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ग्लोरिफ़िकेशन के ख़िलाफ़
सवाल जस का तस है, हम आज क्या ग्लोरिफ़ाई कर रहे हैं ? किसे ग्लोरिफ़ाई कर रहे हैं ? स्वरा के मामले में सबसे चिंताजनक कुछ है तो यह देखना कि आज भी सतीत्व या जौहर के पक्ष में बोलने वाले पुरुष, स्त्रियां भी, जिनकी देह से पितृसत्ता ने अस्मिता, इज़्ज़त, सम्मान, ऑनर, संस्कार, प्रतिष्ठा की घटिया परिभाषाएं जोड़ रखी हैं, बड़ी संख्या में ये लोग स्वरा के लिए नफ़रत दिखा रहे हैं।
वही घिसपिटा पर गहरे धंसा स्त्रीद्वेषी, मनुवादी, इस्लामोफ़ोबिक, पितृसत्तात्मक मानसिकता वाले कुतर्क -
पहले तो स्वरा को बॉडीशेम करो, फिर क्योंकि उनका पार्टनर एक मुस्लिम परिवार से आता है तो अपनी इस्लामोफ़ोबिक मानसिकता का मूर्खतापूर्ण प्रदर्शन करो। फिर भद्दी-भद्दी गालियाँ, जो लड़कियां दें तो देश के प्रधानमंत्री रील बनाकर उसकी आलोचना करते हैं, और यदि लड़के-पुरुष वही गालियां दें तो उसका सामान्यीकरण किया जाता है, बल्कि यह सामान्यीकरण वैश्विक रूप में हो चुका है।
तक़लीफ़देह यह भी है कि लोग स्वरा की कही बात को अनायास दूसरी बात से जोड़कर मुद्दा बना रहे हैं, जिसमें ट्रोलर्स माहिर होते हैं।
उनकी जिस बात पर इतना हंगामा हो रहा है, वह पद्मावती या उस घटना से संबंधित ही नहीं है।
यह बात कि क्या रेप होने के बाद किसी स्त्री का अंत हो जाता है, और उसे मार जाना चाहिए! नहीं। ऐसा करना जाहिर है कायरता है, और ऐसा सोचना बिल्कुल ग़लत और अमानवीय। यह वैचारिक विमर्श है। स्वरा ने दरअसल प्रगतिशील विचार को बेहद संवेदनशील और बेबाक़ी से रखा है।
उनकी कहीं इस बात को मेरे हिसाब से इस पीढ़ी को याद रख इसे आगे बढ़ाने का काम करना चाहिए। वैसे भी विश्व में रोज़ स्त्रियां, बच्चे, कमज़ोर, हिंसा के शिकार हो रहे हैं, जिसपर समाज को जागरूक होना है, सरकारों को सतर्क होना है। ऊपर से सतीत्व, जौहर, ऑनर किलिंग, तालिबानी फ़रमान, ख़ाप पंचायतों के कुतर्क इत्यादि के नाम पर भी स्त्रियां कब तक मरती रहेंगी ?
इज़्ज़त के नाम पर मरने-मारने के पुरुषों के क़िस्सों को भी ग्लोरिफ़ाई नहीं करना है, मनुष्यता बचानी है।
स्त्रियो! तुम्हारी इज़्ज़त देह ही नहीं है, कि कोई आया इसे छुआ या अपना लिंग तुम्हारी योनि में डाला तो तुम ख़त्म!! बल्कि ज़िंदा रहना चुनना डिग्निटी है।यही बात उन पुरुषों पर भी लागू होती है जो आत्महत्या चुनते हैं। हर लिंग के लोगों के मानसिक दोहन का एक ही दुश्मन है, पितृसत्तात्मक मानसिकता।
एक रियलिटी शो है ‘भोजपुरिया बवाल’ नाम है शायद, उसके कुछ क्लिप्स सामने आए तो उसे देख रही थी, चर्चित अभिनेत्रियां बता रही हैं कि फला अभिनेता ने मुझे धमकी दी, मुझे डराया, मुझे धमकाया, मेरे साथ सबकुछ किया, उनसे जुड़े लोग भी आरोप लगाए जा रहे हैं इत्यादि, पर समाज में इस सब पर एक चुप्पी है। वही तथाकथित हीरो, इसी समाज में ग्लोरिफ़ाई किए जाते हैं, जैसे वो कितने बड़े आदर्श हों। ख़ैर।
@ReallySwara आपको मेरा सलाम पहुँचे।
आपने उस बहस को छेड़ा है जिसे कबका मुख्यधारा का हिस्सा बन जाना चाहिए था।इस समाज को समझ आए शायद कभी कि क्या ग्लोरिफ़ाई नहीं करना है।
💛✊🏽
#SwaraBhasker #jauhar #feminismmatters
प्रिय @RahulGandhi
आप वह कर्ण बन गए हैं जिस का रथ अनेकों शल्य हाँक रहे हैं। ये शल्य आपके सारथी नहीं है, ये आपकी हार का कारण बनेंगे।
महाराज शल्य पाण्डवों के मामा थे जिन्हें दुर्योधन ने छल से अपनी सेना में शामिल किया था। छले जाने के बाद पश्चाताप में शल्य ने पाण्डवों को वचन दिया था कि जैसे भी हो वह कौरव सेना में रह कर भी पाण्डवों की विजय सुनिश्चित करेंगे, और फिर आता है कर्ण-अर्जुन का वह निर्णायक युद्ध जिस में कर्ण का रथ चला रहे शल्य हर पल कर्ण को हतोत्साहित करते हैं। अर्जुन की प्रशंसा और कर्ण की निंदा को शल्य ने हथियार बना कर हर पल कर्ण की ऊर्जा कम करने की कोशिश की और अंत में धंसे हुए रथ को बाहर निकालने से मना कर दिया। कर्ण हारा नहीं था उसे हराया गया था। एक नहीं बहुत से छलों द्वारा, एक नहीं अनेक षडयंत्रों द्वारा।
राहुल आपके रथ की बागडोर अनेक शल्य रूपी छलिए पकड़ के बैठे है। ये सारे बस इस प्रतीक्षा में है कब आपका रथ धंसेगा और कब ये आपकी हत्या करेंगे। इस बार अंतर ये है कि ये शल्य कौरवों की ओर से भेजे हुए हैं क्योंकि स्त्री अस्मिता की रक्षा तो आप कर रहे हैं। ये शल्य सिर्फ़ आपको हतोत्साहित ही नहीं कर रहे उल्टा आपको ऐसे महामानव की उपाधि देना चाहते हैं जिसका आप स्वयं विरोध करते आए हो। ये शल्य आपके विजय धनुष को पिनाक से बड़ा बतायेंगे, ये आपको परशुराम से भी अधिक कुशल होने का दावा करेंगे, ये आपकी प्रत्यंचा की टंकार को नरसिंह का नाद कहेंगे लेकिन कभी आपको बाण अनुसंधान नहीं करने देंगे। ये कभी भी आपका रथ सही दिशा में नहीं जाने देंगे।
नया युग है ,नई महाभारत है, नए शल्य हैं अतः हे सत्यरथी स्वयं को कभी महारथी न समझना। जब समय आएगा, आपको संसार स्वयं ही सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर पुकारेगा। सिर्फ़ युद्ध करिए, अपने पूरे पौरुष से युद्ध करिए, त्याग दीजिए शल्य जैसे सारथियों को। आप स्वयं एक सारथी पुत्र हैं, एक ऐसी सारथी जिसने वर्षों तक कांग्रेस का रथ कुशलता से चलाया है। अंततः हे सोनिया-नंदन! शल्यों को पहचानिए और रथ की बागडोर स्वयं संभालिए।
- रुद्राक्षधारी
CC: @priyankagandhi@INCIndia
ایسے انداز میں وہ میر سناتی ہے کاف
ایک شاگرد محبت میں ہے اُستانی کی
'ऐसे अंदाज़ में वो 'मीर' सुनाती है 'काफ़
एक शागिर्द मुहब्बत में है उस्तानी की
- کاف
- काफ़