"भाषण मत दो"
लेकिन PR के लिए फोटो जरूर खिंचाओ।
जनता का फ़िक्र करने का ड्रामा करते हुए वीडियो जरूर बनवाओ ।
मृतक की मां की बात मत सुनो, लेकिन मृतकों के प्रति संवेदना का ढोंग करने वाली न्यूज जरूर चलवाओ ।
कैमरे के सामने रोने का स्वांग करने वाला वीडियो मीडिया से वायरल जरूर करवाओ ।
वाह रे संवेदनहीन समाज !
राजनीति के चक्कर में आदमी का कितना पतन हो सकता है। यह अनुमान लगाना मुश्किल है।
केवल कुर्सी बनी रहनी चाहिए । मानवता तो कब का मर चुकी है।
जबरा मारे और रोवे भी ना देवे।
इस क्लिप को मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा डिलीट करवा दिया गया है, कुछ हिस्सा म्यूट करवा दिया गया था, फिर जब फजीहत हुई तो पूरी तरह से डिलीट करवा दिया गया था।
इस क्लिप में पीड़ित परिवार के लोग मुख्यमंत्री से कह रहे हैं कि हम भाजपा को वोट देते आए है, भाजपा सपोर्टर हैं।
लेकिन जब मुख्यमंत्री के सामने भाजपा के भ्रष्टाचार, प्रशासनिक लापरवाही की बात इस पीड़ित परिवार ने बोली तो मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार को झिड़क दिया, बुरी तरह से डांट दिया और कहा भाषणबाजी मत करो।
सोचिए जरा।
किस कदर बेरहम प्रशासन, सरकार और मुख्यमंत्री हैं।
जब चेहरे पर रेखाएं उभरने लगती हैं, तो हम लोग अक्सर चिंतित होने लगते हैं। लेकिन कुछ रेखाएं ऐसी होती हैं, जो मन में सुकून भर देती हैं।
जैसे दीवारों पर बच्चों के छोटे-छोटे हाथों से बनाई गई वो मासूम रेखाएं ,जब बच्चा पहली बार कलम थामना सीखता है तो वह पूरे दिन दीवार को अपना कैनवस मानकर उस पर कुछ न कुछ रचता रहता है। कभी तिरछी रेखाएं खींचता है तो कभी गोल। उसके लिए ये सब उसकी उपलब्धियां होती हैं जिन्हें वह घर के हर सदस्य को गर्व से दिखाता है – "देखो, मैंने डंडी बना दी है!" "देखो, मैंने गोला बना दिया है!"
कभी-कभी वह पूछता है, "पापा, देखो ये क्या बन गया?" और जब जवाब नहीं मिलता तो थोड़ी सी नाराज भी होता है। उसे लगता है कि उसने जो भी देखा है उसे अपने अनोखे अंदाज़ में दोबारा बना सकता है।
इन मासूम कोशिशों से वह दीवार पर एक अद्भुत संसार उकेरने का प्रयास करता है। भले ही दीवारें गंदी हो गई हों लेकिन उन पर उकेरे गए निशान हर रंग से कहीं अधिक उज्ज्वल और पवित्र हैं।
अब दिवाली नज़दीक है और घर की सफाई का काम शुरू हो चुका है। मन में एक उलझन सी है - इन दीवारों को साफ कर दें या यूं ही छोड़ दें ताकि इन मासूम यादों को बार-बार देख सकें। फिर भी सफेदी तो करनी ही है। इसीलिए इन खूबसूरत यादों को हम ड्राइव में सहेज रहे हैं ताकि समय बीतने के बाद भी ये निशान हमेशा हमारे साथ रहें।
ढेर सारा प्यार❤️
एक गाँव में रामलाल नाम का एक आदमी था। उसे हमेशा से ही लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचने का शौक था। एक दिन उसने सोचा, "अगर मुझे गाँव में हीरो बनना है तो कुछ बड़ा करना होगा।"
रामलाल ने अफवाह फैलाई कि उसे दूसरे गाँव के गुंडों से जान का खतरा है। पूरे गाँव में चर्चा होने लगी, लोग उसे सुरक्षा का भरोसा देने लगे। रामलाल ने अपनी बहादुरी की कहानियाँ बढ़ा-चढ़ाकर बताईं और गाँव वालों से कहा कि उसे हर समय सुरक्षा चाहिए।
जल्द ही, उसने गाँव के बलशाली लोगों को अपने साथ चलने के लिए राज़ी कर लिया। अब वह जब भी गाँव में निकलता, उसके पीछे लोग उसे सुरक्षा देने के लिए चलने लगे। उसे जो चाहता था वो मिल गया – एक खास पहचान और लोगों का ध्यान।
समय बीता, और गाँव वालों को समझ में आ गया कि रामलाल ने बस पब्लिसिटी के लिए ये पूरा खेल रचा था। धीरे-धीरे सबने उससे दूरी बना ली। रामलाल अकेला रह गया, लेकिन तब तक उसने नाम, ध्यान और सुरक्षा के मज़े ले लिए थे।
नोट - रामलाल को रामलाल ही पड़े पप्पू यादव नहीं