गेले काही आठवडे @Aakar__Patel यांच्या #priceofthemodiyears या पुस्तकातून थ्रेड केले. ते सर्व आज एकत्र करून थ्रेड करतोय. ज्यांनी आधी वाचले नसतील त्यांनी वाचा. ज्यांनी वाचले असतील त्यांनी पुन्हा पुन्हा वाचा.
२००२ साली गुजरातमध्ये काय झालं त्यांना माहीत आहे. प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादवसारख्या लोकांना आपलं चुकलं याची जाणीव झाली, अगदी आता आता सरांनाही अण्णांबद्ल उपरती झालेली दिसते. पण तरीही…
आज जॅार्ज फर्नांडिस यांची जयंती. समाजवादी विचारसरणीचे, कट्टर काँग्रेसविरोधक नेते. विरोध इतका की त्यासाठी भाजपसोबत हातमिळवणी करायलाही त्यांनी मागेपुढे पाहिलं नाही. १९९२ साली संघपरिवाराने बाबरी मशीद पाडल्यानंतरही ते वाजपेयींच्या मंत्रिमंडळात सहभागी झाले. सगळं डोळ्यासमोर घडूनही
सूचना केली? अण्णा भामटे आहेत, नाटकी आहेत हे सरांसारख्या बुद्धिमान संपादकाला कळलं नाही हे माझ्यासारख्या सुमार बुद्धीच्या त्यांच्या माजी सहकाऱ्याला पटत नाही. पण परत तोच प्रयोग होऊ घातलाय हेही त्यांना कळत नाही हे मानणं निव्वळ अशक्य आहे. सरांनी आणीबाणी अनुभवली, सेनेची मारहाण पचवली,
इस देश मे कुछ सवाल सिर्फ राहुल गांधी के लिए रिजर्व हैं।
जिनका दायरा, मोहम्मद गोरी लेकर खलजी, बाबर, औरंगजेब, अंग्रेज, नेहरू, इन्दिरा, मनमोहन तक फैला हो सकता है।
●●
राहुल की क्वालिफिकेशन के बारे मे रामचन्द्र गुहा का सवाल, ऐसा ही स्पेशल सवाल है। भारत के 99% नेता, नेता बनने के पहले क्या करते थे, इसकी जानकारी न तो आम लोगो है,
न वे इसकी परवाह करते हैं।
मसलन, बिना कोई अनुभव , बिना कोई चुनाव लड़े, डायरेक्ट शपथ लेकर अनिर्वाचित मुख्यमंत्री बनने के पहले, हमारे प्रधानमंत्री क्या करते थे??
पब्लिक डोमेन में इसकी सूचना शून्य है।
अब भले वे खुद स्वीकार करें, कि वे पढ़े लिख नही पाये, स्टेशन पर चाय बेची, 35 वर्ष भिक्षाटन करते रहे - तो भी इससे किसी को फर्क नही पड़ता।
मगर राहुल के बारे मे जानना है।
गहराई से, और तथ्यपरक जानना है।
और नकारना है।
●●
दरअसल राहुल से उसकी योग्यता नही पूछी जाती, उन्हें प्रच्छन्न रूप से निर्योग्य घोषित किया जाता है। और निर्योग्यता का एक ही कारण है- गांधी सरनेम के साथ पैदा होना..
और दरअसल यही गुहा जैसो का ऑब्जेक्शन है। वरना तो 5 बार का सांसद, 4 राज्य सरकारो का पॉवर सेंटर, केंद्रीय सरकार में 10 साल तक निर्णय बदलने की ताकत रखने वाला शख्स.
जिसे विभिन्न संसदीय समितियों में दो दशक का अनुभव हो,
पब्लिक पॉलिसी की पुख्ता समझ हो, कैम्ब्रिज मे पढ़ा हो और और अर्थव्यवस्था की दशा दिशा की बार बार सटीक पूर्वसूचना देता हो, अगर किसी और दल या देश में में 100 सांसद लेकर बैठा होता..
तो उससे यह सवाल करने की हिम्मत किसी मे न होती।
●●
लेकिन आप राहुल से पूछ सकते है।
क्योकि राहुल से डर नही लगता।
रामचन्द्र गुहा का वह वीडियो हमने देखा है, जिसमे सरकार के विरुद्ध तख्ती लेकर खड़े हो जाने भर से पुलिस उन्हें कुत्तो की तरह घसीटकर ले गई। इसके बाद वे दोबारा सरकार के नाम की तख्ती लेकर चौराहे पर नही गए।
राहुल के नाम की तख्ती सेफ है।
गुहा को पता है।
●●
और यही "सेफ" फीलिंग राहुल की उपलब्धि है। उसके 20 साल के पोलिटिकल करियर का एसेंस है।
रामचन्द्र गुहा इस देश मे भाजपा/ मोदी की हेजेमनी को राहुल पर थोपते है, तो उनके इतिहासकार होने की समझ पर शक होता है।दरअसल, जो वे स्वीकार करने से बच रहे है, वो यह कि आज देश की राजनीतिक हालात, एक आम चुनावी राजनीति नही, एक कंट्रोल्ड सामाजिक परिवर्तन है।
यह परिवर्तन, मीडिया, ज्युडिशयरी, चुनाव आयोग, ब्यूरोक्रेसी और एजेंसियों के शीर्ष पर कठपुतलियां बिठाकर थोपा गया है। जिसके नीचे जनाक्रोश उबल रहा है।
●●
इस आक्रोश की प्रतिक्रिया को विस्फोटक, और विध्वंसक होने से बचाने, और गृहयुद्ध समान हालात टालने के लिए किसी भी विपक्ष को बहुत धैर्यवान, सॉफ्ट होने की जरूरत है।
वरना जिस स्ट्रीट फाइट, सँगठनीकरण और आक्रामक राजनीति की अपेक्षा, राम गुहा आज राहुल गांधी से कर रहे है- उसका नतीजा पिछले 1 माह का बंगाल, और 3 साल से मणिपुर देखकर समझ लेना चाहिए।
आप पूरे देश मे ऐसा चाहते हैं???
●●
गम्भीर इतिहासकार जानता है, कि ऐसी सत्ता अपनी कब्र खुद बड़ी गहरी खोदती है।
मौजूदा दौर उन भावनाओ का एक्सप्रेशन है, जिसे हमारे समाज ने 70 साल तक ऐसे छिपा रखा था रखी थी, जैसे कोई बूढा अपने किशोर उम्र के कुटैव छिपाकर रखता है। बेहयाई को मान्यता मिलते ही वह धारा खुलकर खेल रही है।
लेकिन तमाम धन, ताकत, नंगई और मैनिपुलेशन के बावजूद 37-38% जनसमर्थन उसका पीक था। अब तो आगे सिर्फ ढलान है।
●●
गुहा हों, या उनकी तरह डेस्परेट दूसरे लोग, जान लें कि हिंदुस्तान की आत्मा इस तरह बहुत देर कुचली नही जा सकती।
इस झँजवात से बाहर निकलने का रास्ता, यह देश जल्द तय करेगा। पर उस उबाल का पथ प्रदर्शक कोई ईमानदार, दूरदर्शी, और नैतिक मूल्यों पर ठहराव रखने वाला ऐसा शख्स होना चाहिए। जो शांति, साहचर्य और मेल मिलाप का चेहरा हो।
इस वक्त, बिलाशक..
वह राहुल है।
●●
इस दौर का बुद्ध है।
जिसे महज राजघराने की पैदाइश की वजह से खारिज कर देना, और खास तरह की प्रतिक्रियाओं की आशा रखना, बौद्धिक नही- बायस्ड होने के लक्षण हैं।
जो राम गुहा कई बार प्रदर्शित कर चुके हैं। उनका फैन होने के नाते उन्हें सप्रेम सलाह है कि वे समाज मे अपनी उम्र औऱ अनुभव का आडम्बर बनाये रखें। भ्रम और खीज की शिकार जुबान को विराम दें।
और मौन की शक्ति महसूस करें।
🚨 Shapoor Zadran, Afghanistani Cricketer is currently in critical condition in Delhi.
He urgently needs A+ blood Platelets.
If anyone in Delhi has A+ blood type, please contact them as soon as possible.
Location: Delhi, India
Contact: +91 9999327374
Retweet to spread.
Bloomberg Bombshell
RBI Sold Gold worth $12 Billion in May 2026 to Save Nation from Acute Forex Emergency
India never Sold it's Gold in History
Even in 90s India mortgaged it's Gold in Crisis Time but Never Sold
In Modi Time.....India is Selling it's Gold to Save Nation
@Sundarspeak57 त्याबद्दल जरूर लिहा, टीका करा, पण सर भाजपाच्या विरोधात बोलायला घाबरले हे मान्य नाही. भरलेलं पाकीट मिळालं हे मान्य नाही. सरांबरोबर मतभेद असणं वेगळं आणि सरांवर पाकीट पत्रकार असल्याचे आरोप करणं वेगळं. राईट विंग बोलली तर फरक पडत नाही. पण तू असं बोलणं चूक.
@Sundarspeak57 कुणी कसं व्यक्त व्हावं हा अभिव्यक्तीस्वातंत्र्याचा प्रश्न आहे. मी म्हटल्याप्रमाणे त्यांची मतं पटायलाच हवीत असा आग्रह माझाही नाही आणि त्यांचाही नसेल. विरोधी मत व्यक्त करायचा अधिकार तुलाही आहे. पण सरांबद्दल पाकीट वगैरे आरोप मला मान्य नाहीत.
@DigvijayBSpeaks@yadujavalkar तुमच्या मराठीची काय अवस्था झाली ते बघा आधी हिंदीतून ज्ञानप्राप्ती करून. आणि पब्लिसिटीचं म्हणाल तर तुम्हाला ब्लू टिक घ्यावी लागते रीचसाठी.
ज्ञान फक्त हिंदीतूनच मिळतं का? फडणवीस हे का समजून घेत नाहीयेत की विरोध भाषेला नाही, सक्तीला आहे. आता बघा कुंपणच शेत खातंय आणि घर का भेदी लंका ढाये हे आम्ही दोन्ही भाषांतून सांगू शकतो की नाही? गरज वाटली तर शिकू की. पण ज्ञान फक्त हिंदीतून मिळेल असं सांगू नका.
@yadujavalkar@DigvijayBSpeaks@mulshikar71 अरे तुरे वरून अहो जाहो वर आलात. संस्कृतीच्या दिशेने पावलं वळली तुमची. पोस्टखाली जो फोटो आहे ना तो आजच्या लोकसत्तामधला आहे. व्हॉट्सॲप फॉरवर्ड नाही. तुम्हाला इतकीच रीच देईन मी.