Entering Syria in 2025 | New Government in Power https://t.co/bf0sQfNwt4
बहुत सारी बातें जानता ही हूँ,एक करेंसी पर तस्वीर भी देखा असद का।
आखिर इतना वह कैसे कर पाया,डेमोक्रेसी की नींव ही हिल गयी!!..
इसके पीछे कारण मिलेगा - उसका दायाँ और बायां हाथ।।प्रशासन में उसके अपने भाई,
एकाध जगह तो
सिक्का किसी पापी समाज के नासूड लोगों के नाम पर भी ढालने की बात चली थी, पता नहीं उसका क्या हुआ..
कुछ जगह कानून न्याय को पूर्णतः मुट्ठी कब्जे में लेने का प्रयास और कनून नाम की कोई चीज नहीं का भी प्रयास किया गया। अपने मन से कुछ शरारती बेईमान बदमाश दो टके का कानून का
ऐसे कुछ देश मे प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष बढ़ सकते, नियम कानून सुधार के नाम पर घचाघच बदलकर,कई आपराधिक काम को अंजाम देने के बाद भटकाने के लिये राष्ट्रवाद के नाम पर युद्ध इत्यादि का सहारा ले सकते हैं ताकि देश शिफ्ट हो जा सके नईयुष की व्यवस्था में और सच व न्यायपूर्ण का लोपन गोपन हो सके।
इस संभावना से इंकार नही, वे न्याय व कानून को ध्वस्त करेंगे, बदलने की चेष्टा करेंगे,दबदबा बनाना चाहेगे। जाति वाले की खोज करेंगे,अराजकता को जन्म देगे या किसी अन्य बहाने से कोई दूसरा नफरत की राजनीति किसी अन्य मुद्दे पर चालाकी से करके सबको नशे में कर देना चाहेंगे, फिर युद्ध करेंगे
मिलिट्री और अन्य जगहों पर, उसके एकदम करीबी का हो जाना, या जरा सा भी अलग या ईमानदार को मार दिया जाना या उठाकर दूसरी जगह पर फेंक दिया जाना।
कुल मिलाकर उसके तानाशाह को हवा मिली,सहयोग मिला उसके अपने परिवार व नजदीकी लोगों से।
।इस तरह की व्यवस्थाओं वाले कुछ और देश धीरे धीरे उभरेंगे
और इस तरह से एक लंबे वीडियो का अंत
एक बढ़िया वाक्य के साथ होता है - " बुरी संगति अच्छे आचरण को खराब कर देती है।"
इसके अलावा मैं इसमें जोड़ना चाहूँगा...
"तुम वैसे बनो कि कोई संगति तुम्हें खराब नहीं बना सके,सुखी कर सके।
बल्कि जीवन में विविधता को अपनाओ। संगति का बहाना रहने दो"
परन्तु...आगे वीडियो के अंश में
बाल यौन शोषण की भी बात आई है..
और यह कि वह 12 साल की लड़की से भी शादी कर लेता था,
यदि यह अफवाह नहीं है, सच है
तब समझूँगा, यह आदमी बदमाश, विकृत मनोदशा वाला था।
ऐसे में फिर
इसे जेल में ही देखना पसंद करता हूँ।
ओशो ...वैसा नहीं थे,जैसा लोग समझते
कोई हिंसा नहिं कर रहे, शांति से सब रह रहे, आप कौन सा रूल पकड़े हुए रहते हैं? जो अपराध करते हैं,उन्हें तो पकड़ पाते नहीं, उन्होंने देश को बढ़िया ढंग ही दिया है।क्या वो ड्रग paddler थे?चोर उचक्के थे?
यदि उन्होंने क्राइम नहीं किया है कोई बुरा,तो जेल में रखना पाप है,उनसे क्षमा माँगें
को अपना बच्चा समझते हुए प्रेमपूर्ण हैं, तो मेरी समझ से वो एक बहुत अच्छी सोसाइटी की नींव रख रहे थे।आपसी अंडरस्टैंडिंग यदि सही है,कलहपूर्ण नहीं है,तो मैं वैसे आदमी की रेस्पेक्ट करता हूँ जोकि ड्राइव कर रहे सही दिशा में, ना कि उन्हें कामुक या अश्लील हरकत करने वाला मानता हूँ।सुखी हैं,
प्रश्न - वीडियो के एक अंश में एक स्पिरिचुअल 80 पत्नी जिसकी,उसे जेल ले जाती है FBI, आपका विचार?
उत्तर -यदि आपराधिक काम नहीं किया गया है,तो जेल क्यों?वह एक समझदार आदमी हैं,उन्नत हैं,हिंसक नहीं।और जब सारी बीबियाँ आपस में प्रेम से और दुआ व प्रार्थना के साथ रहती हैं,कम्युनिटी के बच्चे
प्रश्न - मैं एक समान्य कर्मी हूँ, ईमानदार. पर देखकर कुछ अधिकारियों को क्रोध आता है, क़्या करें?
उत्तर- जो होगा, देखा जायेगा. आपके वश में जितना है, ईमानदारी से करते रहें. पर ज़ब कभी ऐसा आदमी मिल जाए, किसी अन्य आदमी को देखकर कह दें - " साला भ्रष्ट! पैसा खा खाकर तमाशा करवाए रहता है
समतुल्य बताकर फिर मनोबल तो बढ़ा रहे होते हैं ऐसे लोग, पर वे बुद्धि विवेक से भ्रष्ट होते हैं। अपने किसी मतलब या चापलूसी सिद्ध करने में रहते हैं। ऐसे दर्शकों को देख देख हर्षित रहने वाला बुद्धू होता है, उथला होता है या एक दिन ठगा जाता है।
इस संसार में पाप अपराध क़े प्रति लोगों क़ी कई धारणएँ बनती हैं, और कुल 4-5 समूहों में वैसे दर्शकों को रखा जा सकता है।
सबसे निम्न और ओछे वे समूह हैं जो कहते हैं - " वाह! वाह! वाह गुंडे.. राउडी राठौड़ वाला काम किया, अबतक छप्पन वाला काम किया."
यानि हीरोज वाले एक्ट से खलनायकी को
और फिर.. उसे उसके पसंदीदा जगह पर लाकर छोड़ दिया, घिसटकर ही.. पर यह देखते हुए कि कोई पत्थर, रोड़ा, ना आ जाये उसकी पीठ क़े नीचे।
घर आया.. कुछ दिनों तक यह फील हुआ कि शायद
गुरुनानक देव. थे...
उस वक़्त कुछ इस तरह क़ी दशाएं थी।
लगा, आज नानक क़ी सेवा खुद किया। शायद वे ही थे,पक्का
एकबार ड्यूटी फिनिश करके घर आ रहा था। रास्ते में सड़क पर ठीक बीच में एक 70-75 साल का वृद्ध लेटा हुआ, बेसुध, धुत्त। मैंने सोचा, जिस तरह से यह लेटा हुआ है, उसमें तो कोई भी गाड़ी चढ़ जाएगी, या हेडलाइट खराब रहा, तो पक्का यह तो.. हमने उसे पैर से पकड़ा, जरा घसीटकर साइड कर दिया, वह भी बस
दिए हैं कि समझ में आ जाता है। बाप ने सेवक तक का पैर छू ने का संस्कार से लेकर साथ में एक छत पर सोया हो गर्मियों में तो भी सारे भाई उसके ना ना, ना बौआ, करता रह जाए, पैर दबाता था, और पिताजी कहते, दबवा ला ना नाथो चा (उनका नाम लेकर, चाचा कहकर)!
तु अंधा है क़्या, देखता नहीं, घास है, सांप आ सकता। हमने कहा, नशीला होगा, नशा शायद और बढ़ जायेगा, आपको कोई फर्क नहीं पड़ेगा। और जाने लगा, दूर हुआ जरा, स्कूटर पर बैठ गया,तो उन्होंने कहा, अरे अंधा!उधर कर दो। हमने जान लिया कि होश में है। अंधा, भाषा है इसकी।
माँ बाप ने संस्कार ऐसे
गाली जैसा दिया, हमें जरा क्रोध तो आया, पर दया भी आयी। और यह पता था कि बुद्ध लोग दयावान होते हैं, गाली क़ी परवाह नहीं करते। सो शिक्षा मन में घूम गयी, अंततः वो समझ गया कि मित्र आदमी हूँ।
तब कहा, जरा उस तरफ और कर दो ना!
हमने कहा, सेफ हो यहाँ भी।
नहीं, उस तरफ जरा कर दो, पक्का है, इधर
देख रहा था। ज़ब लगा कि सेफ हो गया है, तो जाने लगा, तब उसने पुकारा, अरे तुमने हमको उधर से इधर क्यों किया? हमने कहा, मर जाते या हाथ पैर टूट जाता।
अरे!तुम बदमाश हो, हमारे साथ बदमाशी किया? हमने कहा, नहीं, बदमाशी नहीं किया,बढ़िया काम किया। सेवा किया। आपको तकलीफ हो जाती।
तो भी जरा कुछ