रौशन आनंद गुरु जी कह रहे ��ैं फैज़ल खान और एक प्रतिष्ठित कोल्ड स्टोर स्वामी ने साजिश करके फंसाया है!
मने इनको अपना कुछ नहीं दिखता, भाई के कर्म नहीं दिखते?
बस साजिश है!🙃
खान सर के घायल सुरक्षा कर्मी "चुनचुन कुमार" को सुनिए..
"विकास कुमार पकड़ कर बाहर लाया फिर अभिषेक और प्रिंस(रोशन सर का भाई) ने बहुत मारा और सिर फाड़ दिया"
"प्रिंस यादव" आरोपी था और गिरफ्तारी के डर से नेपाल भागा था. लेकिन उसकी मौत संदिग्ध है जिसकी जांच होनी चाहिए.
कोई ये मत कहना कि KHAN SIR ने मुझे ये पोस्ट करने का पैसा दिया है!
दरअसल "रौशन आनंद" के भाई "प्रिंस यादव" की संदिग्ध मौत को लेकर कुछ लोग सीधा- सीधा "खान सर" को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं?!
उनमें बिहार का एक बड़बोला स्वघोषित नेता "तेज प्रताप यादव" भी है जो सीधा -सीधा कह रहा है कि "प्रिंस यादव" को "खान सर" ने ही मरवाया है.
अब इनकी मानसिकता जैसी भी हो लेकिन आज जो शिक्षक अपने कम फीस और सिलेक्शन के नाम पर विश्व प्रसिद्ध हो
उसको फिज़ूल का दोषी बनाया जा रहा है.
प्रिंस यादव के ऊपर FIR दर्ज़ होती है जिसकी गिरफ्तारी के डर से वो नेपाल चला जाता है लेकिन वहां उसकी संदिग्ध मौत हो जाती है जो कि जांच का विषय है.
प्रिंस की मृत्यु का दुख सबको है लेकिन जांच भी तो आवश्यक है कि आखिर कैसे एक युवा की इतनी जल्दी सांसें चली गई!
इसमें खान सर कैसे जिम्मेदार हुए?!
ज��� खान सर की शादी हुई तब हम लोगों को पता चला उर्दू नाम वाला बंदा फैजल खान है।
खान सर ने तिलक लगाया, कभी हिंदू मुस्लिम नहीं होने दिया। हमेशा अपने हर एक स्टूडेंट्स के लॉयल रहे।
कभी भी जातपात भेदभाव नहीं किया। हर साल राखी बंधवाई। होली दीपावली पार्टियां दी। वीरांदावन जाकर राधे राधे किए।
कभी दाढ़ी टोपी में नहीं दिखे। ईद बकरीद पर नमाज़ पढ़ते हुए नहीं दिखे। रोजा नमाज़, हज उमराह करते हुए नहीं दिखे।
जैसे ही पता चला कि रौशन सर के साथ खान सर का आपसी विवाद चल रहा है, खान सर (फैजल खान) मुसलमान हो गए। आतंकवादी हो गए। जिहादी हो गए।
याद रखना MY समीकरण आप कमजोर कर रहे हो। टीचर को टीचर की तरह देखिए। यादव मुस्लिम से मुसलमानों का नुकसान नहीं होगा। लेकिन आप का जरूर होगा।
छाज तो बो��े ही बोले सूप भी बोले जिसमें 72 छेद!
जिंदगी भर अपने माता-पिता के कामों पर विधायक बनने और माता-पिता को राजनीतिक तंज करवाने वाला तेजप्रताप अब खान सर को क़ातिल बता रहा है!
सस्ता कन्हैया लाइट में रहना चाहता है, चाहें खान सर के नाम से ही सही!🙃
ये खुद जज बन गया है जो बिना जांच पड़ताल के बोल रहा है...
ये हत्या "khan Sir" के द्वारा कराया गया है !
ऐसे लोग स्वजातीय जातिवाद के धारा में बह गए ही लोग हैं!
इन लोगों से बड़ा जातिवादी कोई नहीं है चुनाव के समय मजार पर नमाज पड़ेंगे!
जब चुनाव खत्म होते ही जाति के पक्षधर होकर हिन्दू ��ुस्लिम करेंगे!
विधार्थियों की समस्या जाए भाड़ में, पहले आपस में लड़ लो पटना वाले माफियाओं।
इन सबमें सबसे बड़ा जिम्मेदार वहां का मूर्ख विद्यार्थी है, जिसने शिक्षक और बाहुबली के बीच का फर्क मिटा दिया। जो व्यक्ति शिक्षा देने के लिए जाना जाना चाहिए था, उसे भीड़, प्रचार और व्यक्तिगत प्रभाव के दम पर महिमामंडित किया जा रहा है।
जब विद्यार्थी सवाल पूछने की जगह जयकारा लगाने लगें, जब पढ़ाई की जगह व्यक्तिपूजा होने लगे, ���ब ऐसे ही तथाकथित बाहुबलियों का जन्म होता है। फिर शिक्षा पीछे छूट जाती है और तमाशा आगे निकल जाता है।
कड़वी सच्चाई यह है कि जिस दिन विद्यार्थी अपने हितों, अपने अधिकारों और अपनी पढ़ाई को प्राथमिकता देंगे, उसी दिन इन माफियाओं की ताकत आधी रह जाएगी। लेकिन जब तक अंधसमर्थन चलता रहेगा, तब तक शिक्षा का नुकसान होगा और विद्यार्थियों की समस्याएं किनारे पड़ी रहेंगी।
बाकि शान्ति बनाएं रखों। किसी के समर्थन में नारेबाजी मत करों।
#awareness
बिहार में जो स्थिति बन चुकी है ख़ान सर और रौशन आनंद सर के विवाद पर कि वो बात इतनी संजीदा हो चुकी है कि उसके बारे में एक ग़लत बयान बवाल खड़ा कर सकती है , शांति भंग से लेकर अराजकता की स्थिति तक ��ो जन्म दे सकती है । बिना जाँच पड़ताल के यहाँ मीडिया फ़ैसला सुनाये जा रही है जो अनैतिक है !
लेकिन वहाँ की मीडिया पूरी तरह से ग़ैर ज़िम्मेदाराना बयानबाजी में व्यस्त हैं , प्रिंस यादव की संदेहास्पद स्थिति में मृत्यु को सबने अपने व्यूज और पैसे कमाने का ज़रिया बना लिया है जबकि ये स्थिति बहुत ही नाजुक है !
प्रिंस यादव अकेले नहीं अपने दोस्तों के साथ नेपाल में थे और अगर सत्य कोई बता सकता है तो वो उनक��� दोस्त बता सकते हैं , बिहार के मीडिया को सच कितना भी पता होगा उनके दोस्तों से अधिक नहीं पता होगा और अगर दोस्त भी बिक चुके हैं तो फिर बिहार में बचा क्या अगर दोस्ती भी बिक गई वहाँ !
फिर तो वो जगह ही श्रापित है जहाँ दोस्ती भी बिक जाती है चंद सिक्कों की खनक पर !
ख़ान सर अगर दोषी हैं तो न्याय उनकी गर्दन दबोचकर सलाखों के पीछे डाले और अगर पैसे की ही बात है कि क़ानून पैसे से बिक जाती है तो पूरा बिहार रौशन आ���ंद सर के लिए पैसे इकट्ठा कर के दे आए क़ानून के दरवाज़े पर , और ख़रीद ले इंसाफ़ ! हम भी इसके लिए आगे आयेंगे और अपील करेंगे कि पूरा बिहार आए रौशन सर को इंसाफ दे आकर !
लेकिन जानता और मीडिया ये दोनों स्वयं ही दोष और दोषी तय कर लेगी तो पुलिस के पास बचा ही क्या करने को ? फिर जिसको पब्लिक बोले उसको उठाके डालो जेल में ! जिसको पब्लिक और मीडिया घेरेगी उसीको फाँसी सुना दो ! प्रजातंत्र है भाई , प्रजा तो सब जानती है , प्रजा की बात मानो !
और अगर प्रजा को ये लगता है कि कोई जाँच नाम की चीज़ की आवश्यकता है , सुबूत , बयान , साक्ष और सच्चाई नाम की चीज़ बिहार के न्यायिक प्रक्रिया में बची हुई है तो आने दीजिए न्यायालय और क़ानून का फ़ैसला !
और नहीं तो ख़ुद ही बन जाइए सहंशाह और दे दीजिए जुर्म की सज़ा ख़ान सर को ! लटका दीजिए एक जिहादी को जिहाद का आरोप मढ़ कर और बहा दीजिए बिहार में न्याय की गंगा !
या फिर धीरज रखिए और ये प्रार्थना करिए कि सत्य की जीत हो , जो गुनहगार है उसे स���़ा मिले और जो निर्दोष है उसके साथ हुए ज़ुल्म का हिसाब हो ! ये समय धीरज से काम लेने का है , कुछ भी बोलकर या लिखकर सोशल मीडिया के ज़रिए फैसला सुनाने का नहीं है - विश्वा
Khan Global Studied Center खान सर ने पटना के बड़े बड़े शिक्षकों की लूट को ठप कर दिए हैं....
बेबस आर्थिक तंगी से जूझ रहे अन्य कोचिंग वाले...
SK Jha, Naveen sir, रौशन आनंद, विपिन यादव, ऐसे और अन्य कोचिंग वाले है!
ये कोचिंग वाले कोरोना काल के पहले ऑफलाइन के फाउंडेशन कोर्स के जनरल तैयारी SSC, BANK, RAILWAY, AIR FORCE, STATE POLICE' के लिए ....
गरीब बच्चों से मोटी फीस 30 हजार से 40 हजार रूपए लेते!
खान सर के मार्केट में आने के बाद यही फीस घटकर 5000 रुपए हो गई !
अब इन कोचिंग माफियाओं की फीस घटने से अब ये सब चोर चोर मौसेरे भाई बन गए हैं!
लालू प्रसाद यादव जी के बेटे X MLA तेज प्रताप यादव बोल रहे हैं कि प्रिंस यादव की हत्या खान सर द्वारा करवाया गया है।
थोड़ी बहुत राजनीति बची है उसको बचे रहने देते या फिर ज़िंदगी भर बाप के पैसे पर खाने का इरादा है। खुद ही जज बने जा रहे हैं।
RIP Prince Yadav 🙏
भावुक हुए Khan Sir...💔
कुछ पल ऐसे होते हैं, जहाँ शब्द नहीं, सिर्फ़ आँखें बोलती हैं।
Prince Yadav को विनम्र श्रद्धांजलि।
ॐ शांति। 🙏🕊️
रौशन आनंद सर के भाई प्रिंस यादव की मौत के बाद पहली बार खान सर सामने आए हैं।
खान सर बाकायदा 11 मिनट का वीडियो बनाकर अपनी बात रखें हैं
खान सर का मानना है कि,
प्रिंस यादव के मौत के पीछे कोई तीसरा जरूर संलिप्त है जिसकी गहनता से जाँच होनी चाहिए
और जो भी दोषी साबित हों उन्हें फाँसी की सजा दी जानी चाहिए।"
साथ ही खान सर ने यह भी कहा है कि हमसे जो बन पड़ेगा हम उतना सहयोग करने को तैयार हैं।
क्या बिहार दिवालिया होने के कगार पर है? क्या डबल इंजन सरकार की पूंजीपरस्त नीतियों और जनविरोधी निर्णयों से वित्तीय आपातकाल की स्थिति उत्पन्न होने वाली है?
बिहार का वित्तीय संकट इतना गंभीर हो चुका है कि कल बिहार कैबिनेट ने मई, जून और जुलाई 𝟐𝟎𝟐𝟔 की सामाजिक सुरक्षा पेंशन देने के लिए बिहार आकस्मिकता निधि से 𝟑,𝟔𝟔𝟐 करोड़ रुपए निकालने की स्वीकृति प्रदान की है।
आकस्मिकता निधि का उपयोग सरकार द्वारा किसी भी अप्रत्याशित संकट, प्राकृतिक आपदा या वित्तीय विपत्ति के समय जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाता है।
जिस प्रदेश में अब पेंशन देने के लिए आकस्मिकता निधि का उपयोग होने लगे तो समझ जाइए कि हालात कितने खराब और खतरनाक हो चुके है। 𝟔 महीनों से हम निरंतर कह रहे है और सर्वविदित भी है कि 𝟒-𝟓 महीनों से बिहार में कर्मचारियों के वेतन और पेंशन संबंधित भुगतान नहीं हो रहा है क्योंकि खजाना ���ाली है। एक वर्ष से अधिक समय बीतने पर भी ठेकेदारों का भुगतान नहीं हुआ है।
नए प्रॉजेक्ट ��ो दूर, 𝟐𝟎𝟐𝟑-𝟐𝟒 में स्वीकृत कार्य योजनाओं का अभी तक कार्यारंभ नहीं हुआ है? 𝟐𝟎𝟐𝟓 और 𝟐𝟎𝟐𝟔 में बिना सोचे समझे की गयी घोषणाओं का तो जिक्र ही छोड़ दीजिए। बिजली में भारी कटौती की जा रही है। छात्रवृति का पैसा नहीं दिया जा रहा। स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना ठप्प है। फंड की कमी के कारण कल कैबिनेट में पूर्व से चली आ रही “बिहार राज्य फ़सल सहायता योजना” को भी बंद कर दिया गया है।
बिहार के वित्तीय हालत ��िंताजनक है। नियमित बजटीय प्रावधान (𝐑𝐞𝐠𝐮𝐥𝐚𝐫 𝐁𝐮𝐝𝐠𝐞𝐭𝐚𝐫𝐲 𝐏𝐫𝐨𝐯𝐢𝐬𝐢𝐨𝐧𝐬) की बजाय आकस्मिकता निधि (𝐂𝐨𝐧𝐭𝐢𝐧𝐠𝐞𝐧𝐜𝐲 𝐅𝐮𝐧𝐝) से (𝟑,𝟔𝟔𝟐) तीन हज़ार छ: सौ बासठ करोड़ रुपए की निकासी कर उस निधि से पेंशन देने जैसे निर्णय पर मुख्यमंत्री को जवाब देना चाहिए कि दशकों से डबल इंजन सरकार होते हुए ऐसी नौबत क्यों आई?
नौसिखिए मुख्यमंत्री को गैर जरूरी मुद्दों को हवा देने की बजाय अविलंब प्रदेश की दयनीय वित्तीय स्थिति को लेकर चिंतित, भयभीत और आशंकित बिहारवासियों को संबोधित करना चाहिए।