नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है।
देश आर्थिक संकट से गुजर रहा है। वहीं, आने वाला वक्त और कठिन होगा।
चुनाव की वजह से मोदी ने समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए। अब चुनाव बाद सारी जिम्मेदारी जनता पर थोप कर खुद मजे कर रहे हैं।
• पेट्रोल डीजल मत खरीदो
• सोना मत खरीदो
• खाद का इस्तेमाल कम करो
• खाने वाले तेल का इस्तेमाल कम करो
सारा बोझ जनता उठाए, ये बस 'प्रचारमंत्री' बने यहां-वहां घूमते रहें।
नेता विपक्ष श्री राहुल गांधी ने पहले ही इसकी चेतावानी दी थी, लेकिन मोदी ने इसके बाद भी तैयारी नहीं की।
जब बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव जैसे देश तैयारियों में जुटे थे, तब हमारे राजा बाबू चुनाव-चुनाव खेल रहे थे।
ये आपदा मोदी जनित है, जैसे कोविड के वक्त ये सुस्त पड़े रहे। इस बार भी इन्होंने वही काम किया है।
अब मोदी की इस लापरवाही का खामियाजा देश और जनता को उठाना होगा।
चुनाव ख़त्म होते ही, ‘संकट’ याद आ गया!
दरअसल देश के लिए ‘संकट’ सिर्फ़ एक है और उसका नाम है : ‘भाजपा’
इतनी सारी पाबंदियां लगानी पड़ीं तो ‘पंच ट्रिलियन डॉलर की जुमलाई अर्थव्यवस्था’ कैसे बनेगी? लगता है भाजपा सरकार के हाथ से लगाम पूरी तरह छूट गयी है। डॉलर आसमान छू रहा है और देश का रुपया पातालोन्मुखी हो गया है।
सोना न खरीदने की अपील जनता से नहीं, भाजपाइयों को अपने भ्रष्ट लोगों से करनी चाहिए क्योंकि जनता तो वैसे भी 1.5 लाख तोले का सोना नहीं ख़रीद पा रही है। भाजपाई ही अपनी काली कमाई का स्वर्णीकरण करने में लगे हैं। हमारी बात गलत लग रही हो तो ‘लखनऊ से लेकर गोरखपुर’ तक पता कर लीजिए या ‘अहमदाबाद से लेकर गुवाहाटी’ तक।
वैसे सारी पाबंदियाँ चुनाव के बाद ही क्यों याद आईं है? भाजपाइयों ने चुनाव में जो हज़ारों चार्टर हवाई यात्राएं करीं वो क्या पानी से उड़ रहीं थीं? वो क्या होटलों में नहीं ठहर रहे थे या सिलेंडर की फ़ोटो लगाकर खाना बनाकर खा रहे थे? भाजपाइयों ने चुनाव में ही वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग से ही प्रचार क्यों नहीं किया? सारी पाबंदियाँ जनता के लिए ही हैं क्या?
इस तरह की अपील से तो व्यापार-कारोबार-बाज़ार में मंदी या महंगाई की आशंका की वजह से डर के साथ घबराहट, बेचैनी, निराशा फैल जाएगी। सरकार का काम अपने अकूत संसाधनों का सदुपयोग करके आपातकालीन हालातों से उबारना होता है, भय या अफ़रातफ़री फैलाना नहीं।
अगर सरकार नहीं चला पा रहे हैं तो भाजपाई अपनी नाकामी स्वीकार करें, देश को बर्बाद न करें। वैसे भी इन हालातों की असली वजह विदेश नीति के मामले में देश की परंपरागत ‘गुट निरपेक्षता’ की नीति से भाजपा सरकार का हटकर कुछ गुटों के पीछे, कुछ ख़ास वजहों और दबावों की वजह से चलना है। इसका ख़ामियाज़ा देश की जनता को महंगाई, बेरोज़गारी, बेकारी और मंदी की मार के रूप में भुगतना पड़ रहा है। किसान-मज़दूर से लेकर हर युवा, हर गृहिणी, नौकरीपेशा, पेशेवर, कारोबारी मतलब हर कोई इसकी चपेट में आ गया है। सच तो ये है कि भाजपा विदेश नीति और गृह नीति दोनों में फ़ेल हो गयी है। ये अपील भाजपा सरकार की अपनी असफलता की स्वीकारोक्ति है। दरअसल वोट मिलते ही भाजपा का खोट सामने आ गया।
भाजपाइयों ने चुनावी घपलों से राजनीति को प्रदूषित कर दिया है; नफ़रत फैला कर समाज के सौहार्द को बर्बाद कर दिया है; अपने चाल-चलन से भाजपाइयों ने संस्कृति-संस्कार को कलुषित कर दिया है; साधु-संतो पर प्रहार और आरोप लगाकर धर्म तक को नहीं छोड़ा है और अब अर्थव्यवस्था का रोना रो रहे हैं। इस तरह तो सांस्कृतिक, धार्मिक, राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक हर क्षेत्र में भाजपा ने देश का बंटाधार कर दिया है। इस अपील के बाद देश की जनता में अचानक आक्रोश का जो उबाल आया है, उसका प्रबंधन भाजपा किसी चुनावी-जुगाड़ की तरह नहीं कर पाएगी, अब भाजपा हमेशा के लिए जाएगी।
देश कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!
मोदी जी ने कल जनता से त्याग मांगे - सोना मत ख़रीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाद और खाने का तेल कम करो, मेट्रो में चलो, घर से काम करो।
ये उपदेश नहीं - ये नाकामी के सबूत हैं।
12 साल में देश को इस मुक़ाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है - क्या ख़रीदे, क्या न ख़रीदे, कहां जाए, कहां न जाए। हर बार ज़िम्मेदारी जनता पर डाल देते हैं ताकि ख़ुद जवाबदेही से बच निकलें।
देश चलाना अब Compromised PM के बस की बात नहीं।
❗️Breaking: Just saw a copy👇🏽of the Constitution (131st Amendment) Bill, 2026, to be introduced in the parliament in the special session this week. It’s worse than what everyone feared - it opens the floodgates for complete reallocation of seats for states and for gerrymandering.
➡️ As expected, in the name of advancing women’s representation, it is basically a move to facilitate early delimitation and to expand the size of Lok Sabha to 815.
➡️ But, contrary to the assurance of the PM and ministers, there is nothing in this bill to ensure that the present proportion of seats for each state would be maintained. It lifts the existing freeze (based on 1971 census, extended to post 2026) completely without any safeguard the government was promising.
➡️ Worse, the decision about which Census would be the basis for reallocation is taken away from the constitution and placed in the domain of law (ie, simple parliamentary majority).
➡️ Actual reallocation and determination of boundaries would be done by the Delimitation Commission, on which the constitution is silent. And this cannot be challenged in a court of law.
परिसीमन का खेल समझिए 👇
तमिलनाडु में 39 सीट हैं। यूपी में 80 सीट हैं। 50% बढ़ाने के बाद तमिलनाडु में होंगी 59 सीटें, जबकि यूपी में होंगी 120 सीटें। अभी दोनों राज्यों में अंतर 41 सीट का है जो बढ़कर 61 हो जाएगा।
इस तरह दक्षिणी राज्यों की सीटें घटेंगी और उत्तरी राज्यों की सीटें बढ़ेंगी।
बीजेपी महिला आरक्षण बिल की आड़ में लोकतंत्र के अपहरण का खेल खेल रही है। खतरनाक विचारधारा है। हर काम के पीछे इनकी नीयत में खोट और दिल में साजिश होती है।
This is a LIE. I was personally present at the meeting. NOTHING like this was said.
All that CEC Gyanesh Kumar said to us was “GET LOST”.
We challenge the ECI to release a transcript of the meeting.
Else we will do it.
मिल के होती थी कभी ईद भी दीवाली भी
अब ये हालत है कि डर डर के गले मिलते हैं
न मालूम ये पंक्तियां किसने लिखी हैं, लेकिन आज के माहौल में यह बिल्कुल सटीक बैठती हैं।
BIG Breaking for Instagram User's
अगर आप Instagram इस्तेमाल करते हैं तो ध्यान दीजिए, 8 मई 2026 से Meta इंस्टाग्राम पर 'एंड टू एंड एन्क्रिप्टेड चैट फीचर' बंद कर रहा है यानी अब आपकी चैट्स का एक्सेस मेटा के पास रहेगा!
#Instagram#Meta
राजदीप सरदेसाई ने जो कहा उसके लिए कलेजा चाहिए 🫡
उन्होंने कहा- “क्षमा कीजिए प्रधानमंत्री जी, अब आपकी यह ‘भाषणात्मक अतिशयोक्ति’ अपने चरम पर है.
लोकतंत्र में हमेशा प्रतीकवाद के रंगमंच रहे हैं. काली पट्टियां, भूख हड़तालें, मौन मार्च हों या नुक्कड़ नाटक. विरोध शायद ही कभी सुगढ़ या सौंदर्यपूर्ण होता है.
#BREAKING#SupremeCourt uploads the order passed in the NCERT book case.
Contempt notice issued to Ministry official and NCERT Director.
Book, in all forms, BANNED.
“A complete blanket ban is hereby
imposed on any further publication re: printing or digital dissemination of the book titled “Exploring Society, India and
Beyond”.
“Any attempt to circumvent this order through electronic media or alternative titles, containing the same contents, shall be treated as a direct interference, willful breach and defiance of the directions issued herein above.”
NCERT regrets publishing text book containing chapter on judicial corruption.
NCERT says it will rewrite the chapter.
The development came after the #SupremeCourt expressed displeasure over the text book content.