अभी तो करेंट अफेयर्स भी बचा हुआ है!
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे हुए अभिनव ने मन ही मन कहा....जैसे ही करेंट अफेयर्स की मासिक पत्रिका की तरफ़ अभिनव ने हाथ बढ़ाया, उसी वक्त उसकी की निगाह अपने मोबाइल की स्क्रीन पर गई ।
व्हाट्सएप पर अग्रिमा के मैसेज का नोटिफिकेशन उसे दिखाई दिया, जो 2 घंटे पहले का था।
"आज भी नहीं वक्त है?आज भी फ्री नहीं हो पाओगे न ?"
अग्रिमा का ये मैसेज पढ़ते ही अभिनव ने तुरंत ही जवाब दिया .."अरे नहीं, ऐसी बात नहीं। 7 बजे शर्मा फुटवियर के पास मिलो।" अभिनव ने थोड़ा घबराकर रिप्लाई किया।
(शर्मा फुटवियर जो अग्रिमा के घर से 200-300 मीटर की दूरी पर था। यहीं से हमेशा अभिनव अपनी बाइक से अग्रिमा को पिक करता था)
क्षण भर में मैसेज सीन हुआ और ब्लू टिक के साथ ही अग्रिमा इज टाइपिंग...जब स्क्रीन पर अभिनव ने देखा तो प्रेमिका का जो खौफ होता है, वही खौफ अभिनव के चेहरे पर था। लेकिन रिप्लाई में जब "ठीक है" के साथ तिरछा मुंह बनाए हुई स्माइली आई तो अभिनव ने थोड़ा मुस्कुराकर राहत की सांस ली।
अभिनव - "अच्छा सुनो रेड कलर वाला वो नया सूट पहन के आना"
अग्रिमा -"नहीं, वो नहीं पहन के आउंगी।
साथ ही लाल मुंह वाली स्माइली भी रिप्लाई में दिखीं।..
अभिनव -"अच्छा ठीक 7 बजे, ज्यादा इंतज़ार न करवाना"।
"अब तुम तैयार होने दो तो मोबाइल साइड रखूं?"
अग्रिमा ने जवाब दिया
"अच्छी सूरत को संवरने की जरूरत क्या है
सादगी में भी कयामत की अदा होती है।"
अभिनव ने मुस्कराते हुए टाइप किया और सेंड कर दिया।
'"मतलब तुम्हें कोई मौका छोड़ना नहीं है"
थोड़ा इठलाते हुए अग्रिमा ने जवाब दिया ।
अच्छा अब मैं तैयार हो लूं ..अग्रिमा ने मैसेज किया ..
अभिनव ने भी "ठीक है, 7 बजे।" का मैसेज टाइप किया और सेंड किया और तैयार होने लगा।
(बार बार 7 बजे पर विशेष फोकस से प्रतीत हो रहा था कि इस बार अभिनव को अग्रिमा का शायद ज्यादा इंतज़ार न करना पड़े।)
अपने वादे के मुताबिक़ ठीक 7 बजे अभिनव , शर्मा फुटवियर वाली गली में अपनी बाइक रोक कर अग्रिमा का इंतज़ार करने लगा।
"तमाम उम्र तिरा इंतिज़ार कर लेंगे
मगर ये रंज रहेगा कि ज़िंदगी कम है"
शाहिद सिद्दीकी का ये शेर अग्रिमा ने अपनी मोबाइल स्क्रीन पर देखा और अपने कदमों की गति और तेज़ कर दी।
(अग्रिमा को पता था अभिनव को ऐसे गली में खड़े होकर इंतज़ार करना पसंद नहीं था।)
"बस आ ही चुकी" चलते चलते ही मैसेज टाइप करके अग्रिमा ने सेंड किया । अग्रिमा ने देखा कि 7:15 हो चुका है।
अभिनव ने मैसेज रीड किया और पीछे मुड़ा तो देखा कि रेड सूट पहने हुई अग्रिमा पीछे ही खड़ी थी। दोनों एक दूसरे को देख के मुस्कुराए और उसके बाद जैसे ही अग्रिमा बाइक पर बैठी वैसे ही हर बार की तरह अभिनव ने अग्रिमा से पूछा, "अच्छा कहां चलना है?
"कैंट चलो, बूढ़े बाबा के यहां कुल्लड़ वाली चाय पियेंगे फिर कहीं सुकून से बैठ लेंगे।" अग्रिमा ने अभिनव के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।
अभिनव ने भी साइड मिरर सेट किया जिसमें वो पीछे बैठी हुई अग्रिमा को देख सके।
अभिनव को मिरर सेट करते हुए हमेशा की तरह अग्रिमा ने नोटिस किया और मुस्कुराकर अपना सिर अभिनव की पीठ पर टिका दिया।
- अखिल
आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।
साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर 'सब कुछ' पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।
बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि 'असंभव' कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है।
मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आयी हूँ। सच यह है कि सबसे ज़्यादा मैंने ही पाया, और वो कर्ज़ और भी बढ़ता गया। लोग मेरी ख़ुशी में मुझसे ज़्यादा ख़ुश हुए। उन्होंने मुझे तब भी उसी विश्वास से देखा, जब मैं खुद ही थकी या टूटी थी। और इसी ने आगे बढ़ते रहने की हिम्मत दी। इतना प्यार, इतना सम्मान, इतना अपनापन मिला, कि मेरी झोली पूरी भर गयी। और इसमें उन साथियों, अधिकारियों और कर्मचारियों का भी बहुत बड़ा श्रेय है जिन्होंने मेरे कंधे से कंधा मिलाकर काम किया और साथ डटे रहे।
आज आभार से आँखें नम हैं। बस एक दृश्य इनमें बसा है। लहुरिया दह की पहाड़ी की वो वृद्ध माँ, जो अपने गाँव में पहली बार पानी पहुँचता देख कुछ नहीं बोली, बस काँपते हाथों से मेरा सिर छूकर आशीर्वाद दे गई। पद तो आज छूट गया, पर वह स्पर्श जीवन भर नहीं छूटेगा। और वह सपना भी नहीं छूटेगा, जो देश की इस मिट्टी ने मुझे दिया है।
आपकी अपनी,
दिव्या मित्तल
जब ब्राह्मण समाज की लड़कियों के लिए कुछ लोग बड़ी-बड़ी बातें कहते हैं, “मुझे तो ब्राह्मण की लड़की चाहिए”, तो सवाल ये है कि लड़की ले लेने से क्या लड़का भी ब्राह्मण हो जाता है?
अंबेडकर की पत्नी ब्राह्मण थीं। हमारे कन्नौज के विधायक-मंत्री जी की पत्नी ब्राह्मण हैं। रामविलास पासवान की पत्नी भी ब्राह्मण थीं। लेकिन क्या उनके बच्चे ब्राह्मण पैदा हुए?
लड़की ले ली आपने, लेकिन लड़के को ब्राह्मण नहीं बना पाए। फिर सिर्फ ब्राह्मण समाज पर लगातार हमला क्यों?
हमारे समाज की सामाजिक स्थिति ऐसी बना दी गई है कि लोग खुलकर बोल भी नहीं पाते, क्योंकि एससी-एसटी एक्ट का डर सामने खड़ा कर दिया गया है।
हमारी समाज की बच्चियाँ डरती हैं घर से निकलने में। बहुत से परिवार उन्हें बाहर भेजना तक बंद कर देते हैं। लेकिन जरूरतें सबकी होती हैं। जैसे आपकी बेटियाँ पैसा कमाने के लिए घर से निकलती हैं, वैसे ही हमारी बेटियाँ भी निकलती हैं।
अगर किसी के पास भरपूर पैसा है तो बात अलग है, लेकिन हर परिवार इतना सक्षम नहीं होता। सवाल सिर्फ ब्राह्मण समाज की बेटियों का नहीं है, सवाल उनके सम्मान, सुरक्षा और बराबरी के अधिकार का है।
मीडिया में खबरें चलती हैं कि मोदी-शाह की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे 24 घंटे राजनीति करते हैं। एक घंटा क्या, एक सेकंड भी आराम नहीं करते। लगातार राजनीति करते हैं। यही वजह है कि वे इतनी तेजी से आगे बढ़े हैं।
लेकिन जैसे ही विपक्ष किसी मुद्दे पर बात करता है, यही लोग रोने लगते हैं कि "इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।"
ये कैसी दो कौड़ी की सोच है? खुद 24 घंटे राजनीति करेंगे, लेकिन दूसरों को ज्ञान देंगे कि राजनीति मत करो!
एक महीने से बच्चे सड़क पर बैठे थे। तब समझ में नहीं आया कि मामला गंभीर है? अब अचानक लग रहा है कि यह गहन समस्या है और इस पर गहराई से विचार होना चाहिए? अभी तक क्या मक्खियाँ मार रहे थे?
It was such a peaceful movement, feel so sad that it had to take a violent turn. My heart goes out to the students and their families who were hurt. Paper leak is a very serious issue, and I am glad to know n see that the kids of our country have come together for a better educational system, and their parents supported them.
I truly appreciate the stand they have taken, showing dedication, sincerity, and keenness to study hard n make their future and a greater, educated India. This andolan, this protest, is the right way to go abt it, n the students have done this peacefully. So courageous and brave. Driven and motivated towards education, this generation will make India proud.
This issue is between the students and the educational system, it should not be hijacked politically, the credit should only go to the students of our country, and I am sure the government will also give them all the support n make it a stronger educational system. It’s a win-win situation. Hoping n praying for a positive decision. God bless all of you who wanna be educated.
Education should be the next trend and fashion, and should get trendier n more fashionable yr by yr, itna k bahar se log come to India to study and India becomes an educational hub.
तुम कौन से पंजाब के मुख्यमंत्री हो जो तुम्हें जाना पड़ा ?
दूसरे लोगों की बलि देकर आंदोलन चुराना, फर्जी आंदोलन तैयार करना और उससे फायदा उठाना पुराना खेल है गुरु
एक बेईमान नेता हटेगा दूसरा बेईमान उसकी जगह आएगा, एक बेईमान पार्टी हटेगी दूसरी बेईमान पार्टी उसकी जगह आएगी, एक का हटना दूसरे का आना कोई हल है ही नहीं,
●जहां भाजपा सरकार है वहाँ विपक्षी पार्टियां लोकतंत्र की दुहाई देते हुए छाती पीटती हैं,
●जहां विपक्षी पार्टियों की सरकार है वहाँ भाजपा लोकतंत्र की दुहाई देते हुए छाती पीटती हैं,
ऐसा एक राज्य बताइये जहां बेरोजगारी, महंगाई और पेपर लीक जैसी समस्याएं नहीं हैं? ऐसा राज्य बताइये जहां स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्थायें दुरुस्त हैं? राज्यों को आपस में कमपेयर करने पर आपको कुछ बेहतर उदाहरण मिल सकते हैं लेकिन जैसे ही आप उनको चीन, अमेरिका और यूरोपीय देशों से तुलना करेंगे आप शत प्रतिशत निराश होंगे,
जो पार्टी सत्ता में आती है दमनकारी नीतियां अपनाती है, किस पार्टी में अनपढ़, गुंडे, माफिया, अपराधी नहीं भरे हुए हैं? किस पार्टी में भाई भतीजा वाद नहीं है? किस पार्टी ने भ्रष्टाचार की नई परिभाषाएं नहीं लिखी हैं?
इन सभी का हल सिस्टम को ट्रांसपैरेंट और अकाउंटेबल बना कर होगा, जब तक सिस्टम के मूलभूत ढांचों में सिस्टेमिक बदलाव नहीं होंगे तब तक भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं से हमें निजात मिलना असंभव है,
•सिस्टम में समस्याओं के टेक बेस्ड हल,
•पॉवरफुल ट्रांसपैरेरेंसी टूल्स का निर्माण और एग्जिस्टिंग टूल्स को मजबूत करना
•नीचे से ऊपर तक की जवाबदेही फिक्स करने के रिफॉर्म
•स्ट्रॉन्ग, ट्रांसपेरेंट , इफेक्टिव , एक्सेसिबल और अफोर्डेबल ग्रीवैंस रीड्रेसल मैकेनिज्म
•कम्यूनिटी पार्टीसीपेशन ,
•जूडिशल रिफॉर्म
•पुलिस रिफॉर्म
•स्टॉप क्रिमिनलाईजेशन ऑफ पालिटिक्स
•स्ट्रॉन्ग विशिलब्लोअर कानून
•नौकरशाही और प्रशासनिक सेटअप में बदलाव
देश में आंदोलन होते रहे हैं और होते रहेंगे, लेकिन हर एक आंदोलन का लक्ष्य सत्ता परिवर्तन होता है, हमारे सामने हमारे देश के ही कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय उदाहरण हैं, उसके बाद क्या बदलाव आए?
आंदोलन तब प्रभावशाली और ऑर्गेनिक होता है जब उसका नेतृत्व समझदार , लक्ष्य पर केंद्रित, अन्य पोलिटिकल पार्टीज से स्टेज साझा न करना, बेवकूफ़ी भरे नारों से दूरी बनाना और आगे की रणनीति समझदारी से बनाने पर होता है,
देश में आंदोलन आगे भी होते रहेंगे, लेकिन जब तक हम मूलभूत ढांचों के बदलावों पर चर्चा नहीं करेंगे तब तक देश में कोई भी बदलाव सम्भव नहीं है
जब भगवान के नाम पर कथा/प्रवचन करने वाले लोग चार्टर्ड विमान से घूमेंगे,आलीशान बंगलों में रहेंगे,ब्रांडेड कपड़े पहनेंगे और पूरी बेशर्मी से अपनी इस luxury lifestyle का दिखावा भी करेंगे तो धर्म के नाम पर लालच तो बढ़ेगा ही!आज धर्म के नाम पर हर तरफ व्यापार चल रहा है..और ये कथावाचक/प्रवचन करने वाले श्रोताओं को सादा जीवन जीने के उपदेश देते हैं😀 कहां से ये आपको साधु,संत,सिद्ध,महान दिखाई देते हैं? ये सब बस बिज़नेसमैन हैं और इन्हें वैसे ही देखा जाए..पैसे,पद,प्रसिद्धि के लालच में धर्म को बेच रहे व्यापारी🙏
यूपी – जिला शाहजहांपुर में आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री प्रीति की मौत हो गई !!
एंबुलेंस में मां की लाश लेकर जा रही बेटी स्मिता ने कहा– "मां को 4 महीने से सैलरी नहीं मिली। तबियत खराब होने के बावजूद मां से BLO सहित कई काम कराए गए। मां को अफसरों ने डांटा"
TMH मुंबई की फार्मेसी में कैंसर की उच्च गुणवत्ता की दवाईयां काफ़ी कम कीमत पर उपलब्ध रहती है ।
देश के हर राज्य में कैंसर के मरीज हैं ।
राज्यों के मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को पहल कर कोशिश करनी चाहिए की वो TMH मुंबई से समन्वय स्थापित कर अपने अपने राज्यों में TMH फार्मेसी खुलवाएँ ।
कृपया अपने राज्यों के मंत्रियों को टैग कर पूछें की वो कब ये पहल करेंगे ।
@JharkhandCMO@IrfanAnsariMLA
यूजीसी के जिन नियमों पर आज माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगाई है, वे वास्तव में जातिगत आरक्षण को और ज़्यादा बढ़ाने का प्रयास थे। इससे कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को भी जातिवाद की आग में झोंकने की कोशिश की गई।इसका सबसे ज़्यादा नुकसान सवर्ण समाज के गरीब लोगों को हो रहा है, जो पहले से ही आर्थिक रूप से कमज़ोर हैं।आरक्षण का आधार जाति नहीं बल्कि आर्थिक स्थिति होनी चाहिए। लाभ सबसे पहले उसी को मिलना चाहिए जो वास्तव में सबसे ज़्यादा गरीब और ज़रूरतमंद हो।
#यूजीसी
#आरक्षण
माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा UGC के नए नियमों पर रोक लगाया जाना न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कोर्ट ने स्वयं माना कि इन नियमों से भेदभाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
संविधान, समानता और छात्रों के अधिकार सर्वोपरि हैं।
सत्यमेव जयते!
#SupremeCourt
#WATCH | Delhi | SC stays UGC regulations 2026, TMC MP Kalyan Banerjee says," Supreme Court has done the right thing as the UGC guideline was unconstitutional..."