सती का अर्थ क्या है? सावित्री कौन थीं? सती-सावित्री को आज की स्त्रियां किस रूप में देखती हैं? सती सावित्री स्त्री-शक्ति की परिचायक हैं, या केवल कहानियों का हिस्सा? हिंदू, बौद्ध और जैन साहित्य ऐसी कहानियों से भरा पड़ा है, जहां महिलाएं पुरुषों को अपना धर्म परिभाषित नहीं करने देती हैं. @devduttmyth की @YaminiEditor द्वारा हिंदी में अनूदित @PenguinIndia से प्रकाशित पुस्तक 'सती सावित्री' पर वरिष्ठ पत्रकार @jai_shiven की राय. #bookreview #booklover #books
*BABA*
Today you would have turned *100*. And though you're not here to celebrate with us, we feel your presence in every smile, in every quiet strength we carry. We miss your laughter, your ever-hopeful heart.But most of all, we miss *YOU*. ✨
*SANJU, HEMU, YAMINI*
Finally...Six hundred pages of shadows, secrets and Scandinavian coffee, patiently distilled into Hindi by my caffeine-fueled, ever-curious mind.
What a ride. What a feat.
...Ready to find new readers, new hearts. Thanks
@ManjulPubHouse 🙏
अविनाश जैसे बौने बुद्धिजीवी साहिर के पीछे ना छुपें, इस लिए, साहिर का ही उत्तर, साहिर के शब्दों में।
हम अम्न चाहते हैं मगर ज़ुल्म के ख़िलाफ़
गर जंग लाज़मी है तो फिर जंग ही सही
ज़ालिम को जो न रोके वो शामिल है ज़ुल्म में
क़ातिल को जो न टोके वो क़ातिल के साथ है
हम सर-ब-कफ़ उठे हैं कि हक़ फ़तह-याब हो
कह दो उसे जो लश्कर-ए-बातिल के साथ है
इस ढंग पर है ज़ोर तो ये ढंग ही सही
ज़ालिम की कोई ज़ात न मज़हब न कोई क़ौम
ज़ालिम के लब पे ज़िक्र भी इन का गुनाह है
फलती नहीं है शाख़-ए-सितम इस ज़मीन पर
तारीख़ जानती है ज़माना गवाह है
कुछ कोर-बातिनों की नज़र तंग ही सही
ये ज़र की जंग है न ज़मीनों की जंग है
ये जंग है बक़ा के उसूलों के वास्ते
जो ख़ून हम ने नज़्र दिया है ज़मीन को
वो ख़ून है गुलाब के फूलों के वास्ते
फूटेगी सुब्ह-ए-अम्न लहू-रंग ही सही
- साहिर लुधियानवी
(सर-ब-कफ़: हाथ में सर लिए, हक़ फ़तह-याब: सच पाने वाला; लश्कर -ए -बातिल - झूठ की फौज, कोर बातिनों - मतांध (fanatics), बका- अस्तित्व )