असल ज़िंदगी का 'सिंघम' तुकाराम मुंढे!🔥
ईमानदारी, सख्त कार्रवाई और जनता के हित को सबसे ऊपर रखने वाले अधिकारियों की यही पहचान होती है।
ऐसे अफसर व्यवस्था में भरोसा जगाते हैं।
राजस्थान की भाजपा सरकार में बारां पुलिस का अमानवीय चेहरा सामने आया ,
मनीष सुमन अपनी पत्नी के साथ 3 महीने के मासूम बच्चे को देवी दर्शन कराने ले जा रहे थे , रात की 3 बजे पुलिस वालो ने उनकी कार रोक कर उनकी कार जब्त की ,
मनीष सुमन का कहना है कि कार नई है , गाड़ी के कागज़ उसके पास है लेकिन पुलिस वालो ने चोरी का आरोप लगाकर कार को जब्त कर लिया , जिसके बाद रात की 3 बजे मनीष और उनकी पत्नी को सुनसान सड़क पर अपने मासूम नन्हे बच्चे के साथ भटकना पड़ा , मनीष ने पुलिस वालो से कहा कार जब्त करलो लेकिन हमें घर तक छुड़वादों लेकिन पुलिस वालो ने उन्हें सड़क पर भटकता हुआ छोड़ दिया ,
मनीष के पास कागज़ थे लेकिन जल्दबाजी में वो घर पर छोड़कर आ गया था , पुलिस वाले ने वीडियो बनाने पर युवक को धमकाया और गाड़ी को चोरी की बताकर चालान कर दिया और गाड़ी जब्त कर ली ,
पचास करोड़ की गर्लफ्रेंड…जर्सी गाय…दीदी ओ दीदी…ये सब फूहड़ और छिछोरी बातें क्या Gen Z ने बोली थीं? आज जब अपने पर आई तो भाषा और नैतिकता का पाठ पढ़ाने लगे?
प्रधानमंत्री जी,
श्री राम मंदिर में करोड़ों श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ अपनी कमाई अर्पित की - वहां हुई चंदा चोरी अब किसी से छुपी नहीं है।
ट्रस्ट के हर सदस्य को आपकी सरकार ने चुना था। इस चंदा चोरी पर आपकी चुप्पी अस्वीकार्य है।
तत्काल स्वतंत्र जांच कराइए, पूरा हिसाब सार्वजनिक कीजिए और दोषियों को कानून के कटघरे में लाइए।
आपकी सरकार की विश्वसनीयता अब आपकी कार्रवाई पर निर्भर है।
सुधीर चौधरी जैसे पत्रकार होना हमारे लिये एक राष्ट्र के लिये शर्म की बात है , ये पत्रकार के रूप में एक चाटुकार है और मोदी जी का भक्त है और इनके आँखों पर पट्टी बंधी है ,
Shame on You Sudhir Chaudhary,
मेरठ पुलिस के SP सिटी विनायक भोसले जी खुद बिना हेलमेट मोटरसाइकिल पर अपने दरोगाओं के साथ चलते नजर आ रहे हैं
जबकि साथ चल रहे पुलिसकर्मियों ने भी हेलमेट नहीं लगाया है।
जब एक IPS अधिकारी ही यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाते दिखाई दें, तो आम जनता से नियमों के पालन की उम्मीद कैसे की जाए?
क्या यातायात नियम सिर्फ जनता के लिए हैं या पुलिस अधिकारियों पर भी समान रूप से लागू होते हैं?
अयोध्या महापापियों के लिए कुरुक्षेत्र साबित होगी। यहीं भाजपाई राजनीति का आरंभ हुआ था, यहीं अंत भी होगा।
अयोध्या में ‘चढ़ावे-चंदे-दान-शिला चोरी’ की घटना के बाद से यहाँ आनेवाले दर्शनार्थियों की संख्या पर नकारात्मक असर पड़ा है। लोगों की आस्थाएँ खंडित हुई हैं। इसका सीधा असर अयोध्या के स्थानीय काम-कारोबार और आम आदमी की आमदनी पर पड़ा है। सरकार की गलती का ख़ामियाज़ा जनता क्यों भुगते।
अयोध्या और आस-पास के सभी क्षेत्रों में भयंकर आक्रोश पनप रहा है। इस पावन सनातनी तीर्थ की शुचिता जिन भाजपाइयों और उनके संगी-साथियों की वजह से कलुषित हुई है, वो अपना कारनामा करके सदैव की तरह भूमिगत हो गये हैं। अस्पष्टता के कारण वातावरण और भी शंकापूर्ण व तनावपूर्ण हो गया है। स्थानीय लोग मंदिर जाने से भी घबरा रहे हैं कि कहीं उनको ही जाँच के नाम पर फँसा न दिया जाए। श्रद्धालुओं में एक अज्ञात भय व्याप्त हो गया है। जाँच कहाँ तक पहुँची इसकी डेली ब्रीफिंग होनी चाहिए क्योंकि भाजपा सरकार में हो रहे ‘चतुर्दिक महा-भ्रष्टाचार’ के कारण जनता का SIT तक पर रत्ती भर भी विश्वास नहीं है।
मथुरा से भी आई धांधली की ख़बर बेहद गंभीर है, उसकी भी उच्च स्तरीय विश्वसनीय जाँच हो।
अगर बिहार के भरत तिवारी ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया था तो उनका एनकाउंटर क्यों किया गया?
क्या अब बिहार में न्यायालय का काम भी पुलिस ही करेगी? मानवाधिकार आयोग कहाँ है? अब्दुल को टाइट करने के लिए वोट दिया था न!