आज माननीय मुख्यमंत्री महोदय @BhajanlalBjp जी के नेतृत्व में कर्मचारी संगठनों के साथ संपन्न बजट पूर्व संवाद बैठक में हिस्सा लिया। वार्ता में मुख्य सचिव सुधांशु पंत जी, अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त अखिल अरोड़ा जी, कार्मिक सचिव हेमंत गेरा जी व अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।
माननीय मुख्यमंत्री महोदय ने बहुत सहजता व सरलता से कर्मचारी संगठन के प्रतिनिधियों की बात सुनी। रेसला की तरफ से माननीय मुख्यमंत्री महोदय का अभिवादन करते हुए संगठन की मुख्य मांगे उनके समक्ष रखी जिनमें
1. पांचवी अनुसूची की वेतन कटौती वापस कर सातवें वेतन आयोग में प्रारंभिक वेतन 48400/- करने
2. उप प्राचार्य के पद शत प्रतिशत पदोन्नति से भरे जाने व पूर्व की भांति इसे L-15 का पद मानते हुए ग्रेड पे 6000 किये जाने
3. वर्ष 2022-23 में क्रमोन्नत 3820 विद्यालयों में व्याख्याताओं के पद सृजित करने
4. तीन वर्षों से लंबित व्याख्याता पदों की डीपीसी, उप प्राचार्य के पदों पर न्यायालय स्थगन हटवाकर सभी उप प्राचार्यों को पदस्थापन देने व उप प्राचार्य की वर्ष 2023-24, 24-25 की डीपीसी करने, प्राचार्य के 7000 पदों पर डीपीसी करने
इसके अलावा पुरानी पेंशन को यथावत रखने व RGHS में दिये जा रहे लाभ और अच्छे से किए जाने के अन्य संगठनों के साथ पूरी सहमति में सभागार करतल ध्वनि से गूंज गया।
वार्ता के लिए मुख्यमंत्री महोदय का रेसला धन्यवाद करता है।
जय संगठन।। जय रेसला
डॉ. अशोक जाट
प्रदेश महामंत्री रेसला
अकर्मण्यता, संदेहास्पद सत्यनिष्ठा, अक्षमता एवं अकार्यकुशलता अथवा असंतोषजनक कार्य निष्पादन का ऐसा कौनसा मीटर / पैमाना है जो नापकर बता देगा??
इस तरह के आदेश सरकारी अधिकारी / कर्मचारी की स्क्रीनिंग नहीं बल्कि उन पर राजनैतिक दबाव बनाने के लिए दुष्प्रयोग किए जायेंगे।
इस आदेश पर पुनर्विचार किया जावे। कार्मिकों पर सरकार ही इस तरह अविश्वास रखने लग गई तो फिर आमजन में क्या विश्वसनीयता रह जायेगी?? राजकीय कार्मिकों में जनता का विश्वास कमजोर होने का मतलब है सरकार में जन विश्वास कम होना क्योंकि कर्मचारी राज्य सरकार के ही अभिन्न अंग है अतः माननीय मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp जी इस तरह के आदेश पर आप हस्तक्षेप कर प्रत्याहारित करवाइए।
कर्मचारियों में इस आदेश को लेकर असंतोष पैदा हुआ है तथा इसे समय पर पुनर्विचार नहीं करने पर बढेगा।
जिस तरह @DainikBhaskar सरकारी विद्यालयों को बदनाम करने के कोशिश कर रहे हैं वह बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। कौनसा बच्चा कब पढेगा या कब नहीं, कौनसी परीक्षा में कम आ रहे और कौनसी परीक्षा में ज्यादा अंक यह दैनिक भास्कर के कार्यालय से तय नहीं होगा??
विद्यालय व शिक्षक अपना कार्य कर रहे हैं। सरकारी स्कूलों के बच्चे यदि अच्छे अंक ला रहे हैं तो पेट में दर्द होने लग गया। 20 के अलावा 80 अंक का पेपर बोर्ड लेता है क्या उन पेपरों में बच्चे 80 में से 80 नहीं ला रहे!! 80 में से 80,79,78,77 अंक सरकारी विद्यालयों के बच्चे वार्षिक परीक्षा में ला रहे है, क्या इस पर आपका ध्यान नही जा रहा???
सरकारी विद्यालयों पर तंज कसकर उन्हें बदनाम करने का एक चलन बना लिया आपने!! क्या आपने नहीं देखा सरकारी विद्यालयों की देहात की गांव ढाणी की बच्चियों ने 98℅ अंक अर्जित किए या सैंकड़ों बालिकाओं ने 90% से अधिक अंक हासिल कर विपरीत परिस्थितियों में अपना, अपने राजकीय विद्यालय व अपने शिक्षकों का लोहा मनवाया है।
पत्रकार जी 20 में से 20 कैसे आये!! आपको यह चिंता है तो हम आपको बता रहे हैं 80 में से 80 भी आये हैं।। वो आपको नहीं दिखेगा क्योंकि वो सिर्फ उसे दिखेगा जिसने सालभर मेहनत की थी और उस शिक्षक को दिखेगा जिसे इस बात का गर्व है कि उसकी मेहनत सफल रही।
आपकी तकलीफ़ हम समझ सकते हैं क्योंकि अच्छे अंक लाने से गांव ढाणी के सरकारी विद्यालयों के बच्चे भी अब अपने परीक्षा अंकों के आधार पर अच्छे कॉलेज में एडमिशन ले पायेंगे ओर यह बात शायद आपके पच नहीं रही इसलिए नकारात्मक पत्रकारिता के अपने पुराने ट्रैक पर आप उतर गए
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