@RailMinIndia@RailwaySeva
गाड़ी संख्या -12556 के परिचालन पर कृपया ध्यान दें। गाड़ी पहले से हीं विलंबित है फिर भी उसे छोटे स्टेशनों पर रोक कर और विलंबित किया जा रहा है। ट्रेन के और विलंबित होने से बहुत से यात्रियों की
गोरखपुर से आगे की कनेक्टिंग ट्रेन छूट जायेगी।
व्हाट्सएप पर आया टिकट दिखाना पर्याप्त नहीं, रेलवे के नियम जानना है ज़रूरी!
#RailOne App से बुक किया गया अनारक्षित टिकट केवल उसी पंजीकृत मोबाइल पर वैध माना जाता है, जिससे टिकट जारी हुआ हो। यात्रा के दौरान उक्त मोबाइल के साथ एक फोटोयुक्त पहचान पत्र रखना भी अनिवार्य है।
व्हाट्सएप, स्क्रीनशॉट या अन्य माध्यम से प्राप्त टिकट वैध यात्रा प्राधिकार नहीं माना जाता।
मनीष कश्यप को लेकर नितिन गडकरी की भाषा देखिए 👇
"पटना में एक यूट्यूबर गधे, मैं उसका नाम नहीं बताऊंगा. उसने मुझे अपशब्द कहे. टोयोटा ने उससे टेस्टिंग के लिए गाड़ी मांगी.
जब कार की टेस्टिंग हुई, तो पता चला कि उसके फ्यूल टैंक में पेट्रोल और पानी डाला था. इसके बाद टोयोटा ने उसके खिलाफ FIR दर्ज कराई.”
आपके मोहल्ले की पानी की टंकी पर मधुमक्खियों का एक छत्ता लगा हुआ है। कई लोगों की नजर है उस पर कि किसी दिन शहद निकालने वाला कोई मिल जाए तो उससे शुद्ध शहद निकलवा लें।
जिस दिन आपको सुविधा हुई उस दिन आप उस छत्ते को तोड़ देंगे और शहद निकाल लेंगे।
( ऐसा ही होता है न?)
आपने तोड़ने से पहले उसके छत्ते का निरीक्षण नहीं किया कि अभी उसमें कैपिंग हुई है कि नहीं?? हुई है तो कहीं ऐसा तो नहीं कि अभी उसमें ब्रुड हो, लार्वा हो... ( साधारण भाषा में कहूं तो अंडा बच्चा उसमें होगा) पर जब आपने उसको निचोड़ा तो आप की बाल्टी में शहद के साथ साथ वह सब भी आ गया जिसकी आप कल्पना नहीं कर सकते।
और सबसे बड़ी बात यह कि जिस मधुमक्खी की तारीफ करते हम नहीं थकते, जिस मधुमक्खी के कारण फसलों और फूलों में परागण होता है, उस मधुमक्खी के घर को तो आपने अपने 2, 4 किलो शहद के लिए तोड़ डाला। अब उनमें से 90% मधुमक्खियां मर जायेंगीं। जी हां लगभग सभी।
पहले मैं भी इन बातों पर गौर नहीं करता था क्योंकि मुझे एहसास ही नहीं था।
जब मधुमक्खी-पालन शुरू किया तो ज्ञान प्राप्त हुआ, अनुभव प्राप्त हुआ और तब दिमाग इन बारीक बातों पर भी गया।
शहद तो खैर हम मौन पालक भी निकालते ही हैं , तो क्या यह सब पाप हमसे भी होता है??
बड़े संतोष से यह बात कह रहा हूं कि एक मधुमक्खी पालक से इस तरह की गलती नहीं हो सकती।
एक मधुमक्खी पालक सारी परिस्थितियों का आकलन करके ही शहद निकालता है।
वह देखता है कि छत्तों की ठीक से, भली प्रकार से कैपिंग हो गई है, उसमें कोई लार्वा नहीं है तभी वह शहद निकलेगा।
अगर छत्ते शहद से लबलबा रहे हैं तब भी वह देखता है कि मौसम कैसा रहने वाला है।
यदि उसे लगता है कि आने वाले एक-दो दिन में मौसम खराब रहेगा और मधुमक्खियां बक्सों से बाहर निकलकर फूलों से nectar लाने में असमर्थ रहेंगीं तो वह उस समय शहद निकालना टाल देता है। मधुमक्खी पालक इस प्रकार से शहद निकालता है कि मधुमक्खी के छत्ते को कोई नुकसान नहीं होता। मधुमक्खी को बेघर नहीं होना पड़ता है।
अतः अहिंसक रास्ते से प्राप्त किए गए शहद को प्रोत्साहित करें और उसे अपनाएं, प्रयोग में लाएं।
अपने लोकल बीकीपर से Raw Honey खरीदें।
बड़े-बड़े ब्रांड के प्रोसेस किया हुए शहद से बचें।
ये पंडित विनीत तिवारी जी हैं, जिन्होंने भारतीय जनता पार्टी का झंडा स्वाहा कर क्रांतिकारी भरत तिवारी के समर्थन में रील बनाई। पुलिसिया आतंक, सरकारी तंत्र के अवैध वसूली तथा लठैत वादी सरकार के जुर्म से तंग लोगों को बीजेपी से मोह भंग हो चुका है।
भरत तिवारी की कथित पुलिस मुठभेड़ में मृत्यु कई गंभीर सवाल खड़े करती है। लोकतंत्र में किसी भी व्यक्ति को न्यायालय से पहले सजा देने का अधिकार किसी को नहीं है।
सरकार को पूरे मामले की निष्पक्ष व पारदर्शी जांच कराकर सच्चाई जनता के सामने लानी चाहिए। न्याय व कानून का शासन सर्वोपरि है।
वाराणसी। कैंट रेलवे स्टेशन पर यात्रियों से ओवरचार्जिंग करने वाले ठेला-रेहड़ी वालों को @varanasipolice सिगरा थाना प्रभारी शिवाकांत मिश्रा जी ने सख्त चेतावनी दी है।
शिवाकांत मिश्रा जी ने शनिवार को सभी ठेला संचालकों की बैठक बुलाकर साफ कहा अब कोई भी यात्री से तय रेट से ज्यादा पैसे नहीं वसूलेगा। हर ठेले पर रेट लिस्ट साफ-साफ लगानी होगी। यात्रियों से शालीन व्यवहार रखो, मारपीट या बदतमीजी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होगी।
ऐसी सख्त और तुरंत कार्रवाई के लिए थाना प्रभारी शिवाकांत मिश्रा जी की तारीफ करनी होगी। आम जनता और यात्रियों के हित में पुलिस का यह रवैया वाकई सराहनीय है।
Till today - 407
This is my every day cleanup & awareness drive at Paradeep Beach (Odisha) & today I collected 15 kg of plastic waste & kept the environment clean.
"We can build a better India by taking small steps towards cleanliness every day."
@PMOIndia@SwachhBharatGov
@prabhatranjann सहमत हूं।
हिंदी के लगभग सभी दैनिक समाचार पत्रों में प्रूफ रीडिंग के अभाव में भारी गलतियां होती हैं।
ऐसा लगता है लोगों को अब आदत हो गई है गलत पढ़ने की