आँखों मे आंसू आ जाते है जब ये सुनता या देखता हूं
एक मस्जिद का इमाम " जिसने सारी जिंदगी लोगो को नमाज पढ़ाई दीन का काम किया अच्छी बाते सिखाई, मुस्लिम बच्चो की रहनुमाई की, आज उसके पास इतने पैसे नहीं है की ईद जैसे बड़े त्यौहार पर अपने और बच्चो के लिए कपड़ो का इंतेज़ाम कर सके
जब मैं अमीर होने की बात करती हूं तो उसका मतलब बड़े बड़े महल बनाना नहीं होता है🤔
मेरा मतलब बस इतना काबिल होना होता है कि मैं लोगों की मदद कर सकने में सक्षम हो सकूं 👇👇