ये ब्रजभूषण आखिर कौन है आरक्षण देने या न देने वाला?
आरक्षण संवैधानिक व्यवस्था के तहत मिलता है जो कि अब लगभग नाममात्र का ही बचा है, उसे भी सुदामा कोटा व अन्य माध्यमों से हड़प लिया
रही बात किसका भला हुआ किसका नहीं, इसका आंकलन तो तब हो सकता है जब 2000 साल तक दलित पिछड़ों को देश की शत-प्रतिशत धन संपदा पर पूर्ण एकाधिकार मिले... बिल्कुल वैसे जैसे तुम्हें मिला
75 वर्ष के आरक्षण में तो इन समाजों की एक पीढ़ी ही पढ़-लिख पाई है, इतने में ही ऐंठन मचने लगी।।
अगर यही चलता रहा तो पंडितों को दुकानें बंद होने वाली है, भारत तेजी से बदल रहा है, वैदिक संस्कृति त्यागकर बुद्धिस्ट संस्कृति अपनाई जा रही है, जय भीम नमो बुद्धाय 🔥 🔥 🔥
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