दुःख की कुछ बूंद
लिए चली थी सुख की खोज में
सांसारिक दुःख नदी देखकर
वे दुःख की चंद बूंदें अथाह
सुख में परिवर्तित हो गई..!!
~अंकिता ‘श्री’
#छोटा_दरवाज़ा#खोज
प्रिय मृत्यु एक ख़त तुम्हारे नाम ...
क्या तुम्हारे लिए भी
मैं केवल एक विकल्प मात्र हूँ
हर बार आने का वचन देकर
तुम अपने दिए वचन से कैसे पीछे हट सकती हो
अब इतनी हिम्मत नहीं है मुझमें अब
कि मैं तुम्हारी राह देखती रहूँ
सुनो मैं चाहती हूँ कि तुम आओ
और मुझे सम्मान के साथ ले चलो अपने साथ
क्योंकि मैं अग़र अपनी मर्जी़ से आऊँगी
तो बहुत बदनामी होगी मेरी और घरवालों की
मेरी अंतिम इच्छा है कि मैं सम्मान सहित जाना चाहती हूँ तुम्हारे साथ
जीते जी मैंने पग-पग पर हर सांस पर
बदनामी का घूंट पिया है बस अब और नहीं
कहो आओगी न लेने ससम्मान मुझे...!!
~तुम्हारी ही...
राहों में भटकी, ख़्वाबों में भटकी...
ढूँढ़े कई अल्फ़ाज़,
तेरे जैसा कोई न मिला...
चाहे बदले कितने अंदाज़,
जब तेरी आँखों में देखा...
ख़त्म हुआ हर सोज़,
तब जाना...
तुझ तक आकर पूरी हुई मेरी खोज ❣️
#छोटा_दरवाज़ा#खनक_शब्दों_की
सवेरा प्रतिदिन लिखता है एक चिट्ठी
किरण के नाम...
“तुम बिखरती चली जाती हो मुझसे
और
साँझ को मुझे छोड़ दूब की देहरी पर विलुप्त हो जाती हो।”
_अंकिता ‘श्री’
#छोटा_दरवाज़ा@Bharatibindoo2
प्रेम से रिक्त हुई आँखों में
उतर आता है अनकहा सावन
इसलिए कुछ स्थान, कुछ रिश्ते
यूँ ही खाली मत छोड़ देना
क्योंकि जहाँ मनुष्य नहीं ठहरते
वहाँ वक़्त ठहर जाता है
और वक़्त की बैठी हुई धूल
सदियों में भी नहीं झड़ती...!!
आज फिर दिल ने शोर से दूर
ख़ामोशी का किनारा चुन लिया
न कोई शिकायत...न कोई गिला
बस वक़्त के साथ बहना चुन लिया
जहाँ लहरें बोलती नहीं...
मगर बहुत कुछ कह जाती है
जहाँ बादल ठहरते नहीं...
मगर सुकून छोड़ जाते है
उसी अनकहे, अनसुने एहसास में
मैंने अपने मन का घर चुन लिया!
#छोटा_दरवाज़ा
अपने हाथों की लकीरों में सजा ले मुझ को
मैं हूँ तेरा तू नसीब अपना बना ले मुझ को
मैं जो काँटा हूँ तो चल मुझ से बचा कर दामन
मैं हूँ गर फूल तो जूड़े में सजा ले मुझ को
🍁🍁
क़तील शिफ़ाई