उपर से जैसा आदेश आता है वैसा ही ये लोग बोलते हैं
इस समय भारत मे जो एकता और भाईचारा का जो माहौल बन रहा है ये ऐसा होने नही देंगे
DD का ये एंकर शर्मनाक शो करते पकड़ा गया
हुई थू थू
गोदी मीडिया ने मारे गए
भारतीय टीचर को बताया आतंकी
जब सारा विपक्ष सरकार के साथ खड़ा है,तो इस सरकारी चैनल के एंकर की विपक्षी नेताओं को गद्दार कहने की हिम्मत कैसे हुई ?
AajTak वाली स्वेता सिंह नेशनल TV पर Fake न्यूज फैला रहीं हैं। अब तो इन्हें सरेआम झूठ बोलने में संकोच तक नहीं होता है।
स्वेता सिंह देश में हुए ट्रेन एक्सीडेंट के बारे में बता रहीं थीं तो उन्होंने बताया कि
UPA सरकार के 2000-2001 के शासनकाल में ट्रेन दुर्घटनाएं 2022-2023 के NDA के शासनकाल से 10 गुना कम हुईं हैं जबकि सच यह है कि
स्वेता सिंह जिस UPA के राज की 2000-2001 की बात कर रहीं हैं उस दौरान तो देश में अटल बिहारी बाजपेई जी के नेतृत्व में BJP की NDA गठबंधन के साथ सरकार थी।
अब आप देखिए स्वेता सिंह ने कितनी चालाकी से NDA राज को UPA राज बता दिया।
माँ सीता का श्राप लगा तब अयोध्या उजाड़ हो गया था। लेकिन अब तो रामलला अपनी जन्मभूमि लौट आयें। विकास की हर संभव कहानी अयोध्या की धरती पर लिखी जाने लगी थी। पर्यटक आ रहे थे, रोज़गार के नये अवसर उभरने लगे, अयोध्या की अर्थव्यवस्था मज़बूत होने लगी। विश्व भर से सनातनियों की नज़र अयोध्या को देखती हैं। क्या नाराज़गी थी आख़िर जो राम को लाने वाले के गले जीत की माला न डाल सके। अपने दिन पलटने को लेकर ही वोट कर देते। आख़िर क्यों दिये सबको मौक़ा ये कहने को कि भगवान राम अपनों से ही हारे थे। घर अगर अवैध होंगे तो टूटेंगे न चाहे वो अयोध्या में हो या कहीं और। कैसे मुक्ति पायेंगे इससे?? आज अयोध्या ( उत्तर प्रदेश) की हार ने दिल तोड़ दिया।
#Loksabhaelection #LokSabhaChunavResult2024
बरनोल का थोक विक्रेता है dhruv Rathee 😀
ध्रुव राठी को 100 मीडिया एंकर, 10 टीवी चैनल, लाखों आईटी सेल के कार्यकर्ता इसे गलत साबित नहीं कर पाए है और ना ही इसके सामने टिक पा रहे है..
ध्रुव राठी को हर रोज 15 करोड़ से ज्यादा भारतीयों का बेहपना प्यार मिल रहा है।
अकेल dhurv rathee से पीछा छुड़ाने के लिए हजारों IT Cell वालों की भर्ती की गई, पूरी पूरी रात उनसे काम कराया गया कि कैसे भी करके इसकी गलतिया ढूंढो या इसे गलत साबित करो। लेकिन इस इकलौते इंसान ने वो काम किया है की भक्तों की आने वाली नस्लें इसके नाम से कांप जाया करेंगी।
@dhruv_rathee
हिहिहि। लुगाइबाजी, गोडसे से मित्रता के बाद छूट गयी होगी।
वर्ना कुछ बच्चे तो थे उनके, जो जाहिर है, बायलोजिकल ही हुए होंगे।
●●
बहरहाल, एक नाम आता है-
मार्गेट लारेंस।
"कहा जाता है"...
की इन्ही मोहतरमा के हनी ट्रेप में फंसाकर, स्कॉटलैंड यार्ड ( लन्दन की पुलिस) ने फ्रांस भाग चुके सावरकर को, इंग्लैंड में मिलने वापस बुलाया था।
●●
दरअसल, लन्दन में पुलिस का जोर बढ़ने और, श्यामजी कृष्ण वर्मा समेत इंडिया हाउस के बहुत से लोग, फ्रांस भाग चुके थे।
फ्रांस, ब्रिटेन का दुश्मन देश था, और वहां ब्रिटिश पुलिस, किसी को गिरफ्तार नही कर पाती।
तो उसने सावरकर को लन्दन बुलाने की चाल खेली। उनकी महिला मित्र, लारेंस मैडम से उन्हें बुलाने को कहा।
और आये, तो पुलिस ने धर दबोचा।
●●
बहरहाल, भक्त नही मानेंगे।
बोलेंगे, सवूत दिखाओ।
प्रत्यक्ष प्रमाण तो मेरे पास नही। आंखों देखा गवाह हूँ, कहना भी कठिन है। मैं भला कौन सा 100 साल पहले, सावरकर की खटिया के नीचे घुसकर वहां से डायरेक्ट रिपोर्टिंग करता हूँ। भाई, पढ़ा हुआ ही लिखता हूँ।
हां, संघी जरूर नेहरू की खटिया के नीचे छिपे रहते थे। उनका लिखा रसीला विवरण, सब फर्स्ट हैंड एकाउंट हैं।
सत्य, सही, आंखों देखा हाल है। जो वे मां कसम खाकर सच कहते हैं। 1889 में इलाहाबाद के कोठे में, संघी नेहरू की पैदाइश का विवरण लिखने शार्टहैंड लेकर वे खुद बैठे थे।
●●
पढ़ने की बात आई, तो मार्गेट लारेंस मामले मे टेलीग्राफ ने कुछ छापा था। पढ़ें।
एक धनंजय कीर ने भी अपनी किताब में इस पर कुछ कुछ लिखा है। वे कहते है कि इस महिला की मोडेस्टि वायलेट करने ( छेड़खानी वगैरह) के लिए सावरकर को 4 माह जेल हुई थी।
●●
पुनश्च- मै थोड़ा लेट पैदा हुआ, तो अपनी आंख से कुछ नही देखा। जो पढा, सो लिखा।
https://t.co/CaHU5386hL