजना के अंतर्गत औषधीय पौधों के संरक्षण एवं संसाधन संवर्धन से संबंधित विभिन्न गतिविधियों के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत किए जा सकते हैं।
🌱 किन गतिविधियों के लिए प्रस्ताव?
1️⃣ Medicinal Plants Conservation and Development Areas (MPCDAs) की स्थापना
औषधीय पादप संरक्षण एवं विकास क्षेत्रों की स्थापना के लिए परियोजनाएं प्रस्तावित की जा सकती हैं। NMPB के दिशा-निर्देशों के अनुसार सामान्यतः एक MPCDA का क्षेत्र लगभग 200 हेक्टेयर होना चाहिए।
MPCDA की स्थापना के लिए ₹20,000 प्रति हेक्टेयर की दर से 100% केंद्रीय सहायता का प्रावधान है।
2️⃣ मौजूदा MPCDAs की समीक्षा एवं सुदृढ़ीकरण
NMPB अथवा अन्य योजनाओं के अंतर्गत पहले से स्थापित और तीन वर्ष से अधिक पुराने संरक्षण क्षेत्रों के पुनरीक्षण, दस्तावेजीकरण, संरक्षण व्यवस्था को मजबूत करने, जियो-रेफरेंसिंग तथा संबंधित विकास गतिविधियों के लिए भी सहायता का प्रावधान है।
ऐसे क्षेत्रों के लिए सहायता का मानक ₹5,000 प्रति हेक्टेयर तक निर्धारित है।
3️⃣ औषधीय पादप संसाधन संवर्धन
स्थानीय औषधीय एवं सुगंधित पौधों की उपलब्धता तथा प्राकृतिक संसाधनों को मजबूत करने के लिए In-situ Resource Augmentation सहित संसाधन संवर्धन संबंधी गतिविधियों को भी योजना के अंतर्गत समर्थन दिया जाता है।
4️⃣ JFMCs एवं स्थानीय संस्थाओं को सहायता
औषधीय पौधों के संरक्षण और उनके स्थानीय स्तर पर उपयोग से जुड़ी गतिविधियों के लिए Joint Forest Management Committees (JFMCs) तथा संबंधित स्थानीय संस्थाओं को सहायता प्रदान करने का प्रावधान है।
इसमें मूल्य संवर्धन एवं प्राथमिक प्रसंस्करण से जुड़ी सुविधाओं, जैसे सुखाने के प्रांगण, भंडारण एवं अन्य आवश्यक आधारभूत सुविधाओं के विकास को प्रोत्साहन दिया जा सकता है।
🏞️ कौन प्रस्तुत कर सकता है प्रस्ताव?
NMPB के आधिकारिक दिशा-निर्देशों के अनुसार संरक्षण से संबंधित परियोजनाओं के लिए State Forest/Wildlife Departments तथा Forest Development Corporations सहित पात्र संस्थाओं के लिए प्रावधान हैं। कुछ गतिविधियों के लिए अनुसंधान संस्थानों, विश्वविद्यालयों एवं अन्य पात्र संस्थाओं की भी भूमिका निर्धारित है।
NMPB के अनुसार संरक्षण एवं संसाधन संवर्धन से संबंधित प्रस्तावों के लिए संबंधित राज्य सरकार की अनुमति आवश्यक हो सकती है। प्रस्तावित क्षेत्रों का site-wise विवरण, geographical coordinates तथा KML files भी आवश्यक दस्तावेजों में शामिल हो सकते हैं।
💻 ऑनलाइन आवेदन
इच्छुक एवं पात्र संस्थाएं निर्धारित प्रारूप एवं प्रक्रिया के अनुसार ऑनलाइन परियोजना प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकती हैं।
ऑनलाइन पोर्टल:
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🌿 औषधीय पादप संरक्षण क्यों महत्वपूर्ण?
भारत की आयुष एवं पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में औषधीय पौधों का विशेष महत्व है। इनके प्राकृतिक आवासों का संरक्षण, संसाधनों का सतत प्रबंधन, वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण तथा स्थानीय समुदायों की भागीदारी औषधीय पादप क्षेत्र को दीर्घकालिक रूप से मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
NMPB के अनुसार बोर्ड का व्यापक दायित्व औषधीय पौधों से संबंधित संरक्षण, संवर्धन, व्यापार एवं विकास के लिए नीतियों और कार्यक्रमों को सहयोग एवं समन्वय प्रदान करना है।
11 वें आयुर्वेद दिवस से ठीक पहले यह परियोजना आमंत्रण औषधीय पादप संरक्षण, वैज्ञानिक अनुसंधान, सतत प्रबंधन और आयुष क्षेत्र की प्राकृतिक संसाधन-आधारित आधारभूत संरचना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा सकता है।
आयुष्य पथ न्यूज — आयुष, Ayurveda, औषधीय पौधों, अनुसंधान एवं स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों और आधिकारिक अपडेट्स को लगातार आप तक पहुंचा रहा है।
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आयुष्य पथ स्वतंत्र न्यूज
राष्ट्रीय पादप औषधीय बोर्ड (NMPB) के अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ की 87वीं प्रोजेक्ट स्क्रीनिंग कमेटी (PSC) की बैठक संपन्न
आयुष मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत राष्ट्रीय पादप औषधीय बोर्ड (NMPB) के अनुसंधान एवं विकास (Research & Development) प्रभाग की 87वीं प्रोजेक्ट स्क्रीनिंग कमेटी (PSC) की बैठक 18 सितंबर 2026 को आयोजित की गई।
इस महत्वपूर्ण बैठक में औषधीय एवं सुगंधित पौधों से संबंधित संरक्षण, संवर्धन, वैज्ञानिक अनुसंधान तथा विकास के क्षेत्र में प्रस्तुत विभिन्न नवीन परियोजना प्रस्तावों की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक के दौरान औषधीय पादप क्षेत्र से जुड़े अनुसंधान प्रस्तावों के वैज्ञानिक एवं तकनीकी पहलुओं पर विचार किया गया। ऐसे अनुसंधान कार्यों का उद्देश्य देश में उपलब्ध औषधीय पादप संसाधनों के वैज्ञानिक अध्ययन, संरक्षण एवं सतत उपयोग को बढ़ावा देना है।
औषधीय पादप क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण पहल
भारत में औषधीय पौधे आयुष प्रणालियों की आधारभूत आवश्यकताओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में इनके संरक्षण, गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री, वैज्ञानिक अध्ययन, सतत संवर्धन तथा अनुसंधान को प्रोत्साहित करने वाली परियोजनाओं का विशेष महत्व है।
NMPB के अनुसंधान एवं विकास संबंधी प्रयासों के माध्यम से औषधीय पादप क्षेत्र में वैज्ञानिक प्रमाण, अनुसंधान क्षमता और गुणवत्तापूर्ण ज्ञान को मजबूत करने की दिशा में कार्य किया जाता है।
87वीं PSC बैठक भी इसी व्यापक उद्देश्य के अंतर्गत विभिन्न परियोजना प्रस्तावों की समीक्षा और उनके वैज्ञानिक महत्व पर विचार करने की प्रक्रिया का हिस्सा रही।
औषधीय पादप संसाधनों के संरक्षण और उनके वैज्ञानिक विकास को मजबूत करना न केवल आयुष क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे अनुसंधान संस्थानों, शिक्षण संस्थानों, किसानों, औषधीय पादप उत्पादकों तथा संबंधित हितधारकों के लिए भी नए अवसर विकसित हो सकते हैं।
आयुष्य पथ स्वतंत्र न्यूज औषधीय पौधों, आयुष, अनुसंधान एवं पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों से संबंधित महत्वपूर्ण गतिविधियों और आधिकारिक अपडेट्स को अपने पाठकों तक पहुंचाता रहेगा।
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🌿 11वें आयुर्वेद दिवस के लिए 4 दिन शेष: आज का विशेष औषधीय पौधा — शिरीष
राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB), आयुष मंत्रालय, भारत सरकार की जानकारी के अनुसार, 11वें आयुर्वेद दिवस की थीम “Ayurveda for a Healthier Tomorrow” (स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद) के अंतर्गत आज के विशेष औषधीय पौधे के रूप में शिरीष (Shirish) की जानकारी साझा की गई है।
🌱 शिरीष — Albizia lebbeck (L.) Benth.
🔹 पारंपरिक औषधीय उपयोग: शिरीष का पारंपरिक रूप से दमा, ब्रोंकाइटिस, खांसी और घरघराहट जैसी श्वसन संबंधी समस्याओं के साथ-साथ कुछ त्वचा विकारों तथा सामान्य घावों के संदर्भ में उपयोग किया जाता रहा है।
🔹 उपयोगी भाग: फल, पत्तियां, बीज और छाल
🔹 रोपण का समय: जुलाई–अगस्त
🔹 वनस्पति का प्रकार: पर्णपाती, बारहमासी वृक्ष
🌿 औषधीय पौधों का संरक्षण, वैज्ञानिक खेती और पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण स्वस्थ एवं टिकाऊ भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
📌 स्रोत: @nmpb1 | राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB), आयुष मंत्रालय
आयुष्य पथ न्यूज़
ज्ञान • स्वास्थ्य • आयुष • प्रकृति
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🌿🧘♀️ AIIA ने केंद्रीय विद्यालय, NTPC बदरपुर में PMOS जागरूकता शिविर आयोजित किया
11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), नई दिल्ली के स्त्री रोग एवं प्रसूति तंत्र (SRPT) विभाग द्वारा केंद्रीय विद्यालय, NTPC बदरपुर में PMOS (Polyendocrine Metabolic Ovarian Syndrome) पर जागरूकता शिविर आयोजित किया गया।
कार्यक्रम AIIA के निदेशक प्रो. (वैद्य) पी.के. प्रजापति तथा SRPT विभाग की अध्यक्षा प्रो. (डॉ.) मीनाक्षी पांडे के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ।
🔹 जागरूकता व्याख्यान: किशोरियों में PMOS से संबंधित जानकारी डॉ. तेजस्विनी धीरज बुचाड़े, सहायक प्राध्यापक, SRPT विभाग द्वारा साझा की गई।
🔹 योग सत्र: नियमित माहवारी और स्वास्थ्य के संदर्भ में योगाभ्यास सत्र सुश्री सुनीला प्रधान, योग प्रशिक्षक, स्वास्थ्यवृत्त विभाग द्वारा कराया गया।
PMOS, जिसे पहले PCOS (Polycystic Ovary Syndrome) कहा जाता था, 2026 में अंतरराष्ट्रीय consensus के बाद अपनाया गया नया नाम है। यह नाम इस स्थिति के endocrine, metabolic और ovarian पहलुओं को अधिक व्यापक रूप से दर्शाता है।
🌿 किशोरियों में स्वास्थ्य-जागरूकता, समय पर जानकारी और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने की दिशा में ऐसे शैक्षिक कार्यक्रम महत्वपूर्ण हैं।
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एनएमपीबी (राष्ट्रीय पादप औषधीय बोर्ड) द्वारा परियोजना प्रस्तावों (Project Proposals) के लिए आमंत्रण**
आयुष मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय पादप औषधीय बोर्ड (NMPB MoAyush) ने राज्य वन / वन्यजीव विभागों से "औषधीय पौधों के संरक्षण, विकास और सतत प्रबंधन" (Conservation, Development and Sustainable Management of Medicinal Plants) योजना के तहत परियोजना प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं।
मुख्य गतिविधियां (Key Activities for Proposals):
1. MPCDAs (औषधीय पादप संरक्षण और विकास क्षेत्र): औषधीय पौधों के घनत्व और प्रजातियों के संरक्षण हेतु MPCDAs की स्थापना (लागत मानदंड: ₹20,000/- प्रति हेक्टेयर)।
2. मौजूदा MPCDAs की समीक्षा: वन क्षेत्रों में मौजूद मौजूदा MPCDAs की वर्तमान स्थिति और गतिविधियों की समीक्षा (लागत मानदंड: ₹5,000/- प्रति हेक्टेयर)।
3. संसाधन संवर्धन (Resource Augmentation): औषधीय पौधों का संसाधन संवर्धन।
4. JFMCs (संयुक्त वन प्रबंधन समितियां): मूल्य संवर्धन सुविधाओं (जैसे सुखाने का प्रांगण, भंडारण गोदाम आदि) के सृजन हेतु सहायता (लागत मानदंड: ₹15,000,000/- प्रति JFMC)।
आवेदन कैसे करें (How to Submit):
• इच्छुक विभाग निर्धारित प्रारूप में अपने प्रोजेक्ट प्रस्ताव ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से जमा कर सकते हैं।
• वेबलिंक: https://t.co/gPgqKNfs73
• परिचालन दिशानिर्देश (Operational Guidelines) NMPB की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।
यह पहल देश भर में औषधीय पौधों के संरक्षण, सतत विकास और हर्बल सेक्टर को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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@PreetiSharmaDel 🌺 सुप्रभात 🙏
मेरे इष्ट श्री गणेश जी के चरणों में नमन।
उनकी कृपा से जीवन के सभी विघ्न दूर हों,
बुद्धि को विवेक, कर्म को शक्ति और हृदय को विनम्रता मिले।
हर नए कदम पर उनका आशीर्वाद साथ रहे। 🙏✨
गणपति बप्पा मोरया! 🌺
🌿 11वें आयुर्वेद दिवस की उल्टी गिनती: 8 दिन शेष
थीम: “Ayurveda for Healthier Tomorrow”
नेशनल मेडिसिनल प्लांट्स बोर्ड (NMPB), आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के आधिकारिक अपडेट के अनुसार, आज के Medicinal Plant of the Day के रूप में वत्सनाभ (Vatsanabha – Aconitum chasmanthum Stapf ex Holmes) को प्रस्तुत किया गया है।
🔹 औषधीय उपयोग: पारंपरिक आयुर्वेदिक संदर्भों में वत्सनाभ का उल्लेख ज्वर, तंत्रिका-शूल, गले के दर्द तथा कुछ पाचन संबंधी विकारों में किया गया है।
🔹 प्रयुक्त भाग: राइजोम (Rhizome)
🔹 वनस्पति प्रकृति: बारहमासी जड़ी-बूटी (Perennial Herb)
🔹 रोपण का समय: मार्च–अप्रैल
⚠️ महत्वपूर्ण सुरक्षा सूचना: वत्सनाभ Aconitum वंश का अत्यंत विषैला पौधा है। इसका कच्चा/अनुचित सेवन गंभीर विषाक्तता उत्पन्न कर सकता है। औषधीय प्रयोग केवल उचित शोधन, मानकीकरण तथा योग्य आयुर्वेद चिकित्सक की देखरेख में ही किया जाना चाहिए। इसे स्वयं सेवन करने की सलाह नहीं दी जाती।
🌱 औषधीय पौधों की वैज्ञानिक जानकारी, संरक्षण और सुरक्षित उपयोग के प्रति जागरूकता आयुर्वेद की समृद्ध परंपरा को सुरक्षित भविष्य से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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🌿🏛️ औषधीय पादप क्षेत्र को नई गति: NMPB CEO ने भुवनेश्वर में SMPB ओडिशा के कार्यों की समीक्षा की
राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB), आयुष मंत्रालय के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) प्रो. (डॉ.) महेश कुमार दाधीच ने 11 सितंबर 2026 को भुवनेश्वर स्थित अरण्य भवन में राज्य औषधीय पादप बोर्ड (SMPB), ओडिशा के कार्यों, प्रगति और आगामी योजनाओं की समीक्षा की।
बैठक में औषधीय पादपों की खेती, कृषक हित, गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री तथा जन-जागरूकता से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।
🌿 समीक्षा के प्रमुख केंद्र-बिंदु
🔹 कृषक कल्याण और बाजार संपर्क
औषधीय पादपों की खेती से जुड़े किसानों की आय बढ़ाने, बाजार से बेहतर जुड़ाव विकसित करने तथा मूल्य संवर्धन और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
🔹 गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री
औषधीय पौधों की पहचान, गुणवत्ता और उत्पादकता को बेहतर बनाए रखने के लिए प्रमाणित बीज एवं गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने से जुड़े विषयों की समीक्षा की गई।
🔹 स्थानीय भाषा में जन-जागरूकता
कृषक समुदाय और आम नागरिकों तक औषधीय पादपों से संबंधित विश्वसनीय एवं वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने के लिए स्थानीय भाषा में IEC (Information, Education and Communication) सामग्री विकसित करने की आवश्यकता पर चर्चा की गई।
🔹 11th World Ayurveda Congress 2026 में सहभागिता
आगामी 11वीं विश्व आयुर्वेद कांग्रेस (11th World Ayurveda Congress 2026) में ओडिशा की समृद्ध औषधीय पादप संपदा और राज्य की सहभागिता को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की तैयारियों पर भी चर्चा हुई।
🌱 औषधीय पादपों का संरक्षण, वैज्ञानिक खेती, किसानों का सशक्तिकरण और बेहतर बाजार व्यवस्था—इन सभी के समन्वित प्रयास पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के सतत विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
आयुष्य पथ न्यूज़ डेस्क
ज्ञान • स्वास्थ्य • आयुष • नीति • शिक्षा
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🌿🏛️ ‘Medicinal Plants as Nature Pharmacy’: भुवनेश्वर में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ
भुवनेश्वर: ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में “Medicinal Plants as Nature Pharmacy” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। संगोष्ठी में औषधीय पादपों के संरक्षण, संवर्धन, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, अनुसंधान तथा पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में उनके वैज्ञानिक एवं साक्ष्य-आधारित उपयोग से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।
🌿 प्रमुख वक्ताओं की गरिमामयी उपस्थिति
🔹 मुख्य वक्ता: प्रो. (डॉ.) महेश कुमार दाधीच, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO), राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB), आयुष मंत्रालय
🔹 मुख्य अतिथि: प्रो. वैद्य रबिनारायण आचार्य, महानिदेशक (DG), केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद् (CCRAS)
🔬 संगोष्ठी में प्रमुख विमर्श
1. औषधीय पादपों का संरक्षण एवं संवर्धन
औषधीय वनस्पतियों की जैव-विविधता के संरक्षण, सतत उपयोग तथा गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री और खेती को प्रोत्साहित करने पर जोर।
2. गुणवत्ता और आपूर्ति श्रृंखला
औषधीय पादपों की पहचान, गुणवत्ता नियंत्रण, प्रसंस्करण तथा विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने से जुड़े विषयों पर चर्चा।
3. अनुसंधान और साक्ष्य-आधारित उपयोग
पारंपरिक ज्ञान एवं औषधीय पादपों से संबंधित दावों के वैज्ञानिक मूल्यांकन, अनुसंधान और प्रमाण-आधारित उपयोग को बढ़ावा देने पर विचार।
4. पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण
पारंपरिक औषधीय ज्ञान के दस्तावेजीकरण और उसके संरक्षण के साथ आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के समन्वय की आवश्यकता पर बल।
🌱 औषधीय पादप भारत की समृद्ध जैव-सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनके संरक्षण, वैज्ञानिक अनुसंधान और सतत उपयोग के माध्यम से पारंपरिक ज्ञान तथा आधुनिक विज्ञान के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकता है।
🇮🇳 प्रकृति की संपदा का संरक्षण • वैज्ञानिक अनुसंधान • गुणवत्तापूर्ण उपयोग
न्यूज़ डेस्क | आयुष्य पथ
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🍎🍌 ऋतु के अनुसार आहार, स्वस्थ जीवन का आधार: ‘पोषण माह 2026’ में मौसमी फलों को अपनाने का संदेश
#SahiPoshanSwasthJeevan और #PoshanMaah2026 अभियान के संदर्भ में स्थानीय एवं मौसमी फलों को दैनिक आहार में शामिल करने का संदेश दिया जा रहा है। भारतीय आहार परंपरा और आयुर्वेद के ऋतुचर्या सिद्धांत में भी ऋतु, स्थान और व्यक्ति की प्रकृति के अनुरूप आहार-विहार अपनाने पर विशेष बल दिया गया है।
🌿 सितंबर में उपलब्ध प्रमुख मौसमी फल और उनके पोषण संबंधी गुण:
🍎 सेब (Apple): आहार-वसा रहित प्राकृतिक फाइबर और विभिन्न एंटीऑक्सीडेंट यौगिकों का स्रोत। संतुलित आहार में इसका सेवन पाचन एवं समग्र स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकता है।
🍐 नाशपाती (Pear): जल और आहार फाइबर से भरपूर फल, जो संतुलित आहार में पाचन स्वास्थ्य के लिए उपयोगी विकल्प है।
🍋 मौसमी/मीठा नींबू (Sweet Lime): जल एवं विटामिन C का अच्छा स्रोत। गर्म मौसम में शरीर के जल संतुलन को बनाए रखने में सहायक फल के रूप में इसे आहार में शामिल किया जा सकता है।
🍌 केला (Banana): कार्बोहाइड्रेट, पोटैशियम और अन्य पोषक तत्वों का स्रोत। यह ऊर्जा प्रदान करने वाले सरल और सुविधाजनक फलों में से एक है।
🌱 प्रकृति के साथ तालमेल, आहार में संतुलन
स्थानीय, ताजे और ऋतु के अनुकूल फलों को अपने संतुलित दैनिक आहार का हिस्सा बनाएं। फल किसी एक रोग के उपचार का विकल्प नहीं हैं; बल्कि विविध और संतुलित आहार, पर्याप्त जल, नियमित शारीरिक गतिविधि तथा स्वस्थ जीवनशैली के साथ उनका सेवन बेहतर पोषण में योगदान देता है।
सही पोषण • स्वस्थ जीवन • प्रकृति के साथ सामंजस्य 🌿🍎🍐🍋🍌
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🧘♀️🌿 तनाव को पीछे छोड़ें, विश्राम को अपनाएं: मानसिक शांति और तंत्रिका तंत्र के संतुलन में सहायक ‘शवासन’
आयुष मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा #Yoga365 अभियान के अंतर्गत योग के विभिन्न अभ्यासों के महत्व और स्वास्थ्य संबंधी उपयोगिता को जनसामान्य तक पहुंचाया जा रहा है। इसी क्रम में ‘शवासन’ (Shavasana) ऐसा सरल योगाभ्यास है, जिसका मुख्य उद्देश्य शरीर और मन को गहरे एवं सजग विश्राम की अवस्था में ले जाना है।
🌿 शवासन के प्रमुख लाभ
🔹 गहन मनो-कायिक विश्राम
शवासन शरीर की अनावश्यक मांसपेशीय जकड़न को कम करने और विश्राम की अनुभूति बढ़ाने में सहायक हो सकता है। इसके दौरान श्वास और हृदय गति स्वाभाविक रूप से अधिक शांत एवं सहज हो सकती है।
🔹 तनाव और मानसिक थकान के प्रबंधन में सहायक
नियमित एवं सही तरीके से किया गया शवासन दैनिक तनाव, मानसिक थकान और अत्यधिक मानसिक सक्रियता को कम करने तथा मन को शांत करने में सहायता कर सकता है।
🔹 सजग विश्राम और अंतर्मुखी चेतना
शवासन में शरीर को स्थिर रखते हुए श्वास तथा शारीरिक संवेदनाओं के प्रति सजग रहने का अभ्यास किया जाता है। इससे ध्यान को बाहरी गतिविधियों से हटाकर भीतर की अनुभूति की ओर ले जाने में सहायता मिलती है।
🔹 स्वायत्त तंत्रिका तंत्र पर विश्रामकारी प्रभाव
विश्राम-आधारित योगाभ्यासों के माध्यम से शरीर की विश्राम प्रतिक्रिया को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे तनाव की शारीरिक अनुभूति कम होने में सहायता मिलती है।
⚠️ अभ्यास में सावधानी
शवासन का अभ्यास शांत, हवादार और आरामदायक स्थान पर करें। शरीर को जबरन स्थिर रखने के बजाय उसे स्वाभाविक रूप से ढीला और सहज छोड़ें। यदि पीठ के बल लेटना असुविधाजनक हो, तो आवश्यकतानुसार शरीर को सहारा दिया जा सकता है।
योग चिकित्सा का विकल्प नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण अंग है। किसी विशेष स्वास्थ्य समस्या या गंभीर लक्षण की स्थिति में योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है।
🌿 कुछ मिनटों का सजग विश्राम भी दिनचर्या में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत हो सकता है।
🧘♂️ योग अपनाएं — शरीर को विश्राम दें, मन को विराम दें।
आयुष्य पथ | ज्ञान • स्वास्थ्य • योग • आयुष
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🌿🇮🇳 आयुर्वेद हमारी अनमोल विरासत: प्रामाणिक चिकित्सा पद्धति के रूप में वैश्विक पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत है आयुष मंत्रालय — राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु
नई दिल्ली | आयुष्य पथ न्यूज़ डेस्क
आयुर्वेद दिवस 2026 के अवसर पर, जिसकी थीम “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” (Ayurveda for a Healthier Tomorrow) है, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का प्रेरणादायी संदेश साझा किया गया है।
राष्ट्रपति ने आयुर्वेद को भारत की प्राचीन और समृद्ध स्वास्थ्य परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए इसके वैश्विक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद मन, शरीर और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करने वाली समग्र स्वास्थ्य-दृष्टि पर केंद्रित है।
> “आयुर्वेद विश्व की सबसे प्राचीन समग्र चिकित्सा प्रणालियों में से एक है। यह मन, शरीर और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करने पर केंद्रित है। आयुर्वेद चिकित्सा प्रणाली हमारी साझी विरासत है, और आयुष मंत्रालय इस विरासत को एक प्रामाणिक चिकित्सा पद्धति के रूप में वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।”
— श्रीमती द्रौपदी मुर्मु, माननीय राष्ट्रपति, भारत गणराज्य
🌿 आयुर्वेद की समग्र स्वास्थ्य-दृष्टि
आयुर्वेद का दृष्टिकोण केवल रोग-प्रबंधन तक सीमित नहीं है। स्वस्थ जीवन, संतुलित आहार-विहार, दिनचर्या, ऋतुचर्या तथा शरीर और मन के संतुलन को इसके व्यापक स्वास्थ्य-दर्शन का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।
🔬 परंपरा से प्रमाण तक
आयुर्वेद की प्राचीन ज्ञान-परंपरा को आधुनिक अनुसंधान, गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रमाण-आधारित अध्ययन से जोड़ना आज इसके वैश्विक विकास का महत्वपूर्ण पक्ष है। इससे आयुर्वेद के सिद्धांतों और प्रथाओं की प्रामाणिकता, गुणवत्ता तथा विश्वसनीयता को मजबूत करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
🌏 ‘One Health, One Future’ की व्यापक दृष्टि
आयुर्वेद दिवस 2026 के आयोजन के माध्यम से भारत की पारंपरिक स्वास्थ्य विरासत को व्यापक जनसमुदाय तक पहुँचाने तथा स्वस्थ भविष्य की दिशा में समग्र स्वास्थ्य-दृष्टिकोण को बढ़ावा देने का संदेश दिया जा रहा है।
आयुर्वेद केवल हमारी प्राचीन विरासत नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन की भारतीय ज्ञान-परंपरा का महत्वपूर्ण अध्याय है। इस विरासत के संरक्षण, प्रामाणिकता और जिम्मेदार वैश्विक प्रसार में समाज की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।
🌿 आयुर्वेद को जानें • प्रमाणिक ज्ञान को अपनाएँ • स्वस्थ भविष्य की ओर बढ़ें।
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🌿🧂 मसालों की एक चुटकी — स्वाद से कहीं अधिक!
हमारे रोज़मर्रा के मसाले केवल भोजन का स्वाद और सुगंध ही नहीं बढ़ाते, बल्कि भारतीय परंपरा में उन्हें उनके विभिन्न पारंपरिक स्वास्थ्य एवं पाचन संबंधी उपयोगों के लिए भी महत्व दिया गया है।
Nutrition Week 2026 के अवसर पर आयुष मंत्रालय का यह संदेश हमें याद दिलाता है कि संतुलित एवं पौष्टिक आहार केवल क्या खाएं तक सीमित नहीं है, बल्कि भोजन में प्रयुक्त मसालों को समझना और उनके गुणों के प्रति जागरूक होना भी महत्वपूर्ण है।
🌶️ Know your spices. Know their goodness.
🌿 मसालों को जानिए, उनके गुणों को समझिए और भोजन का विवेकपूर्ण चुनाव कीजिए।
समग्र स्वास्थ्य के लिए पारंपरिक ज्ञान, पोषण जागरूकता और सूचित आहार-विकल्प—तीनों का संतुलन आवश्यक है।
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🌿🍈 आज का औषधीय पौधा: बिल्व / बेल (Aegle marmelos) — पाचन एवं समग्र स्वास्थ्य में पारंपरिक उपयोग
राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB), आयुष मंत्रालय की Today’s Medicinal Plant श्रृंखला में भारतीय परंपरा एवं आयुर्वेद में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले बिल्व (बेल) के औषधीय महत्व की जानकारी साझा की गई है।
🔹 वानस्पतिक नाम: Aegle marmelos (L.) Correa
🔹 कुल: Rutaceae
🔹 सामान्य नाम: बेल / बिल्व / Bael
🔹 प्रयुक्त भाग: फल, पत्र एवं मूल
🔹 स्वरूप: मध्यम आकार का पर्णपाती वृक्ष, त्रिपत्रीय सुगंधित पत्तियों एवं सुगंधित पुष्पों वाला।
🩺 प्रमुख पारंपरिक उपयोग एवं अध्ययनित गुण
• पाचन स्वास्थ्य: बिल्व फल का उपयोग आयुर्वेदिक परंपरा में अतिसार एवं पेचिश जैसी पाचन संबंधी स्थितियों में किया जाता रहा है।
• रोगाणुरोधी गुण: बिल्व के विभिन्न भागों में antimicrobial गतिविधियों का वैज्ञानिक अध्ययन किया गया है।
• सूजनरोधी क्षमता: इसके विभिन्न जैव सक्रिय घटकों के anti-inflammatory प्रभावों पर भी शोध उपलब्ध है।
• श्वसन स्वास्थ्य: बिल्व के कुछ औषधीय प्रभावों का श्वसन तंत्र के संदर्भ में भी अध्ययन किया गया है।
🌿 परंपरागत ज्ञान + वैज्ञानिक अनुसंधान = औषधीय पादपों के जिम्मेदार उपयोग की दिशा
औषधीय पौधों का उपयोग उनकी पहचान, उचित मात्रा, प्रयुक्त भाग और व्यक्ति की स्वास्थ्य-स्थिति को ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञ मार्गदर्शन में किया जाना चाहिए।
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🧬🌿 ICMR–AYUSH सहयोग को नई गति: पारंपरिक चिकित्सा में Evidence-Based Research पर जोर
बेलगावी: पारंपरिक चिकित्सा में साक्ष्य-आधारित अनुसंधान को आगे बढ़ाने और ICMR तथा AYUSH के बीच सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से ICMR–AYUSH उच्चस्तरीय बैठक ICMR–NITM, बेलगावी में आयोजित की गई।
बैठक में वैद्य राजेश कोटेचा, सचिव, आयुष मंत्रालय; डॉ. राजीव बहल, सचिव, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (DHR) एवं महानिदेशक, ICMR; डॉ. एन. जे. मुथुकुमार, महानिदेशक, CCRS; डॉ. एन. श्रीकांत, उप महानिदेशक, CCRAS; तथा डॉ. सुबर्णा रॉय, निदेशक, ICMR–NITM सहित ICMR, CCRAS, CCRS और AIIA के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में चल रहे अनुसंधान की प्रगति की समीक्षा, आगामी चरण के लिए प्राथमिकता वाले शोध क्षेत्रों की पहचान तथा Evidence-Based Traditional Medicine के लिए संस्थागत सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा हुई।
🤝 महत्वपूर्ण संस्थागत पहल:
ICMR–NITM और CCRS तथा ICMR–NITM और AIIA के बीच Memorandum of Agreements (MoAs) पर हस्ताक्षर किए गए।
इन समझौतों का उद्देश्य सहयोगात्मक अनुसंधान, क्षमता निर्माण तथा अनुसंधान परिणामों को evidence-based healthcare solutions में परिवर्तित करते हुए सार्थक public health impact की दिशा में आगे बढ़ना है।
📰 आयुष्य पथ न्यूज़ | स्वास्थ्य • आयुष • अनुसंधान • नीति
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🌿🔴 औषधीय पौधा: गुंजा (Gunja / Rosary Pea) — पारंपरिक औषधीय उपयोग और आवश्यक सावधानियाँ
राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB), आयुष मंत्रालय द्वारा 23 सितंबर 2026 को आयुर्वेद दिवस के अवसर पर चलाए जा रहे जागरूकता अभियान की शृंखला में पारंपरिक औषधीय पौधे गुंजा के वानस्पतिक स्वरूप, पारंपरिक उपयोग तथा सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई है।
🌿 वानस्पतिक एवं सामान्य परिचय
• वानस्पतिक नाम: Abrus precatorius L.
• सामान्य नाम: गुंजा / रत्ती / Rosary Pea
• प्रकृति: आरोही लता
• पारंपरिक रूप से प्रयुक्त भाग: बीज, पत्र एवं मूल
• रोपण का उपयुक्त समय: मार्च से अगस्त
🩺 पारंपरिक औषधीय उपयोग
आयुर्वेदिक परंपरा में शोधित गुंजा का उपयोग विभिन्न औषधीय योगों में किया जाता रहा है। पारंपरिक संदर्भों में इसका उल्लेख—
• संधि एवं मांसपेशीय समस्याओं में बाह्य/औषधीय प्रयोग के लिए
• कुछ त्वचा विकारों में
• इंद्रलुप्त (केश झड़ने) जैसे विकारों में पारंपरिक प्रयोग के लिए
• कुछ पारंपरिक योगों में वात एवं तंत्रिका संबंधी विकारों के संदर्भ में
किया गया है।
⚠️ अत्यंत महत्वपूर्ण सुरक्षा चेतावनी
गुंजा के कच्चे बीज अत्यंत विषैले होते हैं। इनमें Abrin नामक अत्यंत विषैला पदार्थ पाया जाता है। इसलिए इसके बीजों का कच्चे अथवा अशोधित रूप में सेवन गंभीर विषाक्तता का कारण बन सकता है।
❌ गुंजा के बीजों का स्वयं सेवन न करें।
❌ घरेलू उपचार या self-medication के रूप में इसका प्रयोग न करें।
❌ केवल इंटरनेट/सोशल मीडिया की जानकारी के आधार पर इसका औषधीय प्रयोग न करें।
आयुर्वेदिक चिकित्सा में गुंजा जैसे विषद्रव्य का उपयोग उचित शोधन, निर्धारित मात्रा, उपयुक्त औषधीय योग तथा योग्य पंजीकृत आयुर्वेद चिकित्सक के मार्गदर्शन में ही किया जाना चाहिए।
🌿 औषधीय पौधे उपयोगी हो सकते हैं, लेकिन प्रत्येक औषधीय पौधा स्वतः सुरक्षित नहीं होता। परंपरा के साथ शास्त्रीय ज्ञान, उचित पहचान और क्लिनिकल सुरक्षा भी आवश्यक है।
🩺 आयुष्य पथ न्यूज़ — स्वास्थ्य जागरूकता के लिए विश्वसनीय जानकारी
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🩺🌿 डायबिटीज़ को आयुर्वेद में क्या कहा गया है? ‘प्रमेह’ और आधुनिक डायबिटीज़ के बीच क्या संबंध है?
आयुष्य पथ न्यूज़ | विशेष प्रस्तुति
डायबिटीज़ से जुड़े इन महत्वपूर्ण सवालों पर All India Institute of Ayurveda (AIIA) की ओर से एक विशेष ज्ञान-संवाद प्रस्तुत किया गया है।
संवाद में यह समझने का प्रयास किया गया है कि आयुर्वेद प्रमेह और मधुमेह को किस प्रकार देखता है तथा आधुनिक चिकित्सा में वर्णित Diabetes Mellitus के साथ इसकी अवधारणाओं का संबंध किस सीमा तक समझा जा सकता है।
इस विशेष बातचीत में चर्चा के प्रमुख विषय हैं—
🔹 आयुर्वेद में ‘प्रमेह’ की संकल्पना
🔹 ‘मधुमेह’ का आयुर्वेदिक संदर्भ
🔹 प्रमेह और आधुनिक डायबिटीज़ के बीच संबंध
🔹 आयुर्वेद में रोग के कारण और लक्षण
🔹 आहार एवं जीवनशैली की भूमिका
🔹 आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से प्रबंधन
🔹 आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के दृष्टिकोण की समझ
🎙️ अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) के निदेशक एवं विशेषज्ञ चिकित्सक के बीच विशेष बातचीत
यह संवाद आयुर्वेद की प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक चिकित्सा दृष्टिकोण के बीच एक महत्वपूर्ण विमर्श प्रस्तुत करता है।
देखिए AIIA की यह विशेष प्रस्तुति और जानिए—आयुर्वेद की दृष्टि से ‘प्रमेह’ को कैसे समझा जाता है।
स्रोत: All India Institute of Ayurveda (AIIA)
आयुष्य पथ न्यूज़
ज्ञान • संवाद • स्वास्थ्य • नीति • शिक्षा
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🏥🌿 होम्योपैथी शिक्षा एवं अनुसंधान के 50 गौरवमयी वर्ष: NIH कोलकाता के स्वर्ण जयंती समारोह में NMPB CEO की सहभागिता
राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB), आयुष मंत्रालय के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. (डॉ.) महेश कुमार दाधीच ने कोलकाता में राष्ट्रीय होम्योपैथी संस्थान (NIH) के स्वर्ण जयंती समारोह में सहभागिता की।
यह आयोजन केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव जी तथा आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा जी के मार्गदर्शन एवं गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ।
🔹 50 वर्षों की संस्थागत यात्रा: NIH कोलकाता ने पाँच दशकों में होम्योपैथी शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
🔹 आयुष संस्थानों की भूमिका: ऐसे राष्ट्रीय संस्थान भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में शिक्षा, अनुसंधान और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
🔹 औषधीय पादप क्षेत्र का अवलोकन: कोलकाता प्रवास के दौरान NMPB CEO ने जानस लाइफ साइंसेज की विनिर्माण इकाई का भी दौरा किया तथा प्राकृतिक पादप संसाधनों के मूल्य संवर्धन (Value Addition) से जुड़े पहलुओं का अवलोकन किया।
शिक्षा • अनुसंधान • नवाचार • औषधीय पादप संसाधन — आयुष क्षेत्र के समग्र विकास की दिशा में संस्थागत प्रयासों का महत्वपूर्ण आधार। 🌿🩺🇮🇳
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🌺🙏 शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं | गुरु-शिष्य परंपरा और ज्ञान का प्रस्फुटन
«यथा बीजे निहितो वृक्षः, तथा शिष्ये निहितं ज्ञानम्।
जिस प्रकार बीज में विशाल वृक्ष की संभावना निहित होती है, उसी प्रकार प्रत्येक शिष्य में असीम ज्ञान और संभावनाएं निहित होती हैं—जिन्हें समर्थ गुरु अपने मार्गदर्शन, करुणा और प्रज्ञा से प्रस्फुटित करते हैं।»
शिक्षक केवल ज्ञान प्रदान नहीं करते; वे विवेक, संस्कार, चरित्र और जीवन-दृष्टि का निर्माण करते हैं।
आयुर्वेद और योग जैसी भारतीय ज्ञान परंपराओं में गुरु-शिष्य परंपरा ने ज्ञान, अनुभव, जीवन-दर्शन और चिकित्सा-विवेक को पीढ़ी-दर-पीढ़ी संरक्षित एवं संवर्धित किया है।
सभी आचार्यों, गुरुओं, शिक्षकों और मार्गदर्शकों के प्रति कृतज्ञ नमन। 🙏
विद्या, संस्कार और स्वास्थ्य चेतना का प्रकाश फैलाने वाले सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। 🌿📚✨
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