पहचान अभी खुद की बनी नही पर निकल पड़ी हूँ कुछ बनने के लिए, जान कभी अपने नही पाएँ मुझे खुद के घर में आज भी अजनबी सी हूँ! लिख कर अपने जजबातो को अपना बनाना है सबको
चुप्पी मेरे लिए कमजोरी नही तुम्हें तुम्हारी ही नज़रों में गिरने न देने के लिए बचाईं हुई झूठी इज्जत है। जिससे तुम खुद अच्छी तरह वाकिफ हो, अब बस दोबा���ा कुछ ऐसा मत करना, जिससे मेरी चुप्पी के साथ-साथ तुम्हारे लिए बची… https://t.co/5iwiums60H