टीचरों को दो कौड़ी के बताने वाली अंजना ओम कश्यप की स्टूडियो के बाहर घिग्घी बंध गयी, स्टूडियो से दहाड़े मारने वाली पत्रकार यहां शांत है।
लोग सवाल पूछ रहे हैं आपका इतना विरोध हो रहा है कुछ बोलना है, लेकिन यहां इन्हें कुछ नहीं बोलना है चार दिवारी के अंदर स्टूडियो में बैठ कर बोलेंगी।
लड़कियां ने साइकल देवो, स्कूटी देवो, मोबाइल देवो और लैपटॉप देवो।
म्हाने कि कोनी, क्यूं म्हारे कोई कांटा लागयोड़ा ??
यह बच्चा "स्कूलीय विधार्थी संगठन" के सबसे बड़े अध्यक्ष होगा।
लड़कों की भावना को समझकर विदाई समारोह में जोरदार तरीके से मांग रखी।
कोचिंग का मतलब पढ़ाई ही नहीं है, बल्कि ऐसे संस्कार भी देना है जिससे कि बच्चे गुमराह ना हो.. मैडम बता रही है कि गर्ल फ्रेंड या बॉयफ्रेंड होने से कुछ नहीं होता...जरुरी है आपका चरित्र कितना साफ है... क्योंकि, वैल्यू उसी की होती है..!!