13 फरवरी 2026, दोपहर बाद RAS interview, Rpsc के बाहर दीवार पर बैठा हुआ सोच रहा था कि पता नहीं क्या होगा, best of luck कहने वाला भी कोई नहीं है, कोई स्कॉर्पियो से तो कोई ब्रेजा से आ रहा हैं, किसी से बोलकर एक फोटो खिंचाई,लेकिन मेरे साथ था
जोधपुर में सांसद के केंद्रीय मंत्री होने तथा जिले से ही राज्य के कानून मंत्री होने के बावजूद भाजपा सरकार जनता के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। चरमराई बिजली-पानी व्यवस्था से आमजन त्रस्त और विकट विपदा में है, लेकिन सरकार उनकी आवाज दबाने के लिए शहर में धारा 163 (पुरानी 144) लगाकर अभिव्यक्ति की आजादी छीन रही है।
अखबारों में सुचारू पेयजल के झूठे दावे हो रहे हैं, जिससे जनता में भारी आक्रोश है। इस आक्रोश को दबाने के लिए अंदरखाने पुलिस का पहरा लगाया जा रहा है। राजीव गांधी लिफ्ट परियोजना फेज-3 में ₹1400 करोड़ में से ₹1200 करोड़ के भुगतान के बाद भी काम ठप पड़ा है। मार्च 2025 में पूरा होने वाला यह प्रोजेक्ट भ्रष्टाचार, रूट बदलने और फॉरेस्ट क्लीयरेंस के नाम पर उलझाकर मार्च 2027 तक के लिए संशय में डाल दिया गया है।
सरकार बिजली और पानी तक नहीं दे पा रही है- जनता पूछ रही है कि सरकारी खजाना खाली है या भ्रष्टाचार में लिप्त भाजपा के लोग अपने घर भरने में व्यस्त हैं? भाजपा सरकार यह दमनकारी नीतियां तुरंत बंद करे और जनता को राहत दे।
नेहरू की आलोचना सामने बैठकर तर्कों के साथ करने वालों में प्रो. मेघनाद साहा का नाम प्रमुख है
6 बार नोबेल के लिए नामित इस महान वैज्ञानिक की बात आइंस्टीन जैसे दिग्गज भी सुनते थे
नेहरू ने भी उनके मतभेदों को सम्मान दिया
तब बहस का स्तर बौद्धिक था,आज तुलना का स्तर देखिए... #Nehru#Modi
अगर अशोक गहलोत जी इतने ही कमजोर थे, तो राजस्थान से नीरज डांगी दूसरी बार राज्यसभा के लिए कैसे रिपीट हो गए?
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड में कांग्रेस ने अपनी-अपनी राजनीतिक परिस्थितियों के हिसाब से उम्मीदवार तय किए,
@8PMnoCM@TheTribhuvan@arvindchotia
हाल ही में दिए गए अशोक गहलोत के बयानों के क्या राजनीतिक मायने है ?
सचिन पायलट को लेकर क्यों हमेशा ख़फ़ा रहते हैं पूर्व मुख्यमंत्री 👇
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@AadeshRawal आदेश भाई, व्यक्ति-पूजा इतनी भी मत कीजिए कि तथ्यों को स्वीकार करना मुश्किल हो जाए। नेताओं का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन राजनीति का मूल्यांकन तथ्यों और घटनाओं के आधार पर होना चाहिए, भावनाओं के आधार पर नहीं।
@AadeshRawal अगर सब कुछ इतना ही स्पष्ट था, तो फिर पायलट साहब भाजपा नेताओं के संपर्क में क्यों गए थे? राजनीति में उस समय क्या-क्या प्रयास हुए, यह किसी से छिपा नहीं है। अगर पर्याप्त संख्या साथ होती, तो राजस्थान की राजनीति की दिशा भी अलग हो सकती थी। 2/3
@AadeshRawal लेकिन जब समर्थन नहीं मिला, तो मामला आगे नहीं बढ़ सका।
सच यह है कि उस समय पायलट की राजनीतिक लड़ाई गहलोत जी के खिलाफ थी। यह राजनीतिक मतभेद था, जिसे आज इतिहास बदलकर नहीं देखा जा सकता।
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हमने तो सुना हैं कि आप सरकार गिराने के षड्यंत्र के दौरान एसओजी के डर से बंगले से कूदकर भाग गए थे। वॉइस सैंपल देने से बचने के लिए कितनी अदालतों में गए,
ईमानदार व साहसी होते तो वॉइस सैंपल देते ।
मेरे घर केन्द्रीय एजेंसियां आईं, मैं तो कहीं नहीं भागा, उनको सहयोग किया क्योंकि मैं ईमानदार था।
दुर्गादास राठौड़ के असली अनुयायी ऐसे होते हैं आपकी तरह नहीं।
जब तक सचिन पायलट यह नहीं बताएंगे कि वह मानेसर क्यों गए थे वहां क्या हुआ था तब तक अशोक गहलोत इसका फायदा उठाते रहेंगे।
सचिन पायलट को हिम्मत करके सारी सच्चाई बता देना चाहिए। गलतियों की माफी मांग लेना चाहिए।
अशोक गहलोत ने मांगी थी सोनिया गांधी से और बाहर निकाल कर वहां हम पत्रकारों से स्वीकार किया था।
गहलोत ने अपनी पारी खेल ली है पायलट के सामने अभी पूरी राजनीतिक जिंदगी पड़ी है।
उन्हें अपने मूर्ख समर्थकों से पीछा छुड़ाना चाहिए।
कान के कच्चे होने की बहुत शिकायत है वह दूर करना चाहिए।
राजेश पायलट की विरासत बहुत बड़ी है पूरे देश में फैली है। मां रमा पायलट भी अच्छी नेता रही हैं।
ये किन लोगों के कहने में आकर छोटी बातों में उलझे रहते हैं इसे सोचना चाहिए।
और ट्विटर पर जो यहां उनका समर्थन कर रहे हैं यह सोचकर अनपढ़ों की तरह कमेंट करते हैं उनसे पीछा छुड़ाना चाहिए।
उनके लिए काम कर रहे ट्रोल भाजपा के लिए भी काम करते हैं।
2023 में कांग्रेस के हारने पर उनकी ट्रोल आर्मी बहुत खुश हुई थी।