@Profdilipmandal कभी कभी लोग पद लेना ही नहीं चाहते। राहुल कभी भी प्रधानमंत्री बन सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। अगर प्रियंका पद को स्वीकार न करें तो उन्हें जबरदस्ती अध्यक्ष नहीं बनाया जा सकता है।
@CJP_for_India EVM को बनाना, सुरक्षित स्टोर करना और हर 15 साल में बदलना बहुत महंगा पड़ता है, साथ ही ये बैटरी और बिजली पर निर्भर है और खराब होने पर मतदान रुक भी सकता है जबकि बैलेट पेपर सस्ता था और उसे चलाने के लिए किसी विशेष ट्रेनिंग की जरूरत नहीं थी।
@CJP_for_India कोई भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस 100% सुरक्षित नहीं हो सकती, सॉफ्टवेयर में हेरफेर या मदरबोर्ड बदलकर वोटों का डाटा बदला जा सकता है जबकि बैलेट में फिजिकल गिनती होती थी और सबके सामने गिनती संभव थी।