जब एक पुरुष किसी महिला से विवाद में हारने लगता है तो मानसिक रूप से हार स्वीकार न कर पाने के कारण सबसे पहला वार उसके चरित्र पर करता है.... बड़ी ही नीच प्रवृति का होता है ऐसा व्यक्ति!
अपनी हार स्वीकार करना सीखना चाहिए!!
तृप्त हृदय को, सरस् स्नेह से
जो सहला दे, वही "मित्र" है।
रूखे मन को सराबोर कर
जो नहला दे वही मित्र है।
"प्रिय-वियोग", "संतप्त चित्त" को,
जो बहला दे, वही "मित्र" है।
अश्रु-बूंद की एक झलक से,
जो दहला दे, वही "मित्र" है...💕
-"मैथिलीशरण गुप्त"
मैं अपने भी स्वाभिमान पर
अभिमान करना जानता हूँ।
तुम्हारी स्वीकृति, अस्वीकृति का
पूर्णतः तुम्हे अधिकार है
पर गिड़गिड़ा कर प्रेम पाना
न हरगिज़ मुझे स्वीकार है
यदि प्रेम हो तो पूर्ण हो,
परिपूर्ण हो, सम्पूर्ण हो
यदि भीख में मिले प्रेम
तो फिर ऐसे प्रेम पर 'धिक्कार' है....🍃
तुम्हारी सहमति, असहमति का मान करना जानता हूँ
तुम्हारे मान-स्वाभिमान का सम्मान करना जानता हूँ
मैं जानता हूँ "प्रेम" है ये, यह थोपा जा सकता नहीं
इसलिए हर पक्ष, हर पहलू का ध्यान करना मैं जानता हूँ
किन्तु जितना मैं तुम्हें मानता हूं,
उतना ही स्वयं को पहचानता हूँ।
मातृहीन पितृहीन गुणहीन धनहीन
गृहहीन उदासीन विपिन विहारी हैं ।
शिशगंग भालचन्द्र नेत्र लाल कण्ठव्याल
भस्मयुक्त नग्नतन, जटाजूटधारी हैं ।
भूतेश्वर नागेश्वर डमरू त्रिशूलधर
अशुचि का घर, बैल उनकी सवारी है ।
सत्यम शिवम सुंदरम उन्हें कहें वेद
कन्या का तुम्हारे वही शिव अधिकारी है.🚩🙏🏻