@wearekalwan आता कळवण बरोबर #कसमादे चाही आवाज कारण एकच संस्कृती,एकच भाषा (#अहिराणी),एकच पाणी(#गिरणा),एकच विचार (#माणुसकी),एकच श्रद्धास्थान(# सप्तश्रृंगीमाता)
भाजपा का जूस मॉडल।
पहले लगा
सिर्फ़ गन्ने का जूस मिला रहे हैं
पर अब देश भर से आ रही रिपोर्टों से साफ़ है की
कहीं
गन्ना,
कहीं
रूह अफ़जा,
तो कहीं
सीधा पानी ही मिला दे रहे हैं।
यांच्या घरात नाही, नाका-तोंडात पाणी गेलं तरी सरकारविरोधात तोंड उघडायची हिंमत नाही.
महानायक केव्हाच नाग्या टाकून बसला आहे.
सहा फूट उंची म्हणजे कणखरपणा नसतो…
कणा असावा लागतो.
आज पाणी घरात शिरल
पण सरकारला प्रश्न विचारण्याचं धाडस अजूनही दाराबाहेरच उभं आहे.
@SrBachchan
हाईवे, सड़क,पुल और इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर जो लूट मची हुई है, वह अद्भुत है।
हर निर्माण बनते ही धंसने लगता है। इसका मतलब बनाने और बनवाने वालों का मकसद टिकाऊ हाईवे बनाना नहीं था। उनका मकसद सिर्फ लूटना था।
अरबों की योजना लाओ, खूब माल बनाओ, लूटो खाओ, फिर नई योजना लाओ, फिर लूटो खाओ।
Car 24 करके एक यूट्यूब चैनल द्वारा एक वीडियो बनाया गया था 0 एथेनाल और E20 तेल डलाकर।
जिसमें साफ दिखा कि E-0 पेट्रोल से गाड़ी का एवरेज 22km/l के आसपास था और E20 पेट्रोल में 14km/l था।
लेकिन अब उन्होंने किसी के दबाव में वीडियो डीलिट कर दिया है।
“Ethanol से माइलेज 30% कम मिलता है, लेकिन हमें इसे सकारात्मक नज़रिए से देखना चाहिए।”
— एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, भारत पेट्रोलियम
जब आप हमें ईंधन के नाम पर मिलावटी चीज़ दे रहे हैं, जिससे न सिर्फ़ माइलेज कम मिलता है बल्कि हमारी गाड़ियाँ भी खराब होती हैं, तो हम इसे सकारात्मक नज़रिए से कैसे देख सकते हैं?
इसे सिर्फ़ गडकरी एंड सन्स ही सकारात्मक नज़रिए से देख सकते हैं, क्योंकि वे इससे पीढ़ियों के लिए दौलत बना रहे हैं।
कान और मुंह में पानी जाने पर भी सरकार का विरोध करने की हिम्मत नहीं होती…
ढीशीमऽऽऽ ढीशीमऽऽऽ का हीरो पहले ही झुक चुका है…
यह सिर्फ छह फुट लंबा बिना रीढ़ का शरीर है…
सोलापुर महाराष्ट्र।
सोलापुर के 12 वर्षीय छात्र अब्दुल्ला इमरान मंगलगिरी ने
केवल 9,000 रुपये की लागत से एक विशेष सोलर साइकिल बनाई है।
यह साइकिल सौर ऊर्जा और बैटरी दोनों से चलती है ।
इसमें डिजिटल स्पीडोमीटर, जीपीएस ट्रैकिंग और
वॉयस कंट्रोल जैसी आधुनिक तकनीक भी शामिल हैं।
इस प्रतिभाशाली छात्र को सलाम।
चीन की मीडिया ने एक नई वीडियो रिलीज़ की जिसमें वो दावा कर रहे हैं कि 2023 में हुई चीन और भारतीय सैनिकों की भिड़ंत में हमने भारत के कई सैनिकों को पकड़ा हुआ है, लेकिन मेरे हिसाब से वीडियो पुराना है।
मगर हमारे महामानव और लेज़र आई के मुंह में दही क्यो जमी हुई है?
या जागरूक महिलेने विद्यार्थ्यांच्या बाबतीत उपस्थित केलेले प्रश्नांना उत्तर न देता उच्च शिक्षण मंत्री चंद्रकांत दादा पाटील यांनी पुणे व सोलापूर येथून पळ काढणे पसंद केले....
@ChDadaPatil 😇😇
🚨Every Indian should #Watch this ⬇️
This is US official Bethany Morrison
She is saying “Mission India is one of largest and biggest missions , second biggest and it’s not a co incidence
PM Modi, 3 Cabinet ministers in his govt and 150 civil servants have visited USA to be part of US govt sponsored programs”
What is mission India? To make India US colony and control its people, its resources to benefit US.
What did they do to achieve this? They trained Indian leaders on their money and made sure they get into power position and deliver for them
If Indians still cannot see the truth who is actually backed by CIA deep state , then god save them.
नीट पेपरसाठी यायला 2 मिनिटं उशीर झाला म्हणून म्हणून अनेक मुलांना प्रवेश नाकारला. आपल्या यंत्रणांच्या नालायक पणामुळे अख्खा पेपर फुटला तरी काही नाही पण विद्यार्थाना थोडाही उशीर झाला की No entry. या पोरीने तिच्या बापाने मुलीच्या अभ्यासासाठी काय काय सॅक्रीफायसेस केले असतील.. सगळं 2 मिनिटात उध्वस्त.... ही आपली व्यवस्था.
ऑक्सफोर्ड से UK संसद तक गूंजी वेदांत की आवाज, भारत लौटे आचार्य प्रशांत का भव्य स्वागत
आचार्य प्रशांत ऑक्सफोर्ड, कैम्ब्रिज और ब्रिटेन की संसद में भारतीय ज्ञान परंपरा का संदेश देने के बाद भारत लौट आए हैं। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनका भव्य स्वागत किया गया, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने तिरंगा लहराकर उनका अभिनंदन किया।
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी और यूके संसद में वेदांत, उपनिषद और गीता के विचारों को प्रस्तुत करने वाले आचार्य प्रशांत ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को दुनिया भर में सम्मान मिल रहा है। उन्होंने बताया कि आज की चुनौतियों- तनाव, पर्यावरण संकट और सामाजिक समस्याओं- के समाधान के लिए केवल तकनीक ही नहीं, बल्कि चेतना और दृष्टिकोण में बदलाव भी आवश्यक है।
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स्वदेश लौटे आचार्य प्रशांत, दिल्ली में भव्य स्वागत~ दैनिक भास्कर कवरेज ✨
"आचार्य प्रशांत का यह यूके दौरा भारतीय दर्शन की वैश्विक प्रासंगिकता के प्रमाण के रूप में सामने आया है। दिल्ली एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, “दुनिया को भारत से सबसे अधिक आवश्यकता उसके आध्यात्मिक और दार्शनिक ज्ञान की है, न कि केवल सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों की।" ऑक्सफोर्ड, कैम्ब्रिज और ब्रिटिश पार्लियामेंट- तीनो मंचों पर एक ही संदेश देने के विषय में उन्होंने कहा, "सत्य कोई ऐसा उत्पाद नहीं है जिसे मैं अलग-अलग बाज़ारों के लिए अलग ढंग से तैयार कर सकूँ।"
पूरा लेख पढ़ें: https://t.co/QnhNSE5HTu
Acharya Prashant Returns After Historic Britain Visit, Receives Grand Welcome at Delhi Airport ✨
On June 14, Acharya Prashant received a grand welcome at Delhi Airport upon returning from his historic visit in Britain. A large number of people gathered at the airport to receive him and greeted his return with chants of "Welcome Home," celebrating his widely acclaimed dialogues at Oxford University, Cambridge Union, and the British Parliament. People had arrived with special placards to honour his presentation of Indian philosophical teachings on global platforms. Children welcomed him by waving the Tricolour. His students gifted him a potted plant as a symbol of his relentless campaign against climate action, and presented him with a special letter expressing gratitude for providing clarity and direction during challenging times.
Speaking to the media, Acharya Prashant said that India's most valuable heritage is Vedanta, the Upanishads, the Gita, and her emphasis on self-knowledge. He made it clear that what the world needs most from India is its spiritual and philosophical wisdom, not merely its cultural expressions. On his decision to return to India, he said that people from across the country were gathering in Delhi-NCR for his upcoming camp, and it was not possible to overlook their love- for this love is not for any individual, but a reflection of people's devotion to Truth.
During his UK visit, Acharya Prashant addressed several prestigious platforms including Oxford University, Cambridge Union, and the House of Lords at the British Parliament. In these programmes, he connected India's true identity with self-knowledge, Vedanta, and the wisdom of the Upanishads, and spoke about meeting the challenges of the contemporary world- particularly the climate crisis, mental unrest, and social fragmentation- through self-knowledge. He said that true progress comes not from external achievements, but from recognising the inner obstacles that bind us and breaking free from them. These dialogues gave fresh momentum to international discourse on Indian philosophy and Vedanta, and underscored their special relevance in the present times.
ऐतिहासिक ब्रिटेन प्रवास से लौटे आचार्य प्रशांत: दिल्ली एयरपोर्ट पर हुआ भव्य स्वागत✨
14 जून को आचार्य प्रशांत का ब्रिटेन के ऐतिहासिक प्रवास से लौटने पर दिल्ली एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत हुआ। बड़ी संख्या में लोग उनके सत्कार के लिए एयरपोर्ट पहुँचे और "वेलकम होम" के उद्घोष के साथ ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, कैम्ब्रिज यूनियन और ब्रिटिश पार्लियामेंट में हुए उनके चर्चित संवादों का अभिनंदन किया। लोग वैश्विक मंचों पर भारतीय दार्शनिक शिक्षाओं की उनकी प्रस्तुति को सराहने हेतु विशेष प्लैकार्ड्स लेकर पहुँचे थे। बच्चों ने तिरंगे लहराते हुए उनका स्वागत किया। उनके छात्रों ने जलवायु अभियान के प्रतीक के रूप में उन्हें पौधा भेंट किया और छात्रों ने उन्हें एक विशेष संदेश-पत्र सौंपा- जिसमें चुनौतीपूर्ण समय में स्पष्टता और दिशा देने के लिए उनका आभार व्यक्त किया गया था।
मीडिया से बातचीत में आचार्य प्रशांत ने कहा कि भारत की सबसे मूल्यवान विरासत उसकी ज्ञान की धारायें है- वेदांत, उपनिषद, गीता और आत्मज्ञान की अविरल धारा। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुनिया को भारत से सर्वाधिक आवश्यकता उसके आध्यात्मिक और दार्शनिक ज्ञान की है, केवल सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों की नहीं। भारत लौटने के निर्णय पर उन्होंने कहा कि देशभर से लोग उनके आगामी शिविर के लिए दिल्ली-NCR में एकत्रित हो रहे हैं और उनके इस प्रेम को अनदेखा करना संभव नहीं था- क्योंकि यह प्रेम किसी व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि सत्य के प्रति लोगों की निष्ठा का प्रतीक है।
ब्रिटेन प्रवास के दौरान आचार्य प्रशांत ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, कैम्ब्रिज यूनियन और ब्रिटिश पार्लियामेंट के हाउस ऑफ लॉर्ड्स सहित अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर संवाद किए। इन कार्यक्रमों में उन्होंने भारत की वास्तविक पहचान को आत्मज्ञान, वेदांत और उपनिषदों से जोड़ा तथा समकालीन वैश्विक चुनौतियों- विशेषकर जलवायु संकट, मानसिक अशांति और सामाजिक विखंडन- का सामान आत्मज्ञान के साथ करने की बात रखी। उन्होंने कहा कि वास्तविक प्रगति बाहरी उपलब्धियों से नहीं, बल्कि भीतर की बाधाओं को पहचानकर उनसे मुक्त होने से आती है। उनके इन संवादों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय दर्शन और वेदांत को लेकर नई चर्चा को गति दी और उनकी आज के समय में विशेष प्रासंगिकता को रेखांकित किया।