"अमेरिका और पाकिस्तान में युद्ध हुआ, तो भारत पाकिस्तान के साथ है"
BJP के राजस्थान अध्यक्ष मदन राठौड़ जी ये पाकिस्तानी प्रेम उस आतंकी मुल्क के लिए जो भारत के नागरिकों की हत्या करता है, देश में दहशतगर्दी फैलाकर आतंकी हमले करता है, सीमा पर जवानों को निशाना बनाता है।
भाजपा का ये पाकिस्तानी प्रेम न सिर्फ हमारे वीर जवानों की शहादत और करोड़ों भारतीयों का अपमान है, बल्कि देशद्रोह है।
इतिहास गवाह है कि भाजपा हमेशा राष्ट्र-विरोधी ताकतों के साथ रही है। आजादी से पहले जिन्ना की मुस्लिम लीग के साथ हिंदू महासभा द्वारा मिलकर प्रांतीय सरकारें बनाने लेकर प्रधानमंत्री मोदी जी के बिन बुलाए पाकिस्तान जाकर बिरयानी खाने तक! देश ने इनका शर्मनाक चेहरा देखा है। फिर चाहे आडवाणी जी का जिन्ना की मजार पर जाकर मत्था टेकना हो, या फिर अटल बिहारी वाजपेयी जी की लाहौर बस यात्रा, और डोभाल परिवार के व्यापारिक संबंध!
दूसरों को देशभक्ति का सर्टिफिकेट बांटने वाली भाजपा के रग-रग में पाकिस्तान बसा है, ये लोग देशद्रोही हैं।
मस्त Music सुनो, कम से कम 1 घंटा पूरी एकाग्रता के साथ। दिमाग़ 99% लोगों से अलग तरीके से काम करने लगेगा।
कम से कम 90 दिन practice करके देख लो, ठाकुर।
लेकिन इसे सिर्फ सुनना नहीं है—हर एक rhythm को ध्यान से observe करना है।
जब तुम हर beat और rhythm को consciously महसूस करने लगोगे, तब concentration और focus में फर्क महसूस हो सकता है।
— जय केदार 🎧🧠🔥
SI सहित RPSC की किसी भी नौकरी में लगना हो तो इन्हीं से पढ़ना पड़ेगा ?
शेखी बघारने की भी कोई हद होती है..!! 🤦
जो @SantoshBishnoi_ जी से पढ़े है वही SI बन पाएंगे बाकी सब को घर जाना होगा..!! 😑😞
#SI#RPSC
बहुत बढ़िया, सर जडेजा ने अपनी रफ़्तार कम की। Ravindra Jadeja का अच्छा फ़ैसला।
उन्होंने 82.8 kmph की रफ़्तार से गेंदबाज़ी की, जिससे उन्हें विकेट मिला और गेंद अच्छी तरह टर्न हुई। इससे पहले, वह लगातार 90–95 kmph की रफ़्तार से गेंदबाज़ी कर रहे थे।
हम उम्मीद करते हैं कि जड्डू अपनी रफ़्तार कम करने और उस पर बेहतर कंट्रोल पाने के लिए काम करते रहेंगे।
इसके अलावा, जडेजा हमेशा से टीम इंडिया के सबसे अहम खिलाड़ी रहे हैं। https://t.co/YJgRlVJ7j7
“कागज़ नहीं दिखायेंगे”
राजस्थान में लिग्नाइट से बिजली बनाने वाली JSW एनर्जी बाड़मेर लिमिटेड पिछले 15–17 वर्षों से एक विचित्र कानूनी लड़ाई लड़ रही है। मामला है लिग्नाइट ट्रांसफर प्राइस और उससे जुड़े खर्चों के खुलासे का।चूँकि यह कॉस्ट-प्लस आधार पर चलने वाला प्लांट है, इसलिए जितना खर्च दिखाया जाएगा, बिजली की खरीद दर उतनी ही बढ़ जाएगी। यही कारण है कि कंपनी इन आँकड़ों को छुपाए रखने पर अड़ी हुई है।
इस लड़ाई में कंपनी का सबसे बड़ा सहारा वही है, जो सामने से विपक्ष में खड़ा होना चाहिए था सरकारी कंपनी के वकील। हाल ही की सुनवाई में जब कंपनी सुप्रीम कोर्ट से लेकर RERC तक हर जगह घिर गई, तब भी सरकारी वकील ने कंपनी को और समय देने का अनुरोध कर दिया। सुप्रीम कोर्ट में भी कंपनी को समय नहीं देना चाहता पर वकील साहब पूरे मेहरबान है
यह वकील साहब, जो पहले IAS रह चुके हैं, पिछले डेढ़ दशक से इस केस को कभी ख़त्म ही नहीं होने दे रहे। न कंपनी कागज़ दिखा रही है, न वकील साहब हटाए जा रहे हैं। नतीजा यह कि बिजली महँगी होती जा रही है और इन वकील साहब का फ़ीस बिल करोड़ों में पहुँच चुका है।
15–17 साल का खेल यही है “न कागज़ दिखायेंगे, न केस निपटेगा।”