अनुकूल समय में चारों ओर से वाह - वाह मिलने से किसी का भी मन विचलित हो सकता है। किसी बड़े लक्ष्य के लिए कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं के लिए यह समय सबसे कठिन होता है। ऐसे समय में अगर व्यक्ति अंहकार में न आकर लक्ष्य प्राप्ति हेतु साधना में लीन रहे तभी लक्ष्य प्राप्ति संभव है ।
नींव के पत्थर बनकर जिन्होंने कठिन तप कर आदर्श जीवन जीकर विचार के अनुरूप संगठन को मजबूत आधार दिया , आज की पीढ़ी को उनके द्वारा स्थापित शाश्वत जीवन मूल्यों से प्रेरणा लेकर कार्यपद्धति के अनुरूप कार्य करने से ही समाज में लक्षित परिवर्तन हो सकता है ।
समाज में सकारात्मक परिवर्तन कथा या अभिनय करने से नहीं होता।प्रथम पुरषी विचार के आधार पर परिवर्तन लाने हेतु स्वयं को प्रस्तुत करके करणीय कार्य करते हुए व्यक्ति - व्यक्ति को जोड़ते हुए संगठित शक्ति के साथ परिवर्तन लाया जा सकता है ।
लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जी को उनकी जयंती पर कोटि-कोटि नमन! बुद्धिमत्ता, करुणा और जनकल्याण के प्रति अटूट निष्ठा को लेकर पूरा देश उन्हें आदर और सम्मान के साथ स्मरण करता है। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक चेतना को और सशक्त बनाया।
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लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।
भारत की सांस्कृतिक विरासत के पुनर्निर्माण एवं लोक-कल्याण हेतु उनके किए गए कार्य सदैव स्मरणीय रहेंगे।न्यायपूर्ण शासन, सेवा और समर्पण के प्रति उनका आदर्श जीवन सभी के लिए प्रेरणास्रोत एवं अनुकरणीय है।
माननीय मुख्यमंत्री (हि.प्र.) श्री @SukhuSukhvinder जी मेरी गाड़ी के एक ही चालान की राशि मुझसे दो बार वसूल की गई है, इसके बावजूद उसी चालान का नोटिस बार-बार भेजा जा रहा है। कृपया इस त्रुटि की जांच कर उचित समाधान करें।
#HimachalPradesh
If instead of six working days in a week for government employees, five working days are implemented by states as per central government policy, it may save a lot of fuel consumption.
If you’re given some prime responsibility and you own the same, then you should fully involve yourself to justify that responsibility. It’s your moral duty to own the failure and must pay more attention to overcome the obstacles responsible for the failure.
हर पुरानी पीढ़ी को लगता है कि नई पीढ़ी में वह संस्कार नहीं जो उनमें हैं, नई पीढ़ी को लगता है ये पुरातनपंथी हैं, रूढ़िवादी हैं।अनुभव और नयापन दोनों के लालमेल से ही समाज आगे बढ़ सकता है।
प्रजातन्त्र एक तरह से ऐसा उल्टा पेड़ है जिसकी जड़ें ऊपर और टहनियां नीचे की ओर होती है।शीर्ष नेतृत्व अगर ईमानदार,न्यायप्रिय और तपस्वी है ,कथनी और करनी में अंतर नहीं है तो आम जनता नेतृत्वकर्ता के हर आहवान को स्वीकार करती है।
“Vocal for Local” यह केवल नारा नहीं एक ऐसा मूल मंत्र है और शाश्वत जीवन शैली जो प्रकृति के नियमों पर आधारित है के सिद्धान्त का अनुसरण करता है।प्रकृति ने मनुष्य की सभी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उसके आस पास ही सभी चीजें उपलब्ध कराईं है जिससे उसकी सभी आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके।